पड़ोसी से शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर: एक वर्जित मिलन

दोपहर की सुनहरी धूप में भी प्रिया के भीतर एक अजीब सी तपन थी, जो उसके सूने वैवाहिक जीवन की खाली जगह भर रही थी। सुरेश से शादी को दस साल हो गए थे, पर अब उनके बीच सिर्फ़ खामोशी और कर्तव्यों का बोझ था। प्रिया को याद नहीं था कि कब उसने आखिरी बार खुद को किसी की बाहों में सुरक्षित और वांछित महसूस किया था। उसकी दबी इच्छाएं, उसकी अनकही प्यास… सब कुछ उसके दिल के किसी कोने में सड़ रहा था।

और फिर आया रोहन। उनके घर के ठीक सामने वाले फ्लैट में नया किराएदार। उसकी मर्दाना चाल, उसकी तेज़ आँखें और वो शरारती मुस्कान, जो अक्सर प्रिया से नज़रें टकराने पर उसके होंठों पर तैर जाती थी। शुरुआत में तो प्रिया ने उसे अनदेखा किया, पर उसकी आँखों में प्रिया के लिए एक ऐसी ललक थी, जो उसे वर्षों से किसी मर्द में नहीं दिखी थी। एक दिन बालकनी में कपड़े सुखाते हुए, रोहन ने उसे आवाज़ दी। “भाभी जी, आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं।” प्रिया ने लाल होकर पलटकर देखा, उसके दिल की धड़कन बढ़ गई थी। “जी धन्यवाद,” उसने फुसफुसाया। रोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं, सच में। इतनी खूबसूरत औरत को देखकर सूरज भी शरमा जाए।” यह साधारण-सा कॉम्प्लीमेंट प्रिया के सूखे हृदय पर बारिश की पहली बूंद की तरह था।

अगले कुछ हफ्तों में, उनकी छोटी-मोटी मुलाक़ातें बढ़ती गईं। लिफ्ट में, सोसाइटी गार्डन में, कभी-कभी सिर्फ़ बालकनी पर एक-दूसरे को निहारते हुए। प्रिया जानती थी कि यह गलत है, पर रोहन की नज़रों में उसे वो आग दिखती थी, जो उसके अपने पति की आँखों से कब की बुझ चुकी थी। क्या यही होता है **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर**? यह सोचकर भी उसके मन में एक रोमांच दौड़ गया। एक दिन सुरेश बिज़नेस ट्रिप पर शहर से बाहर था। दोपहर का सन्नाटा था। प्रिया बालकनी में बैठी कुछ सोच रही थी, तभी रोहन ने दरवाज़ा खटखटाया। “भाभी जी, मेरा मोबाइल घर में चार्जिंग पर रह गया है, क्या आपका चार्जर मिल सकता है?” प्रिया ने झिझकते हुए दरवाज़ा खोला। जैसे ही रोहन अंदर आया, उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी। “आप अकेली हैं?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी गर्माहट थी।

प्रिया ने जवाब देने के लिए मुँह खोला, पर रोहन ने एक पल में दरवाज़ा बंद कर दिया और बिना कोई मौका दिए प्रिया को अपनी बाहों में खींच लिया। उसकी साँसें प्रिया के चेहरे पर पड़ रही थीं। “प्रिया… मैंने कब से तुम्हें चाहा है,” उसने फुसफुसाया, और उसके होंठ प्रिया के होंठों पर टूट पड़े। यह एक तूफानी चुंबन था, जिसमें सालों की प्यास और हसरतें घुल गई थीं। प्रिया ने पहले तो खुद को रोका, पर रोहन की ज़ुबान उसके मुँह में उतरते ही, उसके शरीर में एक आग सी दौड़ गई। उसने भी रोहन की गर्दन को कसकर पकड़ लिया और बेताबी से उसका जवाब देने लगी।

रोहन ने उसे बाहों में उठाया और सीधा बेडरूम की तरफ ले गया। प्रिया का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था, पर विरोध करने की अब उसमें ज़रा भी हिम्मत नहीं थी। उसने प्रिया को बिस्तर पर उतारा और उसके दुपट्टे को एक झटके में उतार फेंका। प्रिया की साड़ी भी मिनटों में उसके जिस्म से अलग हो गई, और वह सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। रोहन की आँखें उसकी देह पर नाच रही थीं। उसने प्रिया के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए, उसकी उंगलियां प्रिया की त्वचा को छूते ही एक मीठी सिहरन दौड़ गई। जैसे ही ब्लाउज हटा, रोहन की नज़रें प्रिया की भरी हुई छातियों पर टिकीं। उसने एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता है। प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, उसकी कमर अपने आप ऊपर उठने लगी।

रोहन ने उसके पेटीकोट को भी उतार फेंका, और प्रिया अब उसके सामने पूरी तरह नग्न थी। उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। रोहन ने अपने कपड़े भी उतारे और प्रिया के ऊपर झुक गया। उसकी गर्म देह प्रिया के जिस्म से टकराई, और प्रिया का रोम-रोम झनझना उठा। रोहन ने धीरे से अपनी मर्दानी ताकत को प्रिया के भीतर उतारा। प्रिया की आँखों से एक आह निकली, जो दर्द और सुख का मिलाजुला एहसास था। वह कसकर रोहन को पकड़ चुकी थी, उसके नाखून उसकी पीठ पर गहरे धँस रहे थे। रोहन ने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई। प्रिया की चीत्कारें कमरे में गूँज रही थीं। यह पल, यह अहसास, यह सब कुछ तो बस एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** ही था, और उसे इसमें कोई अपराध-बोध नहीं था। वह हर एक पल को जीना चाहती थी। रोहन ने अपनी पूरी जान से प्रिया को वो सुख दिया, जिसकी वह बरसों से प्यासी थी। प्रिया की आँखें बंद थीं, उसका पूरा शरीर एक अद्भुत कंपन में लिपटा था, और वह चरम सुख की गहराइयों में डूब चुकी थी।

जब दोनों शांत हुए, तो प्रिया रोहन की बाहों में निढाल पड़ी थी। उसकी अधूरी प्यास को एक **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** ही बुझा सकता था, और वह इस सच को जी रही थी। उसने रोहन के होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया। “धन्यवाद,” उसने फुसफुसाया। रोहन ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया। वह जानती थी कि यह सिर्फ़ शुरुआत थी, और उसका वर्जित प्रेम अब उसके जीवन का एक नया, गर्माहट भरा अध्याय बन चुका था।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *