आज दोपहर का वो पल मेरी आँखों में अब भी आग बनकर जल रहा है। भाभी प्रिया अपनी गीली साड़ी को सूखने डालने के लिए छत पर गई थीं, और मैं ठीक उनके पीछे-पीछे था। हवा के झोंके से उनका पल्लू सरका, और मेरी नजरें उस गोरी, सुडौल कमर पर अटक गईं, जो आज तक मेरे लिए सिर्फ एक ख्वाब थी। भाभी ने मुझे देखा तो एक शरारती मुस्कान उनके होंठों पर तैर गई। “क्यों रे राहुल, ऊपर क्या कर रहा है? धूप सेकने आया है क्या?” उनकी आवाज़ में हल्की सी छेड़छाड़ थी, जो मेरे भीतर एक अजीब सी तड़प जगा गई।
“नहीं भाभी,” मैं बड़बड़ाया, “बस… ऐसे ही। आपको देखा तो चला आया।”
भाभी मेरी तरफ घूमीं, उनकी नज़रें मेरी आँखों में गहराई से उतर गईं। “अच्छा? तो क्या देखने आया था?” उनका सवाल एक न्योता था, एक बुलावा, जिसे मैं अपनी नस-नस में महसूस कर रहा था। उनकी भीगी हुई साड़ी उनके बदन से चिपकी हुई थी, हर उभार को उजागर करती हुई, और मेरा दिल सीने में बेकाबू होकर धड़क रहा था। आज बड़े भैया काम से बाहर गए थे, और घर में हम दोनों के सिवा कोई नहीं था।
“वही… जो आप दिखा रही हैं,” मैंने हिम्मत करके कह दिया, मेरी आवाज़ काँप रही थी। भाभी की आँखों में पहले हैरानी आई, फिर एक गहरी, कामुक चमक। उन्होंने धीरे से अपना पल्लू संभाला, लेकिन इस बार मुझे और भी साफ दिख रहा था कि उनकी ब्रा के अंदर उनके स्तन किस तरह से कसकर बंधे हुए थे, उनके निप्पल भीगी साड़ी से हल्के से उभरे हुए थे।
“शर्म नहीं आती देवरजी, ऐसी बातें करते हुए?” उन्होंने कहा, पर उनकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि एक मीठी सी शिकायत थी, जैसे वो चाहती हों कि मैं और आगे बढ़ूँ। मेरा हाथ अनायास ही उनकी कमर की तरफ बढ़ा। जैसे ही मेरी उंगलियों ने उनकी गीली साड़ी को छुआ, एक सिहरन उनके बदन में दौड़ गई। उन्होंने अपनी सांस रोकी और मुझे उनकी गर्म त्वचा महसूस हुई।
“शर्म तो बहुत पहले छोड़ दी भाभी, जब से आपको इस रूप में देखा है।” मैंने धीरे से उनके पल्लू को हटाया, और मेरा हाथ उनकी नंगी कमर पर फिसल गया। वो ठंडी नहीं, बल्कि मेरे स्पर्श से एकदम गर्म हो उठी थी। प्रिया ने एक आह भरी, उनकी आँखें बंद हो गईं। मुझे लगा जैसे मैं किसी जादू के वश में हूँ। यह थी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी की शुरुआत। मैंने उन्हें धीरे से अपनी बाहों में भर लिया, उनके बदन की महक मुझे मदहोश कर रही थी। उनके होंठों पर मेरे होंठ उतरे, और उन्होंने भी मेरा साथ दिया। एक गहरा, उत्तेजक चुंबन जिसने मेरे भीतर की आग को और भड़का दिया।
मैं उन्हें खींचता हुआ सीधे बेडरूम में ले गया। प्रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि खुद भी उतनी ही प्यासी लग रही थी। हमने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए। उनकी साड़ी, पेटीकोट, और फिर ब्रा, सब एक-एक करके ज़मीन पर बिखर गए। उनके गोरे, भरे हुए स्तन मेरे सामने उभरे हुए थे, जिन पर मैंने तुरंत कब्ज़ा कर लिया। मेरे होंठ उनके निप्पलों पर घूम रहे थे, कभी चूसते, कभी हल्के से काटते, और प्रिया हर स्पर्श पर एक तीखी आह भर रही थीं। उनकी साँसें तेज़ हो गईं, और उन्होंने मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया।
“आह्ह्ह… राहुल… अब और इंतज़ार नहीं…” उनकी आवाज़ मेरे कानों में घुल गई। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, और अब हम दोनों बिल्कुल नग्न एक-दूसरे के सामने थे। उनकी आँखें मेरी मर्दानगी पर टिकी थीं, जो अब पूरी तरह से उठ खड़ी थी। मैंने उन्हें धीरे से बेड पर लिटाया, उनके पैरों को फैलाया और उनके अंदर उतर गया। एक गहरी, सुखद चीख उनके गले से निकली। मेरा हर धक्का उन्हें एक नए आनंद में डुबो रहा था। हम दोनों एक ही ताल पर हिल रहे थे, पसीने में लथपथ, वासना की चरम सीमा पर।
“राहुल… आह्ह्ह्ह्ह… और तेज़… मुझे पागल कर दो…” प्रिया लगातार फुसफुसा रही थी। मैं अपनी पूरी ताक़त से उन्हें दे रहा था, उनकी हर आह, हर कसक मुझे और जोश दे रही थी। मेरा मन कह रहा था, आज तुझे ऐसी भाभी की दीवानी कर देने वाली कहानी बनानी है कि ये ज़िंदगी भर याद रखे।
कुछ देर बाद, जब हम दोनों पूरी तरह से थककर एक-दूसरे पर निढाल हुए, तो प्रिया ने मेरे माथे को चूमा। उनकी आँखों में गहरा संतोष और एक नई चमक थी। यह एक ख़ुफ़िया रात थी, एक ख़ुफ़िया इकरार, जो हमने चुपचाप एक-दूसरे से किया था। उस दिन से, हर रात हमारे बीच एक अनकहा समझौता हो चुका था, एक ऐसा रिश्ता जो कभी खत्म नहीं होगा।
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