आज प्रीति मैम की आँखें कुछ ज़्यादा ही चमक रही थीं, और विक्रम उनकी आँखों में अपने लिए एक अनकही प्यास साफ पढ़ पा रहा था। शहर के पॉश इलाके में स्थित प्रीति मैम के फ्लैट में हर शाम की तरह विक्रम ट्यूशन के लिए आया था, लेकिन आज माहौल कुछ अलग था। एसी की ठंडी हवा के बावजूद, कमरे में एक अजीब सी गरमाहट घुल रही थी। प्रीति मैम ने आज हल्की बैंगनी रंग की एक पतली साड़ी पहनी थी, जिसमें से उनके शरीर के उभार साफ झलक रहे थे। विक्रम की नज़रें बार-बार उनके खुले गले और साड़ी के पल्लू से झाँकती उनकी कमर पर अटक रही थीं।
“विक्रम, ध्यान दो! ये सवाल कितनी बार समझाया है?” प्रीति मैम ने आवाज़ को सख्त करने की कोशिश की, पर उनकी साँसों में एक हल्की सी कंपन थी। विक्रम ने नज़रें उठाईं और सीधे उनकी झुकी हुई आँखों में देखा। उन आँखों में अब शर्म नहीं, बल्कि एक मदहोश कर देने वाली चुनौती थी। विक्रम ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और मेज़ पर रखी मैम की किताब पर रख दिया। उसका हाथ उनके हाथ से छू गया। एक बिजली का करंट दोनों के जिस्मों में दौड़ गया। प्रीति मैम ने अपना हाथ खींचा नहीं, बल्कि उनकी उंगलियाँ क्षण भर के लिए विक्रम की उंगलियों से उलझ गईं। आज उनकी ट्यूशन महज़ पढ़ाई नहीं, बल्कि एक ऐसे टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर की शुरुआत थी, जिसकी चिंगारी कब की सुलग चुकी थी।
“मैम, मेरा ध्यान नहीं लग रहा,” विक्रम की आवाज़ भारी हो चुकी थी। उसने मैम की ओर और झुकते हुए कहा, “आज मैं कुछ और पढ़ना चाहता हूँ।” प्रीति मैम के होंठ काँप उठे। उन्हें पता था विक्रम क्या कहना चाह रहा है। उनके जिस्म में आग सी लग चुकी थी, और वे अब इस आग को बुझाना नहीं चाहती थीं। उनकी आँखें बंद होने लगीं, और विक्रम ने उस पल का फ़ायदा उठाया। वह अपनी कुर्सी से उठा और मैम की कुर्सी के पास आकर झुक गया। उसने अपना एक हाथ उनके गाल पर रखा और दूसरा उनकी कमर पर। बिना किसी हिचक के, उसने अपने होंठ प्रीति मैम के लाल-लाल, रसीले होंठों पर रख दिए।
यह एक कोमल चुम्बन नहीं था, बल्कि एक भूखा, बेकाबू चुम्बन था। प्रीति मैम ने पहले तो थोड़ा विरोध किया, पर फिर उनकी देह शिथिल पड़ गई और वे इस आगोश में पूरी तरह समा गईं। उनके हाथ विक्रम की गर्दन से लिपट गए और वे उसे अपनी ओर खींचने लगीं। साँसें उखड़ रही थीं, होंठ एक-दूसरे को चूस रहे थे, और ज़ुबानें एक-दूसरे का स्वाद ले रही थीं। साड़ी का पल्लू कब सरक कर ज़मीन पर गिर गया, उन्हें पता ही नहीं चला। विक्रम के हाथ उनकी साड़ी के अंदर घुस चुके थे और उनकी चिकनी कमर को सहला रहे थे। प्रीति मैम की एक सिसकी निकली, जब विक्रम ने अपनी उंगलियों से उनके पेटीकोट के नाड़े को खोला।
कपड़ों का बोझ हटते ही, दोनों के जिस्मों की गरमाहट और बढ़ गई। विक्रम ने प्रीति मैम को गोद में उठाया और उन्हें बेडरूम की ओर ले गया, जहाँ बिस्तर उनकी प्यास बुझाने को तैयार था। कमरे में बस उनके बेकाबू जिस्मों की आवाज़ें गूँज रही थीं, जो अब पूरी तरह से इस टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर में खो चुके थे। हर स्पर्श, हर चुम्बन, हर कराहे उनकी बेताबियों का शोर कर रही थी। विक्रम ने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और उनके ऊपर झुक गया। प्रीति मैम की आँखें अर्ध-खुली थीं, जिनमें वासना और समर्पण का अद्भुत मिश्रण था। उनके हाथ विक्रम की पीठ को सहला रहे थे और वे उसे अपनी ओर खींच रही थीं।
विक्रम ने अपने होंठों को उनके गले से नीचे उतारा, उनकी धड़कती छाती पर, फिर उनके उभरे हुए स्तनों पर। प्रीति मैम की एक गहरी आह निकली, जब विक्रम ने उनके गुलाबी निप्पलों को अपने मुँह में भरा और उन्हें चूसने लगा। उनका पूरा शरीर अब एक लहर की तरह बल खा रहा था। “और… और तेज़…” वे फुसफुसा रही थीं। विक्रम अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। उसने अपने कपड़े उतारे और प्रीति मैम के बीच आ गया। उनके जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक चुके थे। एक गहरी साँस लेकर, विक्रम ने प्रीति मैम की जाँघों के बीच अपनी जगह बनाई और एक झटके में उनके अंदर समा गया।
“आहहह!” प्रीति मैम के मुँह से एक चीख निकली, जो दर्द से ज़्यादा सुख की थी। उनके शरीर में एक तेज़ रोमांच दौड़ गया। विक्रम अंदर तक उन्हें भर चुका था। वे दोनों अब एक-दूसरे में खो चुके थे। उनकी धड़कनें एक हो चुकी थीं, उनके जिस्मों का मिलन अब चरम पर था। कमरे में सिर्फ़ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें, पसीने की गंध और मदहोश कर देने वाली सिसकियाँ और कराहें गूँज रही थीं। हर धक्के के साथ, उनकी वासना और बढ़ती जा रही थी। प्रीति मैम ने अपने पैर विक्रम की कमर के चारों ओर कस लिए थे और उसे और गहराई तक खींच रही थीं।
अन्त में, दोनों के जिस्मों में एक ज़ोर का झटका लगा। प्रीति मैम ने अपनी आँखें खोलीं और विक्रम की आँखों में देखा। उनकी आँखों में अब तृप्ति और सुकून था। एक लंबी, गहरी आह के साथ, वे दोनों एक-दूसरे पर निढाल हो गए। उस रात उन्होंने अपने बीच पनपे इस टीचर स्टूडेंट का गरमा गरम अफेयर को एक ऐसी ऊँचाई दी, जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। वे जानते थे कि यह सिर्फ़ एक शुरुआत थी। एक ऐसी शुरुआत, जहाँ अब पढ़ाई से ज़्यादा उनके जिस्मों की आग ही उन्हें करीब लाएगी।
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