आधी रात की खामोशी में जब प्रिया के कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला, तो उसकी साँसें थम सी गईं। सामने उसका देवर राजेश खड़ा था, जिसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो उसकी अपनी ही वासना को आईना दिखा रही थी। प्रिया पिछले कुछ महीनों से अपने पति सुरेश की बेरुखी से जूझ रही थी। उसका जवान बदन, उसकी प्यासी आत्मा, हर रात एक अंजान आग में सुलगती थी। राजेश की ये आँखें, उसके होंठों पर कभी-कभार फिसलती हल्की मुस्कान, प्रिया के सूखे दिल में उम्मीद की एक चिंगारी सुलगा चुकी थी।
“भाभी…” राजेश की आवाज़ काँप रही थी, उसकी आँखें प्रिया के ढीले ब्लाउज़ से झाँकते वक्षों पर टिकी थीं। प्रिया ने अपने पल्लू को कसकर पकड़ा, पर मन ही मन वो चाहती थी कि राजेश आगे बढ़े। आज की रात, उसे पता था, कुछ ख़ास होने वाला था। यह ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी उसकी अपनी ज़िंदगी में साकार होने वाली थी।
राजेश एक कदम आगे बढ़ा और दरवाज़ा धीरे से बंद कर दिया। कमरे में पसरा हल्का-सा अँधेरा उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था। राजेश के मज़बूत हाथ प्रिया की कमर पर आए और एक पल में उसने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया के होठों से एक हल्की सी सिसकी निकली, पर वो विरोध नहीं कर पाई। उसकी आँखें बंद हो चुकी थीं, और वो खुद को राजेश के हवाले कर चुकी थी। राजेश ने अपने होंठ प्रिया के होंठों पर रख दिए। ये कोई हल्का-फुल्का चुंबन नहीं था, बल्कि एक भूखा, बेकाबू चुंबन था, जिसमें सालों की दबी हुई हसरतें पिघल रही थीं। प्रिया ने भी अपने होंठ खोल दिए और राजेश की जीभ को अपने मुँह में महसूस किया। उसकी गरम साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं, और उसका बदन आग की तरह जल रहा था।
राजेश के हाथ अब प्रिया की कमर से होते हुए उसकी पीठ पर थे, और फिर धीरे-धीरे उसने ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। प्रिया का बदन काँप रहा था, पर वो खुद को रोक नहीं पाई। ब्लाउज़ ज़मीन पर गिरा और उसके स्तन राजेश की आँखों के सामने थे। राजेश ने बिना देर किए प्रिया को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर आ गया। उसके होंठ प्रिया के गले से होते हुए, उसके वक्षों पर उतर गए। प्रिया की आहें कमरे में गूँजने लगीं। राजेश ने उसके एक स्तन को अपने मुँह में लिया और जोर से चूसा, जैसे कोई बच्चा दूध पीता है। प्रिया की कमर मचल उठी और वो राजेश के बालों में अपनी उँगलियाँ फेरने लगी।
राजेश ने एक हाथ से प्रिया की साड़ी और पेटीकोट खींचकर उतार दिया। प्रिया अब केवल अपनी जाँघिया में थी, जो उसकी प्यासी योनि के ऊपर कसकर तनी हुई थी। राजेश ने अपनी जीभ से जाँघिया के ऊपर से ही उसके गुप्तांग को छेड़ा। प्रिया चीख पड़ी, “आह्ह्हह… राजेश…”। अब सब कुछ बेकाबू हो चुका था। राजेश ने जाँघिया को एक झटके में उतारा और प्रिया की मदमस्त योनि उसके सामने थी। राजेश ने अपनी पैंट खोली और उसका मज़बूत लिंग प्रिया की आँखों के सामने लहरा रहा था। प्रिया की आँखें वासना से भरी थीं, वो बेताबी से उस पल का इंतज़ार कर रही थी।
राजेश ने प्रिया की टाँगों को उठाया और अपने लिंग को उसकी योनि के द्वार पर टिका दिया। प्रिया ने अपनी कमर उठाई और राजेश ने एक ही झटके में अपना पूरा लिंग प्रिया के अंदर उतार दिया। प्रिया के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, पर यह दर्द से ज़्यादा आनंद की चीख थी। राजेश ने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। हर धक्का प्रिया को स्वर्ग की सैर करा रहा था। उनकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं, पसीना बह रहा था और बिस्तर उनके जिस्मों के हिलने से चरमरा रहा था।
“आह्ह्ह्ह… और तेज़… राजेश…” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा। राजेश ने उसकी बात मानी और अपनी गति और तेज़ कर दी। उनके जिस्म एक-दूसरे से टकरा रहे थे, और हर टक्कर एक नई लहर पैदा कर रही थी। प्रिया को लगा जैसे उसकी आत्मा अपने बदन से निकलकर राजेश में समा रही है। यह ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी का सबसे सुनहरा अध्याय था। कुछ देर बाद, प्रिया का बदन ऐंठा और वो चरम सुख की गहराई में डूब गई। उसके तुरंत बाद, राजेश ने भी एक गहरी आह भरी और अपना सारा प्रेम प्रिया के अंदर उड़ेल दिया।
दोनों एक-दूसरे के ऊपर निढाल पड़े थे, उनकी साँसें अभी भी तेज़ी से चल रही थीं। प्रिया ने राजेश को कसकर गले लगाया। आज रात, उसने वो पा लिया था, जिसकी उसे अरसे से तलाश थी। राजेश ने प्रिया के बालों को सहलाया और उसके कान में फुसफुसाया, “भाभी, ये तो बस शुरुआत है।” प्रिया मुस्कुराई। उसे पता था कि अब उनके ससुराल में चोरी का प्यार की ये कहानी हर रात एक नया मोड़ लेगी, और वो इस चोरी के रिश्ते को हर कीमत पर निभाने को तैयार थी। आज से, उसकी रातें अकेली नहीं थीं, बल्कि राजेश की बाँहों में सुकून पा चुकी थीं।
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