रात की मंद रोशनी में प्रिया की साड़ी का पल्लू जब उसकी कमर से सरका, तो राजन के सूखे गले से एक आह निकली। उसकी पत्नी कविता अपने मायके गई थी, और प्रिया, उसकी छोटी बहन, राजन के साथ कुछ दिन बिताने आई थी। यह पहला मौका था जब वे दोनों इतने करीब और अकेले थे, और इस अनजाने सानिध्य में एक अजीब सी उत्तेजना भरी थी।
प्रिया ने देखा कि जीजा की आँखें उस पर टिकी हैं। उसके गालों पर हल्की लाली फैल गई, पर उसने अपने पल्लू को ठीक करने की कोशिश नहीं की। उसके गुलाबी होंठों पर एक शरारती मुस्कान थी, जैसे वह जानती थी कि राजन क्या सोच रहा है। उनके बीच की दूरी कम होने लगी थी, हर दिन, हर घंटे के साथ। यह **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** अब सिर्फ मन तक सीमित नहीं रहा था।
“आज बहुत गर्मी है, जीजा जी,” प्रिया ने अपनी आवाज में हल्की शरारत घोलते हुए कहा, अपनी हथेलियों से हवा करते हुए।
राजन ने सिर्फ सिर हिलाया, उसकी नज़रें प्रिया के उठते-गिरते सीने से हट नहीं पा रही थीं। उसने देखा कि साड़ी के हल्के कपड़े के नीचे से उसके उभार स्पष्ट दिख रहे थे। एक मीठी सी खुश्बू प्रिया के शरीर से आ रही थी जो राजन के रोम-रोम में उतर रही थी।
धीरे-धीरे राजन उठा और प्रिया के पास जाकर बैठ गया। “हाँ, गर्मी तो है,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसका हाथ अनजाने में प्रिया के घुटने पर जा टिका। एक बिजली सी दौड़ी प्रिया के शरीर में, और उसने अपनी साँसें रोक लीं। राजन का हाथ धीरे से ऊपर सरका, उसकी पतली जांघों को छूता हुआ। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी धड़कनें तेज़ हो चुकी थीं।
राजन ने हिम्मत की और प्रिया की कमर पर अपना हाथ रख दिया। उसका स्पर्श इतना कोमल था, फिर भी उसमें एक गहरी आग छिपी थी। प्रिया ने अपनी पलकें खोलीं और राजन की आँखों में देखा। उन आँखों में सिर्फ चाहत नहीं थी, एक वर्षों से दबी हुई भूख थी। उसने धीरे से राजन के हाथ पर अपना हाथ रखा, उसे आगे बढ़ने की मौन स्वीकृति दे दी।
जीजा ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया ने खुद को पूरी तरह से राजन के हवाले कर दिया। उनके होंठ मिले, एक दूसरे के रस में डूब गए। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, यह दो प्यासी आत्माओं का मिलन था, जो बरसों से इस पल का इंतज़ार कर रही थीं। राजन के हाथ प्रिया की कमर से होते हुए उसकी पीठ पर गए, और उसने उसकी साड़ी का हुक खोल दिया। साड़ी उसके शरीर से सरक कर ज़मीन पर गिरी, प्रिया अब सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, उसकी जवानी राजन के सामने चमक रही थी।
राजन ने प्रिया को अपनी गोद में उठा लिया और उसे बिस्तर पर लेटा दिया। उसके हाथों ने प्रिया के ब्लाउज़ के बटन खोले, और उसके स्तन आज़ाद हो गए। राजन ने उनके ऊपर अपना चेहरा झुका दिया, उन्हें चूमने और सहलाने लगा। प्रिया के मुँह से दर्द भरी आहें निकलने लगीं, उसका शरीर हर स्पर्श के साथ कांप रहा था। वह जानती थी कि वह जो कर रही है वह गलत है, लेकिन इस **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** की लपटों में वह खुद को रोक नहीं पा रही थी।
जीजा के होंठ धीरे-धीरे नीचे उतरते गए, प्रिया के पेट से होते हुए उसकी नाभि तक। प्रिया के पेट में एक मीठा दर्द उठ रहा था। राजन ने प्रिया के पेटीकोट की डोरी खोली, और वह भी उसके शरीर से अलग हो गया। अब प्रिया पूरी तरह से नग्न थी, उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी राजन के सामने खुली किताब की तरह थी।
राजन ने अपनी कमीज़ और पायजामा उतारा। अब दोनों नग्न थे, उनकी आत्माएँ एक-दूसरे से मिलने को बेचैन थीं। राजन प्रिया के ऊपर आया, और उन्होंने एक-दूसरे को कस कर जकड़ लिया। “जीजा जी,” प्रिया ने फुसफुसाया, उसकी आँखों में आँसू थे – खुशी के, और शायद थोड़ा अपराधबोध के भी।
“शशश… मेरी प्रिया,” राजन ने कहा, उसके होंठों पर एक और चुंबन देते हुए।
जब राजन ने प्रिया के भीतर प्रवेश किया, तो प्रिया के मुँह से एक चीख़ निकल गई जो उसने तुरंत अपने हाथों से दबा ली। यह दर्द, यह खुशी, यह मिलन इतना तीव्र था कि वह उसे सहन नहीं कर पा रही थी। वे दोनों एक साथ, एक लय में झूलने लगे, उनकी साँसें एक हो गईं, उनके शरीर एक-दूसरे में समा गए। कमरे में सिर्फ उनकी गरमा गरम साँसों और प्यार की आवाज़ें गूँज रही थीं। उनका यह **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** एक ऐसे चरम पर पहुँच चुका था जहाँ से वापसी असंभव थी।
सुबह की पहली किरणें खिड़की से कमरे में झाँक रही थीं, और राजन और प्रिया एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए सो रहे थे। उनके चेहरे पर संतुष्टि की गहरी छाप थी, जैसे उन्होंने आज रात अपनी आत्माओं को एक-दूसरे के हवाले कर दिया था। यह एक ऐसा मीठा पाप था जिसकी याद उन्हें ज़िंदगी भर सताती रहेगी, पर जिसकी तृप्ति उन्हें हर पल अपनी तरफ खींचती रहेगी।
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