आधी रात का सन्नाटा कमरे में पसरा था, सिवाए खिड़की के बाहर बरसती बूँदों की धीमी थाप के। प्रिया सोफे पर सिमटी बैठी थी, उसकी उंगलियाँ एक पुरानी किताब के पन्नों पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। मोमबत्ती की लौ उसके चेहरे पर सुनहरी रोशनी डाल रही थी, उसकी आँखों में एक गहरी, अनकही बेचैनी तैर रही थी। वह एक ऐसी दुनिया में खोई हुई थी जहाँ प्रेम इतना तीव्र और वास्तविक था कि उसकी अपनी हकीकत फीकी पड़ने लगी थी। वह एक *passionate late night romance novel* में पूरी तरह डूबी हुई थी, जहाँ पात्रों की भावनाएं इतनी उमड़ती-घुमड़ती थीं कि वह खुद उनमें बहती जा रही थी।
तभी, कमरे के दरवाजे पर एक हल्की सी आहट हुई। प्रिया ने चौंककर देखा। रोहन वहाँ खड़ा था, उसके हाथों में दो कप चाय थे और उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान। “अभी तक जाग रही हो? मैंने सोचा कि तुम कब की सपनों की दुनिया में खो चुकी होगी,” उसने धीमी, मीठी आवाज़ में कहा।
प्रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी उपन्यास की दुनिया का जादू था। “बस, यह किताब… यह इतनी अच्छी है कि मुझे इसे छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा।”
रोहन उसके पास आकर बैठ गया, एक कप चाय उसे पकड़ाया और खुद दूसरा कप लेकर चुस्की ली। उसकी नज़र किताब पर पड़ी। “ओह, एक और भावुक प्रेम कहानी? मुझे लगता है कि तुम आजकल इन्हीं में खोई रहती हो।” उसने प्यार से उसके बालों को सहलाया।
“यह सिर्फ ‘भावुक’ नहीं है, रोहन,” प्रिया ने गहरी साँस ली। “यह एक *passionate late night romance novel* है। इसमें जो जुनून है, जो गहराई है, वह मुझे सोचने पर मजबूर करती है… कि क्या हमारी ज़िंदगी में भी ऐसा कुछ है, या क्या हम बस… जी रहे हैं?” उसकी आवाज़ में एक हल्की उदासी थी, एक सवाल था जो उसने कभी सीधे नहीं पूछा था।
रोहन ने उसका हाथ अपने हाथ में लिया, उसकी उंगलियों को धीरे से सहलाया। उसकी आँखों में एक गहरी चमक थी। “क्या तुम्हें सच में ऐसा लगता है, प्रिया? कि हमारा प्यार फीका पड़ गया है? क्या तुम्हें लगता है कि सिर्फ़ किताबों में ही ऐसा जुनून पाया जा सकता है?”
प्रिया की नज़रें उसके चेहरे पर टिक गईं। उसके स्पर्श में, उसकी आवाज़ में एक ऐसी गर्माहट थी जो उसे फिर से अपनी ओर खींच रही थी। उसने महसूस किया कि रोहन की आँखों में वही चमक थी जो उपन्यास के नायक की आँखों में वर्णित थी।
“मैं नहीं जानती,” उसने फुसफुसाया। “कभी-कभी… कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम एक-दूसरे को हल्के में लेने लगे हैं।”
रोहन ने मुस्कुराते हुए किताब उसके हाथ से धीरे से ले ली और उसे सोफे पर एक तरफ रख दिया। “तो फिर, आज रात हम उस गलतफहमी को दूर कर देंगे। आज रात, प्रिया, हम अपनी खुद की कहानी लिखेंगे। एक ऐसी कहानी, जो किसी भी *passionate late night romance novel* से कम नहीं होगी।”
उसने अपना हाथ उसके गाल पर रखा, उसके अंगूठे ने धीरे से उसकी त्वचा को सहलाया। प्रिया की धड़कनें तेज़ हो गईं। मोमबत्ती की रोशनी उनके चेहरों पर झिलमिला रही थी, और बारिश की आवाज़ अब एक मधुर संगीत सी लग रही थी। रोहन धीरे-धीरे उसकी ओर झुका, उसकी आँखें उसकी आँखों में गहराती जा रही थीं, जैसे उनमें कोई गहरा राज़ छिपा हो।
“मुझे लगता है कि हमारी कहानी शुरू हो चुकी है,” प्रिया ने लगभग साँस रोके हुए कहा।
रोहन ने उसे अपने बाहों में भर लिया, उसके होठों ने उसके होठों को छू लिया। वह चुंबन गहरा और भावुक था, जिसमें वर्षों का प्यार, वर्षों की समझ और एक नई, उमड़ती हुई इच्छा थी। यह किसी उपन्यास के पन्नों से कहीं ज़्यादा वास्तविक और तीव्र था। उस देर रात के सन्नाटे में, प्रिया और रोहन ने पाया कि उनका अपना प्यार किसी भी काल्पनिक कहानी से ज़्यादा गहरा और जोशीला था। यह वह रात थी जब उन्होंने अपनी मोहब्बत को नए सिरे से जीना शुरू किया, और उन्हें एहसास हुआ कि उनकी अपनी ज़िंदगी भी एक बेहद खूबसूरत और भावुक प्रेम कहानी बन सकती है।
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