आज की उमस भरी रात में प्रिया का दिल, घर की बिजली की तरह, रह-रहकर धक-धक कर रहा था। पति राघव के शहर से बाहर जाने के बाद, घर में सिर्फ देवर राहुल और वो अकेली थीं। राहुल का गठीला बदन और गहरी आँखें आजकल प्रिया की रातों की नींद हराम कर रही थीं। दालान में बैठे राहुल को पानी देते हुए प्रिया का आँचल सरक गया और उसकी नंगी कमर का हिस्सा राहुल की नज़रों से छुप न सका। एक पल को राहुल की आँखें टिक गईं और प्रिया ने उस पल की तपिश को अपनी त्वचा पर महसूस किया। उसने तुरंत आँचल संभाला, पर **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** की जो चिंगारी भीतर सुलग रही थी, वो अब ज्वाला बनने को बेताब थी।
रात गहरा रही थी। पंखे की धीमी आवाज़ के बावजूद, कमरे में घुटन थी। प्रिया ने एक पतली कॉटन की साड़ी पहन रखी थी, पर अंदर ही अंदर आग लगी थी। राहुल अपने कमरे से निकलकर पानी पीने आया। रसोई में प्रिया को देख वह ठिठक गया। “भाभी, नींद नहीं आ रही क्या?” उसने फुसफुसाते हुए पूछा। प्रिया ने पलट कर देखा। राहुल की टी-शर्ट पसीने से हल्की गीली थी और उसके सीने की उभार स्पष्ट दिख रही थी। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं। “नहीं राहुल, बस ऐसे ही… गर्मी बहुत है।”
राहुल प्रिया के करीब आया। “हाँ, इस गर्मी में कुछ ठंडा हो जाए तो मज़ा आ जाए।” उसकी नज़रों में एक शरारत थी। प्रिया समझ गई, वह सिर्फ पानी की बात नहीं कर रहा था। प्रिया ने धीरे से अपने हाथ में पकड़ा गिलास रख दिया। उसकी निगाहें राहुल के होंठों पर थीं जो प्यास से सूखे लग रहे थे। अचानक राहुल ने अपना हाथ बढ़ाया और प्रिया की कमर को हल्के से सहलाया। प्रिया चौंक गई, पर उसने विरोध नहीं किया। उसकी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी – डर की नहीं, बल्कि इच्छा की।
“राहुल…” प्रिया के मुँह से मुश्किल से निकला। राहुल का हाथ अब प्रिया की साड़ी के नीचे खिसक रहा था, उसकी गर्म हथेली प्रिया की कोमल त्वचा से टकराई। प्रिया के शरीर में सिहरन दौड़ गई। राहुल ने उसे अपनी ओर खींचा और प्रिया का सुडौल बदन राहुल से सट गया। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी साँस ली। राहुल के होंठ प्रिया की गर्दन पर उतर आए, और उसने अपने दाँतों से प्रिया की त्वचा को हल्का-सा काटा। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** अब अपने चरम पर था, कोई परवाह नहीं थी।
राहुल ने प्रिया को बाहों में उठाया और धीरे से उसे अपने कमरे में ले गया। धीमी रोशनी में प्रिया का चेहरा लाल था, आँखें कामुकता से भरी थीं। राहुल ने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। उसके होंठों ने प्रिया के होंठों को ऐसे चूमा जैसे कोई प्यासा सदियों बाद पानी पी रहा हो। प्रिया ने भी पूरी शिद्दत से जवाब दिया, उसके हाथ राहुल के बालों में उलझ गए। राहुल ने प्रिया की साड़ी खोलनी शुरू की, एक-एक करके परतें हटती गईं और प्रिया का गोरा बदन राहुल की नज़रों के सामने बेपर्दा होता गया।
उसने प्रिया की ब्रा का हुक खोला और उसके भरे हुए स्तनों को अपनी हथेलियों में भर लिया। प्रिया के मुँह से सिर्फ बेकाबू आहें निकल रही थीं। राहुल ने उसके निप्पल्स को अपनी जीभ से छेड़ा और प्रिया का बदन मचल उठा। राहुल ने अपने कपड़े उतारे और दोनों जिस्म अब एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। उनकी त्वचा की रगड़ से एक ऐसी आग भड़की जिसने कमरे की सारी हवा को गर्म कर दिया। राहुल ने धीरे से प्रिया की जांघों को खोला और उसके अंतरंग हिस्सों को सहलाया। प्रिया की कामुकता अब बेकाबू थी, वह हर हद पार करने को तैयार थी।
राहुल ने खुद को प्रिया के भीतर उतारा और प्रिया ने एक गहरी चीख के साथ उसे अपनी देह में समा लिया। उनके जिस्मों का मिलन ऐसा था जैसे सदियों से बिछड़े दो प्रेमी एक हो रहे हों। हर धक्के के साथ प्रिया राहुल को और कसकर अपनी बाहों में भींच लेती। “आह… राहुल… और… और तेज़…” वह हाँफते हुए फुसफुसाई। राहुल ने उसकी बात मानी और अपनी गति बढ़ा दी। कमरा उनके जिस्मों के मिलन की आवाज़ों और आहों से गूँज रहा था। प्रिया ने अपने पैरों को राहुल की कमर पर कस लिया और उसकी पीठ को अपने नाखूनों से खरोंचा। **भाभी का देवर के प्रति आकर्षण** अब संतुष्टि की पराकाष्ठा पर था। दोनों ने एक साथ चरम सुख को पाया और एक-दूसरे की बाहों में निढाल होकर गिर पड़े, उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं, पर दिल पूरी तरह शांत और तृप्त। यह रात हमेशा के लिए उनकी यादों में अंकित हो गई थी।
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