उसकी साड़ी का पल्लू जब मेरे हाथ से टकराया, तो रूह तक सिहर उठी। रात के दस बज चुके थे और अमित, मेरा जिगरी दोस्त, अपने ऑफिस की किसी अर्जेंट कॉल में फंसा हुआ था। हम दोनों, मैं और प्रिया, उसके लिविंग रूम में अकेले थे, जहाँ हल्की रोशनी और धीमी आवाज़ में बजता संगीत माहौल को और भी रूमानी बना रहा था। प्रिया, मेरी दोस्त की बीवी, हमेशा से मेरे दिल में एक अनकही चाहत बनकर रही थी। आज, उसकी गुलाबी साड़ी में लिपटी देह और काजल से सजी आँखें मुझे साफ निमंत्रण दे रही थीं।
मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उसके पल्लू को छू लिया। एक क्षण के लिए उसने आँखें उठाकर मुझे देखा, फिर एक धीमी सी मुस्कान दी। “और कुछ चाहिए, रोहन?” उसकी आवाज़ में शहद घुला था। “हाँ… शायद,” मैंने धीमी, भारी आवाज़ में कहा, और उसके और करीब सरक गया। उसके शरीर की खुशबू, इत्र और पसीने का मिश्रण, मुझे मदहोश कर रही थी। सालों से दबाकर रखी वासना आज उफान पर थी। मुझे पता था कि हम दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध की सीमा लाँघ रहे थे, और यही ख़तरा इस पल को और भी रोमांचक बना रहा था।
“शायद क्या?” उसने फुसफुसाते हुए पूछा, और मेरा हाथ उसकी जांघ पर पहुँच गया। वह सिहर उठी, पर हटी नहीं। उसकी गर्म, मुलायम जांघों को महसूस करते ही मेरा मन बेकाबू हो उठा। मैंने उसका चेहरा अपनी ओर खींचा और उसके रसीले होंठों को अपने होंठों में भर लिया। वह पहले थोड़ी हिचकिचाई, फिर खुद को मेरे हवाले कर दिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और उसकी जीभ ने मेरी जीभ के साथ खेलना शुरू कर दिया। यह सिर्फ़ एक चुंबन नहीं था, यह प्यास थी, वर्षों की दबी हुई चाहत का विस्फोट था।
मेरे हाथ उसकी साड़ी में अंदर घुस गए और उसके पेट की नर्म त्वचा को सहलाने लगे। वह कराह उठी और अपनी हथेलियाँ मेरी गर्दन पर रख दीं, मेरी कमीज़ को कसकर पकड़ लिया। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बेडरूम की ओर बढ़ गया। दरवाज़ा बंद होते ही मैंने उसे बिस्तर पर हल्के से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसकी आँखें चमक रही थीं, लालसा से भरी हुई। “रोहन…” उसने मेरा नाम इस तरह पुकारा, जैसे वह खुद भी इस अनैतिक संबंध को चाहती हो।
मैंने उसकी साड़ी खोली, एक-एक करके उसके अंग मेरे सामने अनावृत होते गए। पहले गुलाबी ब्लाउज़, फिर ब्रा, उसके सुडौल स्तनों का उभार और निप्पल की लाली मुझे पागल कर रही थी। मैंने उसके होंठों को फिर से चूमा और उसके एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया, निप्पल को चूसते हुए। वह आहें भर रही थी, उसकी देह मेरे स्पर्श पर थिरक रही थी। मेरे हाथ अब उसकी पेटीकोट के अंदर थे, उसकी पैंटी को एक ही झटके में फाड़कर हटा दिया। उसकी योनि से निकलता गीलापन मेरे अंग को और उत्तेजित कर रहा था।
मैंने अपने कपड़े उतारे और उसके ऊपर आ गया। हमारी देह एक-दूसरे से चिपक गईं, गर्मी और वासना का ज्वार उठ रहा था। मैंने धीरे से अपने कठोर अंग को उसकी गर्म, गीली योनि पर टिकाया। उसकी आँखें बंद थीं, होंठ खुले थे, और वह मुझे अंदर आने का मौन निमंत्रण दे रही थी। एक ही झटके में मैंने अपने पूरे अंग को उसके अंदर धकेल दिया। वह एक तीखी चीख के साथ तड़प उठी, पर फिर मेरे कंधे को कसकर पकड़ लिया। उसकी योनि की गर्माहट और कसावट मुझे स्वर्ग का अनुभव करा रही थी।
हमारी साँसें तेज़ हो गईं, और हम एक-दूसरे में खो गए। मेरी हर धकेल पर वह आहें भरती, मेरे बालों को कसकर खींचती। बिस्तर चरमराती आवाज़ कर रहा था, और हमारे शरीर पसीने से भीग रहे थे। यह दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध का सबसे चरम सुख था। कुछ ही देर में, उसकी कमर ने एक तीव्र आर्क लिया और उसने अपने शरीर को कस लिया, फिर एक मीठी चीख के साथ वह मेरे ऊपर ढीली पड़ गई। कुछ ही पलों बाद मैं भी उसके भीतर अपनी सारी वासना उड़ेलकर निढाल हो गया। हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे में सिमटे रहे, दुनिया से बेखबर, वर्जित सुख की उस चादर में लिपटे हुए। यह रात हमेशा हमारी यादों में अनैतिक संबंध की सबसे मीठी निशानी बन कर रह गई थी।
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