होटल के इस एकांत कमरे में दाखिल होते ही, प्रिया की आँखें रवि की आँखों से मिलीं और एक नशीली बिजली पूरे जिस्म में दौड़ गई। दरवाज़ा बंद होते ही रवि ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया, उसकी गर्म साँसें प्रिया की गर्दन पर महसूस होते ही प्रिया का बदन काँप उठा। “कितना इंतज़ार किया है इस पल का, मेरी जान,” रवि ने फुसफुसाते हुए उसके होंठों को अपने होंठों से कुचल दिया। वह प्यासी थी, उतनी ही प्यासी जितना रवि था। उनकी जीभें एक-दूसरे से गुत्थमगुत्था हुईं, हर चुंबन गहरी और जंगली वासना से भरा था।
प्रिया की रेशमी साड़ी धीरे-धीरे सरक रही थी, रवि के हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी नंगी पीठ पर पहुँच गए। उसने साड़ी का आँचल खींचकर दूर फेंका और फिर ब्लाउज के हुक खोलने लगा। प्रिया ने भी बेचैनी से रवि की कमीज के बटन खोले। कपड़े ज़मीन पर गिरते जा रहे थे, एक-एक करके, जैसे उनके बीच की हर बंदिश टूट रही हो। अब वे एक-दूसरे के सामने सिर्फ़ अंतरवस्त्रों में थे, उनकी आँखें एक-दूसरे के बेताब जिस्मों को निहार रही थीं। प्रिया की आँखों में शरम की जगह अब सिर्फ़ उत्तेजना थी, एक ऐसी आग जो उसे जलाकर राख कर देने को आतुर थी।
रवि ने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और उसके ऊपर झुक गया। उसके हाथ प्रिया के वक्ष पर पहुँच गए, कसकर उन्हें सहलाते हुए उसने प्रिया के होठों पर फिर से हमला किया। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं, उसकी आहें कमरे की खामोशी तोड़ रही थीं। रवि के होंठ उसके वक्ष पर उतरे, उनके उभारों को चूमते हुए, धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ रहे थे। प्रिया ने अपने घुटने मोड़ लिए, उसकी साँसें अनियंत्रित हो गईं, जब रवि के हाथ उसकी जांघों के बीच से गुज़रते हुए उस नाज़ुक जगह तक पहुँचे, जो अब पूरी तरह भीग चुकी थी। “आह… रवि,” उसकी साँसों में एक दर्द भरी मीठी पुकार थी।
रवि ने उसके अंतरवस्त्रों को खींचकर एक तरफ किया, और फिर खुद भी अपनी आखिरी परत उतार फेंकी। प्रिया की आँखें रवि के मर्दाना अंग पर टिकीं, जो अब पूरी तरह से उत्तेजित था। एक पल के लिए दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा, इस क्षण की पवित्रता और वासना को महसूस करते हुए। यह सिर्फ़ एक मुलाक़ात नहीं थी, यह होटल में छिपे प्यार की अनकही दास्तान थी, जो उनके जिस्मों के ज़रिए लिखी जा रही थी।
रवि धीरे-धीरे उसके ऊपर आया, और प्रिया ने अपनी टांगें उसकी कमर के चारों ओर कस लीं। उसने एक गहरी साँस ली और धीरे से प्रिया के भीतर प्रवेश किया। प्रिया की एक सिसकी निकली, फिर एक गहरी आह। वे धीरे-धीरे हिलना शुरू हुए, हर गति के साथ उनके जिस्मों का संगम गहरा होता जा रहा था। बिस्तर चरमरा रहा था, उनके होंठ आपस में फिर जुड़ गए, इस बार और भी आवेग के साथ। रवि की गति तेज़ हुई, प्रिया ने भी उसके हर धक्के का जवाब दिया। उनके जिस्म पसीने से भीग गए थे, एक-दूसरे की गंध से मदहोश, वे इस क्षण में पूरी तरह खो चुके थे।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके नाखून रवि की पीठ पर गहरा निशान छोड़ रहे थे। “और… और तेज़, रवि,” उसने अपने आप को पूरी तरह से रवि को सौंपते हुए कहा। रवि ने उसकी बात मानी, उसकी कमर और तेज़ गति से चलने लगी, जब तक कि दोनों एक साथ, एक तीव्र झटके के साथ उस चरम सुख की ऊँचाई पर नहीं पहुँच गए। उनके जिस्मों से एक गहरी थरथराहट गुज़री, और वे एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए।
काफ़ी देर तक वे ऐसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे की साँसों को महसूस करते हुए। उनके जिस्मों की गरमी अब भी कम नहीं हुई थी। रवि ने प्रिया के माथे पर एक नम चुंबन दिया। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और उसकी आँखों में प्यार और तृप्ति के साथ देखा। “आज रात… सब कुछ भूल गई मैं,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। यह सिर्फ़ एक रात नहीं थी, यह होटल में छिपे प्यार की अनकही दास्तान का एक और अध्याय था, जो उनके दिल में हमेशा के लिए अंकित हो गया था। अगली मुलाक़ात का इंतज़ार फिर से शुरू हो चुका था, एक ऐसी प्यास के साथ जिसे सिर्फ़ वे दोनों ही बुझा सकते थे।
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