आज दोपहर रश्मि का मन एक अजीब सी बेचैनी से भरा था, जो मीठी भी थी और ख़तरनाक भी। जैसे ही घंटी बजी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपने काँपते हाथों से दरवाज़ा खोला, सामने अमित खड़ा था – वही पुरुष जिसने उसकी सूनी रातों में एक अनचाही आग लगा दी थी। उसकी आँखों में वह चमक थी जो रश्मि ने अपने पति की आँखों में सालों से नहीं देखी थी। अमित ने एक हल्की मुस्कान दी, “आऊँ रश्मि जी?”
“हाँ, हाँ, आओ अमित,” रश्मि ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा, और उसे अंदर आने का रास्ता दिया। उसका शरीर, उसकी साड़ी के रेशमी स्पर्श से भी अधिक, अमित की उपस्थिति से सिहर उठा था। वह जानती थी कि यह ग़लत है, कि यह एक शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर शुरू करने का पहला क़दम हो सकता है, लेकिन इस वर्जित रोमांच की ललक उसे अंदर तक खींच रही थी। उसने अमित को सोफे पर बैठने को कहा और पानी लेने अंदर चली गई, ताकि अपनी धड़कनों को शांत कर सके।
जब वह पानी लेकर लौटी, अमित की नज़रें उसकी साड़ी पर टिकी थीं, जो उसकी कमर के उभारों को बड़ी ख़ूबसूरती से ढँक रही थी। रश्मि के गाल सुर्ख हो गए। “क्या हुआ अमित? क्या देख रहे हो?” उसने जानबूझकर मासूमियत से पूछा। अमित ने धीरे से कहा, “बस तुम्हें… तुम्हें देख रहा हूँ रश्मि। तुम आज बहुत ख़ूबसूरत लग रही हो।” उसकी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव था जिसने रश्मि के रोंगटे खड़े कर दिए।
अमित ने अपना पानी का गिलास मेज़ पर रखा और धीरे से उठकर रश्मि के क़रीब आया। उसके शरीर की गर्मजोशी रश्मि को अपनी ओर खींच रही थी। “रश्मि,” अमित ने फुसफुसाते हुए कहा, और अपना हाथ रश्मि की बांह पर रखा। उसकी उंगलियों का स्पर्श इतना नर्म और उत्तेजक था कि रश्मि की साँसें गले में अटक गईं। उसकी आँखों में एक ऐसी प्यास थी जो रश्मि ने कभी किसी में नहीं देखी थी। “मैं… मैं तुम्हें कब से चाहता हूँ, रश्मि।”
रश्मि की सारी हिम्मत जवाब दे गई। उसने अपना सिर थोड़ा टेढ़ा किया और उसकी आँखों में देखा। “अमित…” वह कुछ और कहने से पहले ही अमित ने उसे अपनी बांहों में कस लिया। उसके होंठ रश्मि के होंठों पर टूट पड़े। यह एक ऐसा चुंबन था जो सालों की प्यास बुझाने को आतुर था। रश्मि ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया, अपने हाथों से अमित की गर्दन को पकड़ लिया। उनकी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं, एक मीठी आग उनके शरीर में फैलने लगी।
अमित ने उसे अपनी बांहों में उठाया और बेडरूम की तरफ़ चल पड़ा। रश्मि ने अपनी टांगें उसकी कमर के इर्द-गिर्द लपेट लीं, उसकी कमीज़ को अपनी मुट्ठी में भींच लिया। बिस्तर पर पहुँचते ही, अमित ने उसे धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया। उसके हाथ रश्मि की साड़ी पर थे, और कुछ ही पलों में, उसने बड़ी नज़ाकत से साड़ी को उसके बदन से अलग कर दिया। रश्मि अब सिर्फ़ एक पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी, उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं। अमित की आँखों में वासना और प्यार का एक अद्भुत मिश्रण था।
उसने ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और उसे हटाते ही, रश्मि के भरे हुए स्तन अमित के सामने आ गए। अमित की साँसें गहरी हो गईं। उसने धीरे से अपने होंठ रश्मि के स्तन पर रखे और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। रश्मि की एक तेज़ चीख़ निकली, और उसने अपने सिर को तकिये में धँसा लिया। “आह… अमित… और… और तेज़…” वह अपनी इच्छाओं को अब रोक नहीं पा रही थी। शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर, इस पल की हर साँस में एक गहरी, मादक सच्चाई थी।
अमित ने उसकी हर इच्छा को पूरा किया। उसने पेटीकोट भी उतार दिया, और रश्मि अब उसके सामने पूरी तरह नग्न थी, उसकी देह उत्तेजना से काँप रही थी। अमित ने अपने कपड़े उतारे और उसके ऊपर आ गया। उसके शरीर की मज़बूत बनावट रश्मि को और उत्तेजित कर रही थी। उसने धीरे से अपने होंठ रश्मि के पेट पर फेरे, फिर नीचे उतरते हुए उसकी योनि पर। रश्मि के पूरे शरीर में बिजली दौड़ गई। अमित की जीभ का हर स्पर्श उसे पागल कर रहा था। उसकी कराहें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
कुछ ही पलों में, अमित ने अपनी जगह बनाई और धीरे-धीरे रश्मि के अंदर प्रवेश किया। रश्मि की आँखों से ख़ुशी के आँसू छलक पड़े। “आह… अमित… हाँ…” उसने अपनी कमर ऊपर उठाई और अमित को और गहराई तक लेने लगी। उनकी लय तेज़ होती गई, उनके शरीर एक-दूसरे में समाते गए। पसीने की बूंदें उनके माथे से टपक रही थीं, और हर धक्के के साथ एक गहरी संतुष्टि उन्हें मिल रही थी। उनके होंठ एक बार फिर मिले, और उनकी जीभें एक-दूसरे का स्वाद चख रही थीं, जैसे इस वर्जित मिलन की मीठी निशानी।
जब उनका शरीर चरम पर पहुँचा, रश्मि ने एक लंबी, गहरी आह भरी और अमित की बाँहों में ढीली पड़ गई। अमित ने उसे कसकर गले लगाया और उसके माथे पर चुंबन किया। वे काफ़ी देर तक उसी अवस्था में लेटे रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। रश्मि को अपने अंदर एक अजीब सी शांति महसूस हुई। उस दोपहर, रश्मि जान गई कि शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर सिर्फ एक गुनाह नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास बुझाने का तरीका भी हो सकता है, एक ऐसा तरीका जो उसे आज तक नहीं पता था। उसने अमित की आँखों में देखा और एक संतुष्ट मुस्कान दी। यह शुरुआत थी एक ऐसे रिश्ते की जो शायद कभी ख़त्म नहीं होगा।
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