देवर राजेश की आँखें अपनी भाभी प्रिया के हर अंग पर ठहर जातीं, जब वो आंगन में काम करती। उसकी साड़ी का पल्लू जब सरकता, तो राजेश की साँसें तेज़ हो जातीं। गाँव के इस शांत घर में, जहाँ मर्यादा की दीवारें ऊँची थीं, वहीं चोरी का प्यार अपनी जड़ें जमा रहा था। राजेश के दिल में प्रिया के लिए एक गहरी, वर्जित चाहत कब से पल रही थी, ये उसे खुद भी पता नहीं था। प्रिया, अपनी उम्र से कहीं ज़्यादा आकर्षक, और उसके पति, राजेश के बड़े भाई, अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते। यह अकेलापन ही तो था, जो इन दो शरीरों के बीच की दूरी को कम कर रहा था।
पिछले कुछ दिनों से भैया शहर गए हुए थे, और घर में बस राजेश और प्रिया ही थे। रात का खाना खत्म कर जब प्रिया रसोई समेट रही थी, तो राजेश अक्सर वहीं खड़ा हो जाता, बस उसे निहारता। प्रिया जानती थी, राजेश की नज़रें क्या कह रही हैं, और कहीं न कहीं उसकी खुद की देह में भी एक अनजानी आग सुलग रही थी। उसकी भूखी आँखें राजेश के युवा, गठीले बदन पर थिरकतीं, और वो खुद को इस एहसास से रोक नहीं पाती थी।
एक रात, आसमान में घने बादल छाए हुए थे, और अचानक बिजली गुल हो गई। पूरा घर अँधेरे में डूब गया। प्रिया दीये जलाने के लिए माचिस ढूँढ रही थी, तभी राजेश चुपचाप उसके पीछे आ खड़ा हुआ। अँधेरे का फायदा उठाते हुए उसने धीरे से प्रिया की कमर को छू लिया। प्रिया चौंक तो गई, पर हटी नहीं। उसकी देह में सिहरन दौड़ गई, जो डर से ज़्यादा उत्तेजना की थी। राजेश की उंगलियाँ उसकी साड़ी के पल्लू के नीचे से सरकती हुई उसकी नंगी त्वचा को छू गईं, और प्रिया ने एक दबी हुई आह भरी।
राजेश के हाथ धीरे-धीरे प्रिया की कमर से ऊपर चढ़ते गए, उसकी मुलायम त्वचा को सहलाते हुए। प्रिया की साँसें अटक गईं। “राजेश, ये तुम क्या कर रहे हो?” उसने काँपती आवाज़ में कहा, पर उसके शरीर ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि और करीब सरक गया। राजेश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया का रेशमी बदन उसके सीने से सटते ही, दोनों के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। राजेश के होंठ प्रिया के नरम होंठों पर टूट पड़े। वो एक जंगली प्यास थी, जो सालों से दबी हुई थी। प्रिया भी खुद को रोक न सकी। उसकी देह में आग लगी हुई थी। राजेश ने उसे गोद में उठा लिया और धीरे से उसके कमरे की ओर ले गया। दरवाज़ा बंद होते ही, मर्यादा की सारी दीवारें ढह गईं, और वे एक-दूसरे में समा गए।
चाँदनी की हल्की रोशनी खिड़की से कमरे में आ रही थी, जिसमें उनके नग्न शरीर एक-दूसरे में उलझे हुए किसी कलाकृति से लग रहे थे। राजेश ने प्रिया की साड़ी और ब्लाउज उतार दिया, उसके उन्नत वक्षस्थल को अपने हाथों में भर लिया। प्रिया की आहें कमरे में गूँजने लगीं। राजेश ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर छा गया। उनके शरीर की हर रेखा एक-दूसरे को पुकार रही थी, हर स्पर्श एक गहरा राज़ खोल रहा था। राजेश की उंगलियाँ प्रिया के भीतरी अंगों को टटोलने लगीं, जिससे प्रिया दर्द और आनंद के मिश्रण में चीख उठी। “और, राजेश, और…” वो फुसफुसाई। राजेश ने अपने होंठ उसके गर्दन पर फेरे, फिर धीरे-धीरे नीचे उतरते गए, उसके पेट से होते हुए उसकी जांघों के बीच पहुँच गए। प्रिया की जांघें खुद-ब-खुद फैल गईं, राजेश को अपनी प्यास बुझाने का पूरा न्यौता दे रही थीं। उसने बिना किसी झिझक के अपनी मर्दानगी प्रिया के भीतर उतार दी। प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकलीं, जो जल्द ही सुख की चीखों में बदल गईं।
उनकी हर साँस, हर स्पर्श, हर हलचल में सालों की दबी हुई वासना थी। वे एक-दूसरे में ऐसे खो गए थे, जैसे दो आत्माएं सदियों से बिछड़ी हों और आज मिली हों। एक के बाद एक कई तूफानी लहरें उनके शरीरों से गुजरती रहीं, जब तक कि दोनों पूरी तरह निढाल न हो गए। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो प्यासे दिलों का संगम था, जो चोरी-छिपे एक-दूसरे को चाहते थे। इस रात ने उन्हें एहसास कराया कि ससुराल में चोरी का प्यार हिंदी कहानी हमेशा ऐसे ही जुनून और वर्जित आनंद से भरी होती है।
सुबह की पहली किरण फूटने से पहले, वे फिर से अलग हो गए, अपने कपड़ों में सिमट गए। चेहरे पर थोड़ी शर्म, पर आँखों में वही चमक, वही गुप्त वासना। उन्होंने एक-दूसरे को देखा, एक मौन वादा, एक गुप्त समझौता। यह रात उनके जीवन की एक अनकही सच्चाई बन गई थी, एक ऐसा मीठा पाप जिसका स्वाद वो बार-बार चखना चाहेंगे। ससुराल की दीवारों के पीछे पनपा यह चोरी का प्यार अब उनके दिलों में हमेशा के लिए बस गया था, एक रहस्य जो सिर्फ उनकी देह जानती थी।
Leave a Reply