दोपहर की तपती धूप में, जब पूरा घर गहरी नींद में था, प्रिया के मन में एक अजीब सी हलचल थी। उसके पति राहुल, हमेशा की तरह, शहर गए हुए थे और शाम से पहले लौटने वाले नहीं थे। यह अकेलापन उसे हर रोज एक नई कसक देता था। उसका मन एक ऐसी आग से जल रहा था जिसे बुझाने वाला कोई नहीं था। तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। प्रिया ने साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए पूछा, “कौन है?”।
“भाभी, मैं विकास।”
विकास की आवाज़ सुनते ही प्रिया के दिल की धड़कनें तेज़ हो गईं। विकास, राहुल का छोटा भाई, उम्र में राहुल से काफी छोटा था, पर उसकी आँखों में अक्सर प्रिया के लिए एक अनकही चाहत तैरती रहती थी।
प्रिया ने दरवाजा खोला। विकास हल्के बदन पर एक टी-शर्ट और लोअर पहने हुए था, उसके पसीने से भीगे बाल उसकी पेशानी पर चिपके थे। उसकी मर्दाना गंध प्रिया के नथुनों में घुस गई और उसे एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हुई।
“भाभी, पानी मिलेगा?” विकास ने पूछा, पर उसकी आँखें प्रिया के ढीले पल्लू से झाँकती हुई छाती पर टिकी थीं।
“हाँ, आओ अंदर,” प्रिया ने कहा, अपनी ही आवाज में एक लरजिश महसूस करते हुए।
विकास अंदर आया और प्रिया ने उसे पानी दिया। दोनों एक पल के लिए चुपचाप खड़े रहे। कमरे में सिर्फ कूलर की आवाज़ और उनके दिलों की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। प्रिया को महसूस हुआ कि विकास की आँखें उसे ऐसे चीर रही थीं, जैसे उसके शरीर का एक-एक अंग उनके लिए नया निमंत्रण दे रहा हो। उसे खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। इस ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी की शुरुआत इसी अजीब खिंचाव से हुई थी।
अचानक विकास ने आगे बढ़कर प्रिया का हाथ थाम लिया। प्रिया ने एक पल के लिए हाथ छुड़ाने की कोशिश की, पर उसकी इच्छा शक्ति ने साथ नहीं दिया। विकास ने उसके हाथ को कसकर पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींच लिया। प्रिया का मांसल शरीर विकास की छाती से जा लगा। विकास की गरम साँसें प्रिया के होंठों से टकराईं और प्रिया की सारी मर्यादा पिघलने लगी।
“भाभी…” विकास की आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी।
“विकास… छोड़ो…” प्रिया ने कहा, पर उसके शरीर ने हार मान ली थी।
विकास ने बिना कुछ कहे प्रिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक तेज़, वासनामय चुंबन। प्रिया ने पहले तो हिचकिचाहट महसूस की, पर फिर उसकी आँखों में भी वही आग जल उठी। उसने विकास को कसकर पकड़ लिया और बदले में उसे उतनी ही शिद्दत से चूमा। उनके होंठों का मिलन गहरा होता गया, जीभ एक-दूसरे में उलझ गईं, और दोनों की साँसें तेज होने लगीं।
विकास ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया। उसकी साड़ी का पल्लू पहले ही कंधे से खिसक चुका था। विकास ने उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। प्रिया के स्तन, जो इतने सालों से राहुल के लापरवाह स्पर्श के लिए तरस रहे थे, अब विकास की उँगलियों के हल्के स्पर्श से ही कड़े हो उठे। विकास ने उसके ब्लाउज को उतार फेंका और फिर उसकी ब्रा को भी। प्रिया के उभरे हुए, भूखे स्तन अब विकास की आँखों के सामने थे। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा भूखा हो। प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। उसके हाथों ने विकास के बालों को कसकर पकड़ लिया।
विकास ने धीरे-धीरे प्रिया की साड़ी को भी उसके शरीर से अलग कर दिया। अब प्रिया सिर्फ पेटीकोट और पैंटी में थी। विकास की आँखें उसकी गोरी, चिकनी जाँघों पर ठहर गईं। उसने अपना लोअर और टी-शर्ट भी उतार फेंका। दोनों नग्न थे, उनकी देह की आग एक दूसरे को महसूस कर रही थी। विकास ने प्रिया की पैंटी को भी नीचे खिसका दिया। प्रिया की योनि, गीली और उत्सुक, विकास के सामने उजागर थी। विकास ने प्रिया के पैरों को फैलाया और उसके गुप्तांगों पर अपने होंठ रख दिए। प्रिया के शरीर में एक तेज़ करंट दौड़ गया। उसने कसकर चादर पकड़ ली और अपनी पीठ को मोड़ लिया। विकास के हर स्पर्श से प्रिया के अंदर की प्यास और बढ़ती जा रही थी।
फिर विकास ने अपनी स्थिति संभाली, और प्रिया की टाँगों को ऊपर उठा लिया। उसने अपने कड़े, गरम लिंग को प्रिया की योनि के द्वार पर रखा। प्रिया ने एक पल के लिए आँखें मूँद लीं, इस ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी का चरमोत्कर्ष अब बस होने वाला था। विकास ने एक धीमा धक्का दिया, और उसका लिंग प्रिया के अंदर सरक गया। प्रिया के मुँह से एक चीख निकली, पर विकास ने उसे अपने होंठों से दबा दिया।
धीरे-धीरे, दोनों की गति बढ़ती गई। विकास के धक्के गहरे और तेज़ होते गए, और प्रिया ने भी उतने ही जोश से उसका साथ दिया। बिस्तर चरमरा रहा था, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे, और उनके मुँह से निकलती उत्तेजित आवाज़ें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। प्रिया को लगा कि उसका शरीर जल रहा है, और फिर एक तेज़ कसक के साथ उसे गहरा सुख मिला। विकास ने भी कुछ और झटके दिए और फिर प्रिया के भीतर ही अपना सारा रस उड़ेल दिया।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक कर लेटे रहे। प्रिया का शरीर शांत हो चुका था, पर उसके मन में एक अजीब सी तृप्ति थी, और साथ ही इस ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी के नए अध्याय का रोमांच भी। यह एक ऐसा मीठा अपराध था, जो अब उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनने वाला था। प्रिया ने विकास के माथे पर एक हल्का चुंबन दिया, यह जानते हुए कि उनका यह चोरी का प्यार अब कभी खत्म नहीं होगा, बस और गहरा होता जाएगा।
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