आज रात तो बिस्तर पर केवल मैं और उसकी शरारती आँखें थीं, और कमरे की ख़ामोशी हमारी अधूरी कहानी लिखने को बेताब। मेरी पत्नी, संगीता, कुछ दिनों के लिए मायके गई थी, और उसकी छोटी बहन प्रिया, हमारे घर में मेरा साथ देने आई थी। लेकिन यह ‘साथ’ कब ‘तन्हाई’ में बदल गया और तन्हाई कब ‘गरमाहट’ में, हमें खुद पता नहीं चला। प्रिया की उम्र अभी बस इक्कीस-बाईस थी, खिलता हुआ यौवन, जिसकी छुपी हुई ज्वालाएँ मुझे कब से अपनी ओर खींच रही थीं।
शाम को खाना खाने के बाद हम दोनों लिविंग रूम में बैठे थे, एक पुरानी फिल्म देख रहे थे। हल्की रोशनी और कमरे में पसरी मंद सुगंध, माहौल को और भी मदहोश बना रही थी। प्रिया ने एक पतली, हल्की मैरून रंग की नाईटी पहन रखी थी, जो उसके सुडौल जिस्म पर ऐसे फिसल रही थी मानो वह कोई दूसरा ही शरीर हो। उसकी साँसों के साथ उसके उभरते-गिरते स्तन, मेरे दिल की धड़कनें तेज़ कर रहे थे। हमारे बीच की दूरी धीरे-धीरे कम होती जा रही थी। मैंने महसूस किया कि उसकी आँखें बार-बार मेरी तरफ उठ रही थीं, एक अजीब सी बेताबी, एक अनकही चाहत उनमें साफ़ झलक रही थी।
“जीजू, नींद नहीं आ रही है,” उसने अचानक कहा, उसकी आवाज़ में एक मीठी-सी थरथराहट थी।
मैंने उसके करीब झुकते हुए कहा, “तो क्या किया जाए, साहिबा?”
उसने धीरे से अपनी उंगलियाँ मेरे हाथ पर फेर दीं, एक बिजली का करंट मेरे पूरे शरीर में दौड़ गया। “जो दिल कहे…” उसकी साँसें मेरे कान के पास सुनाई दे रही थीं।
उस पल, सारी मर्यादाएँ, सारे रिश्ते-नाते धुआँ हो गए। मैं खुद को रोक नहीं पाया। मैंने उसकी नाजुक कमर को अपनी बाहों में भर लिया और उसे अपने और करीब खींच लिया। हमारे होंठ मिले, पहले धीरे से, फिर एक जंगली भूख के साथ। उसके अधरों का रस, मेरी आत्मा तक उतर रहा था। प्रिया ने भी पूरी शिद्दत से मेरा साथ दिया, उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में उलझ गईं और वह कसकर मेरी शर्ट को मुट्ठियों में भींच रही थी। यह जीजा साली का बेडरूम रोमांस, अब हमारे लिविंग रूम से बेडरूम की ओर बढ़ चला था।
मैंने उसे गोद में उठा लिया और सीधे बेडरूम की ओर बढ़ा। कमरे में एक मंद रोशनी वाला लैंप जल रहा था, जो हमारे जुनून को और भी गहरा रंग दे रहा था। मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसके गले से आती धीमी आहें, मेरे हर वार को और मजबूत कर रही थीं। मैंने उसकी नाईटी को धीरे से ऊपर सरकाया, और उसके गोरे, कामुक बदन से कपड़े का आखिरी कतरा भी अलग हो गया। उसके भरे हुए स्तन, गुलाबी निप्पल, मेरे सामने ऐसे थे मानो मुझे निगलने को तैयार हों। मैंने एक-एक कर उन पर अपनी प्यासी जुबान चलाई, और प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल पड़ीं।
“आह्ह्हह… जीजू… और… और तेज़,” उसकी मीठी गुहार मुझे और उत्तेजित कर रही थी।
मैं उसकी गीली पैंटी को एक ही झटके में उतार चुका था। उसकी कँवल सी जांघों के बीच, उसकी योनि अब पूरी तरह से मेरी उंगलियों का इंतज़ार कर रही थी। मैंने अपनी उंगली उसके भीतर डाली, और वह तुरंत कसक उठी। उसकी गरम और गीली गुफा में मेरी उंगली ऐसे अंदर-बाहर हो रही थी मानो वह कब से इसी पल का इंतज़ार कर रही हो।
अब और इंतज़ार असंभव था। मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए और उसके ऊपर आ गया। प्रिया की आँखें वासना में लाल थीं, वह पूरी तरह से समर्पण कर चुकी थी। मैंने अपने उत्तेजित अंग को उसके प्रवेश द्वार पर रखा और एक ही धक्के में उसे भीतर उतार दिया। “आह्ह्ह्ह्ह…!” प्रिया की चीख मेरे मुँह में दब गई। कुछ पल के दर्द के बाद वह भी मेरे साथ तालमेल बिठाने लगी। हमारी कमरें एक-दूसरे से टकरा रही थीं, और बेडरूम में सिर्फ हमारी साँसों और अंगों के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं।
मैं तेज़ और तेज़ होता गया, और प्रिया भी अब खुद को रोक नहीं पाई। “हाँ… जीजू… हाँ… मुझे और चाहिए… और… तेज!” उसके बालों को कसकर मैंने उसके चरम-सुख की ओर धकेला। कुछ ही पलों में, हम दोनों एक साथ बेकाबू हो गए। प्रिया का शरीर अकड़ गया और वह मेरे नीचे काँपने लगी। एक ही पल में, हम दोनों ने अपनी वासना की आग को शांत किया। मेरे भीतर का हर कण उसमें समा गया।
हाँफते हुए, एक-दूसरे की बाहों में हम पड़े थे। हमारी त्वचा अभी भी आग से दहक रही थी। उस रात, हमारे बीच का यह जीजा साली का बेडरूम रोमांस, हर सीमा तोड़ चुका था। एक गहरी संतुष्टि और तृप्ति का एहसास हमारे चेहरों पर साफ झलक रहा था। प्रिया ने अपनी आँखें खोलीं और एक शरारती मुस्कान के साथ मेरी ओर देखा। उसकी आँखों में अब कोई सवाल नहीं था, केवल एक गहरी चाहत थी जो कहती थी – यह तो बस शुरुआत है। और इस तरह, एक और अविस्मरणीय जीजा साली का बेडरूम रोमांस हमारे रिश्तों की नई परिभाषा लिख गया, एक ऐसा राज़ जो सिर्फ इस कमरे की दीवारों ने सुना था।
Leave a Reply