गर्मी की उस दोपहर, जब सूरज आग उगल रहा था और घर का हर कोना सूना पड़ा था, मेरी नज़रों ने रिया भाभी के पसीने से भीगे जिस्म पर ऐसी शरारत देखी, जिसने मेरे अंदर की आग को और भड़का दिया। वो नीली साड़ी में किचन में खड़ी कुछ काम कर रही थीं, और साड़ी का पल्लू बार-बार उनके वक्षों के उभार से सरक कर नीचे आ जाता था, उनकी गोल, भरी हुई नाभि का दीदार करवाता। उनकी गीली पीठ पर पसीने की बूंदे मोतियों सी चमक रही थीं। मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मचने लगी। मैं आर्यन, अपने बड़े भाई की पत्नी, रिया भाभी पर पिछले कुछ समय से फ़िदा था। उनकी भरी जवानी, उनकी चाल, उनका बात करने का अंदाज़ – सब कुछ मुझे अपनी ओर खींचता था। आज घर में कोई नहीं था, और यह मौका मुझे किसी तोहफे से कम नहीं लग रहा था।
“भाभी, पानी दूं?” मैंने आवाज़ दी, जो शायद थोड़ा कांप रही थी।
रिया भाभी ने चौंककर देखा। उनकी बड़ी-बड़ी आंखें, काजल से सजी, एक पल को मुझसे मिलीं और फिर शरम से झुक गईं। “हां आर्यन, दे दे।”
मैं पानी का गिलास लेकर उनके पास गया। जैसे ही उन्होंने गिलास पकड़ा, मेरी उंगलियां उनकी मुलायम उंगलियों से छू गईं। एक बिजली का करंट मेरे पूरे जिस्म में दौड़ गया। उन्होंने भी हल्की सी सिहरन महसूस की और पल भर के लिए उनकी नज़र फिर मेरी आंखों से मिली। उस पल मुझे लगा, यही तो है वो पल, जो एक भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी की शुरुआत है।
मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रखा, जहां साड़ी पतली सी थी और उनका जिस्म आग सा तप रहा था। उन्होंने सांस रोकी, पर विरोध नहीं किया। मैंने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे उनकी कमर पर फिराना शुरू किया, फिर उन्हें अपनी ओर खींच लिया। “भाभी, आप इतनी खूबसूरत क्यों हो?” मैंने फुसफुसाते हुए उनके कान में कहा।
उनके होंठ कांप रहे थे, “आर्यन… ये ठीक नहीं है…”
“पर मुझे तो अच्छा लग रहा है भाभी,” मैंने उन्हें और कस कर अपनी बाहों में भर लिया। उनकी गोल, भरी हुई छातियां मेरे सीने से चिपक गईं। उनके जिस्म से उठती मदहोश कर देने वाली खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैंने उनके गर्दन पर अपने होंठ रखे और एक गीला चुंबन दिया। उन्होंने एक गहरी आह भरी और उनका हाथ मेरी कमीज को कसकर पकड़ लिया।
बस, यही वो इशारा था जिसकी मुझे ज़रूरत थी। मैंने उन्हें पलटकर अपनी बाहों में उठाया और बेडरूम की ओर चला। कमरे में हल्की रोशनी थी और गर्म हवा किसी नशीली खुश्बू से भरी थी। मैंने उन्हें धीरे से बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। उनकी आंखें बंद थीं, होंठ खुले हुए थे और सांसें तेज़ चल रही थीं। मैंने उनके सूखे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा पानी पीता है। उन्होंने भी पूरी शिद्दत से मेरा साथ दिया, उनकी जीभ मेरी जीभ से उलझ गई और कमरे में एक कामुक सिसकियों का सिलसिला शुरू हो गया।
धीरे-धीरे, मैंने उनकी साड़ी खोली, फिर उनका ब्लाउज। उनकी गोरी त्वचा पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। उनके वक्ष, गुलाबी निप्पल्स के साथ, मेरे सामने बिल्कुल नग्न थे। मैंने झुककर उन्हें अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा। रिया भाभी के मुंह से एक गहरी, संतुष्टि भरी आह निकली। उनके हाथ मेरे बालों को कसकर पकड़ रहे थे। मैं जानता था, आज उन्हें पूरी तरह से अपना बना लेना है, यह एक भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी का सबसे अहम मोड़ था।
मैंने उनके पेट पर, उनकी नाभि पर चुंबन करते हुए नीचे की ओर बढ़ा। उनकी पैंटी को एक झटके में उतारा और उनके कामुक अंगों को देखा। उनकी योनि पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, मेरे लिए बेताब। मैंने बिना किसी देर के अपने होंठ उनके रसभरे फांकों पर रख दिए और उन्हें चूसना शुरू कर दिया। रिया भाभी की आहें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। “आर्यन… आह… बस… और नहीं…” पर उनकी आवाज़ में ‘बस’ नहीं, ‘और’ की चाहत थी।
जब वो पूरी तरह से तड़पने लगीं, तो मैंने अपनी पैंट उतारी और अपने उत्तेजित शिश्न को उनके हाथों में दे दिया। उन्होंने एक पल के लिए उसे छुआ, उसकी गर्मी महसूस की और फिर अपनी आंखें बंद कर लीं। मैंने धीरे-धीरे अपने शिश्न को उनकी योनि के द्वार पर रखा और एक गहरा धक्का दिया। एक साथ, हम दोनों के मुंह से चीख निकली। उनका कुंवारापन तो नहीं था, पर मेरे लिए उनकी योनि का यह आलिंगन बिल्कुल नया था। मैंने धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। रिया भाभी की आहें और मेरे धक्के, दोनों मिलकर जैसे एक ही ताल में बज रहे थे। वो पूरी तरह मेरी बाहों में पिघल चुकी थी, और मैं जानता था कि यह सच में एक भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी बन रही है।
हमारे जिस्मों का मिलन घंटों तक चलता रहा। हर धक्का, हर आह, हर चुंबन हमें एक-दूसरे के और करीब ला रहा था। जब हम दोनों ने एक साथ अपनी चरम सीमा को छुआ, तो रिया भाभी ने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से खुरच दिया और मेरे कान में फुसफुसाई, “आर्यन… मैं… मैं तुम्हारी हूं…”
अगली सुबह, जब वो मेरे सामने हल्की सी मुस्कुराहट लिए चाय बना रही थी, तो मैं जानता था कि मैंने उसे अपनी दीवानी बना लिया है। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह तो एक भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी का बस एक अध्याय था, जिसके पन्ने अभी खुलने बाकी थे। और मैं, आर्यन, उन पन्नों को पलटने के लिए पूरी तरह तैयार था।
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