वह मेरी दोस्त की बीवी थी, पर उसकी आंखों में आज जो प्यास थी, वह किसी भी मर्यादा को तोड़ने के लिए काफी थी। अमित, मेरा बचपन का दोस्त, शहर से बाहर था और प्रिया ने मुझे अपने घर कुछ मदद के बहाने बुलाया था। जब मैं उसके घर पहुंचा, तो उसने एक हल्की गुलाबी साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके सुडौल शरीर से ऐसे चिपकी थी मानो दूसरी त्वचा हो। पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, और उसकी गहरी नाभि का गड्ढा मुझे अंदर तक खींच रहा था।
“आइए रोहन, अमित नहीं है तो थोड़ा अकेलापन महसूस हो रहा है,” उसने धीमी, मादक आवाज़ में कहा। उसकी बात में एक अजीब-सा निमंत्रण था। मैं सोफे पर बैठ गया और वह मेरे बगल में। उसकी साँसों की गर्माहट मुझे अपनी बगल में महसूस हो रही थी। मैंने उसकी ओर देखा। उसकी बड़ी-बड़ी आँखें, काजल से सजी, सीधे मेरी आँखों में झाँक रही थीं। एक अजीब-सी बेचैनी मेरे अंदर करवट ले रही थी। यह दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध की शुरुआत थी, जिसकी कल्पना मात्र भी कभी मैंने नहीं की थी।
प्रिया ने चाय का कप पकड़ाया और जानबूझकर मेरी उंगलियों से अपनी उंगलियाँ छुवाईं। वह स्पर्श बिजली बनकर मेरे पूरे शरीर में दौड़ गया। “अकेलेपन में इंसान कुछ भी कर बैठता है, रोहन,” उसने एक शरारती मुस्कान के साथ कहा। मैंने उसके होंठों की ओर देखा, जो अब और भी रसीले लग रहे थे। मेरा हाथ धीरे से उसकी जांघ पर जा टिका। उसने आह भरी और अपनी आँखें बंद कर लीं। यह स्वीकृति थी, एक मौन आमंत्रण।
मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने अपना हाथ उसकी जांघ पर ऊपर की ओर सरकाना शुरू किया, साड़ी के कपड़े के नीचे उसकी मुलायम त्वचा को छूता हुआ। वह सिहर उठी। “रोहन…” उसकी आवाज़ अब कानाफूसी में बदल चुकी थी। मैंने उसकी कमर को पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसके रसीले होंठों पर टूट पड़ा। वह भी उतनी ही बेसब्री से मेरा साथ दे रही थी, उसकी जीभ मेरी जीभ से ऐसे उलझ गई मानो सदियों की प्यास बुझा रही हो। उसके हाथ मेरी गर्दन में उलझ गए और वह पूरी तरह से मुझमें समा गई।
धीरे-धीरे हम बेडरूम की ओर बढ़े, जहाँ पलंग पहले से ही हमारी वासना की आग को शांत करने के लिए बिछा था। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और उसे एक झटके में उसके कंधे से उतार फेंका। उसका ब्लाउज और पेटीकोट मैंने एक-एक करके उतारा, और उसके भरे-भरे स्तन मेरे सामने पूरी तरह उजागर हो गए। मैंने अपने होंठों से उसके गुलाबी निपल्स को छेड़ा, उन्हें चूसते हुए और वह सुखद आहें भरने लगी। उसकी साँसें तेज हो चुकी थीं, और वह अपने कूल्हों को मेरे शरीर पर रगड़ रही थी।
मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके। अब हम दोनों एक-दूसरे के सामने नग्न थे, वासना से तपते हुए। मैंने उसे पलंग पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसके शरीर की गर्माहट, उसकी त्वचा की खुशबू, सब कुछ मुझे मदहोश कर रहा था। मुझे पता था कि हम एक दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध की सारी हदें पार कर रहे हैं, पर इस पल मुझे इसकी कोई परवाह नहीं थी। मैंने अपने होंठों से उसके पेट, उसकी नाभि, और फिर नीचे की ओर बढ़ना शुरू किया।
जब मैं उसकी जांघों के बीच पहुंचा, तो वह तड़प उठी। उसकी योनि से रस बह रहा था, और मैंने उसे अपनी जीभ से चखा। वह स्वर्गिक स्वाद मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था। प्रिया अब मुझसे और इंतजार नहीं करवा पा रही थी। उसने मुझे अपनी ओर खींचा, “बस… अब और नहीं… अंदर आओ रोहन!”
मैंने उसके दोनों पैर फैलाए और अपने मजबूत लिंग को उसकी गर्म, गीली योनि में उतारा। पहली बार में वह थोड़ा अटक गया, पर उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठाया और मैं पूरा का पूरा उसमें समा गया। एक गहरी, सुखद चीख उसके मुंह से निकली। अब हम एक लय में थे, एक-दूसरे में खोए हुए। मैं उसे तेज़ झटके दे रहा था और वह हर वार पर मेरे नाम की चीख रही थी। मुझे इस दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध के जोखिम का एहसास था, पर इस वासना के तूफान में सब कुछ गौण हो चुका था।
हमारी साँसें तेज हो चुकी थीं, हमारे शरीर पसीने से भीग चुके थे। मैंने उसकी पीठ को अपनी उंगलियों से खरोंचा, और वह मेरे बाल खींचने लगी। अंत में, एक तेज, सुखद झटका लगा और हम दोनों एक साथ चरम सुख की गहरी खाई में जा गिरे। हमारे शरीर शिथिल होकर एक-दूसरे पर पड़े थे, एक गहरी शांति और तृप्ति ने हमें घेर लिया था। आज रात उन्होंने दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध की सारी हदें पार कर दी थीं।
हम काफी देर तक वैसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे, बिना कुछ बोले। सिर्फ हमारी धड़कनें थीं जो इस राज़ को जानती थीं। प्रिया ने मेरी ओर देखा, उसकी आँखों में वही प्यास अब और भी गहरी हो चुकी थी, पर साथ ही एक संतुष्टि भी थी। उसने मेरे माथे पर धीरे से एक चुंबन दिया। यह रात खत्म होने वाली थी, पर हम दोनों जानते थे कि यह तो बस शुरुआत थी।
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