आधी रात का सन्नाटा, और कमरे में प्रिया की साँसों की धीमी गर्मी। साड़ी का पल्लू कंधे से फिसल चुका था और पतली मल-मल की पेटीकोट में उसका सुडौल बदन चाँदनी में एक रहस्यमयी आकृति गढ़ रहा था। तभी दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई। प्रिया हड़बड़ा गई, “कौन?” आवाज़ में घबराहट थी।
“मैं हूँ, प्रिया। रवि। क्या तुम सो गई?” जीजा रवि की भारी, मर्दाना आवाज़ ने प्रिया के दिल की धड़कनें बढ़ा दीं। उसे पता था रवि क्यों आया है। पिछले कुछ दिनों से उनकी निगाहें, उनके इशारे, सब कुछ इस पल की तरफ ही बढ़ रहे थे।
“नहीं, जीजा जी। आइए।” प्रिया ने अपनी आवाज़ को संयत करते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। रवि अंदर आया, उसकी आँखों में वही प्यास थी जो प्रिया ने महसूस की थी। उसने दरवाज़ा बंद किया, और कमरे में एक अजीब सी गर्मी घुल गई।
“तुम्हारी दीदी तो सो गई, मुझे पानी चाहिए था, बाहर अँधेरा था तो सोचा पूछ लूँ,” रवि ने बहाना बनाया, उसकी निगाहें प्रिया के खुले बालों और उसके गले की गुलाबी त्वचा पर टिकी थीं।
प्रिया को पता था ये सिर्फ पानी नहीं है। उसने हिम्मत बटोरी, “पानी तो है, जीजा जी, पर यहाँ कुछ और भी है जो आपकी प्यास बुझा सकता है।” उसकी आवाज़ में एक मीठी चुनौती थी।
रवि की आँखें चमक उठीं। उसने एक पल भी नहीं गंवाया। कदमों में तेज़ी आई और वह प्रिया के पास आ खड़ा हुआ। प्रिया का दिल धक-धक कर रहा था, उसके गाल सुर्ख लाल हो गए थे। रवि का हाथ धीरे से प्रिया की कमर पर गया, साड़ी का मुलायम कपड़ा उसके पोरों से सरक रहा था। प्रिया सिहर उठी।
“साली साहिबा, तुम्हारी इस अदा ने तो मेरे होश उड़ा दिए हैं,” रवि ने उसकी कमर को ज़ोर से भींचते हुए कहा, उसकी आँखों में वासना की आग धधक रही थी।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी गर्दन रवि की तरफ झुक गई। रवि ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक गहरा, प्यासा चुंबन। प्रिया ने भी अपना पूरा शरीर उस चुंबन में उड़ेल दिया, अपने हाथ रवि की गर्दन में डाल दिए।
यह कोई सामान्य जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी नहीं था, यह दो प्यासे शरीरों की मिलन की तीव्र इच्छा थी जो अब तक दबी हुई थी। चुंबन गहरा होता चला गया। रवि के हाथ प्रिया की कमर से होते हुए उसके कूल्हों पर पहुँच गए, और उसने प्रिया को अपनी तरफ खींच लिया। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं।
रवि ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, और उसके ऊपर आ गया। प्रिया की साड़ी अब पूरी तरह से उसके शरीर से उतर चुकी थी, और वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी। रवि ने अपने हाथों से उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए। प्रिया की धड़कनें बेकाबू थीं। ब्लाउज उतारते ही, उसके सुडौल, भरे हुए स्तन रवि की आँखों के सामने थे।
“कितनी खूबसूरत हो तुम, प्रिया,” रवि ने उसके एक स्तन को अपने मुँह में भरते हुए कहा। प्रिया दर्द और आनंद के मिश्रित भाव से कराह उठी। रवि ने अपने होंठों से उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया, गर्दन, कंधे, पेट, जांघें…
प्रिया ने रवि के बाल पकड़ लिए, और उसे और खींच लिया। उसकी योनि अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी, एक अजीब सी खुजली और टीस उठ रही थी। रवि ने उसके पेटीकोट को भी उतार फेंका। अब प्रिया पूरी तरह नग्न थी, रवि की वासना भरी नज़रों के सामने।
रवि ने भी अपने कपड़े उतार दिए। प्रिया की आँखें रवि के मर्दाना शरीर पर टिकीं। वो अपने जीजा को इस रूप में देखकर सिहर उठी, लेकिन उसकी उत्तेजना कहीं अधिक थी।
“अब और इंतजार नहीं होता, जीजा जी,” प्रिया ने बेताब होकर कहा।
रवि ने एक पल की भी देरी नहीं की। उसने प्रिया की जाँघों को फैलाया और धीरे-धीरे उसके भीतर समाने लगा। प्रिया की एक चीख़ निकली, लेकिन वह चीख़ जल्द ही आनंद की आह में बदल गई। रवि की हर धकेल के साथ, प्रिया का शरीर और आत्मा एक नए आनंद में डूब रही थी।
कमरे की हवा वासना और पसीने से भर गई थी। बिस्तर की चरमराहट, शरीरों का मिलन, और दोनों की साँसों की तेज़ आवाज़ें, सब मिलकर एक अद्भुत संगीत रच रही थीं। जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी अब अपने चरम पर था। रवि ने अपनी गति बढ़ा दी, और प्रिया भी उसके साथ पूरी तरह से लयबद्ध हो गई। वह अपने कूल्हों को उठाकर रवि के हर वार का जवाब दे रही थी।
अंततः, एक तीव्र, रोमांचकारी झटके के साथ, दोनों शरीरों ने अपने चरम को छुआ। प्रिया के शरीर में एक तेज़ कंपकंपी उठी और वह रवि से लिपट गई, उसकी सारी शक्ति खत्म हो चुकी थी। रवि ने भी अपनी गरमागरम बूंदें प्रिया के भीतर उड़ेल दीं।
दोनों थक कर एक-दूसरे से लिपट कर लेटे रहे। प्रिया ने रवि के सीने पर अपना सिर रख लिया। “मुझे नहीं पता था कि ये इतना… अच्छा होगा, जीजा जी,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। रवि ने उसे और कसकर अपनी बाहों में भर लिया। यह रात उनके लिए एक नया अध्याय खोल चुकी थी, एक ऐसा अध्याय जहाँ रिश्ते की सीमाएं वासना और प्रेम की आग में जलकर राख हो गई थीं।
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