उसके रेशमी आंचल से झांकती गोरी देह ने रूहान के धीरज की हर सीमा तोड़ दी थी। शादी की रस्में पूरी होते ही, दोनों को उनके सजाए हुए कमरे में भेज दिया गया। हवा में चमेली और गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू तैर रही थी, जो इस पल की पवित्रता और कामुकता को और बढ़ा रही थी। प्रिया, अपनी लाल जोड़े में, शरम से सिमटी पलंग पर बैठी थी, उसके दिल की धड़कनें उतनी ही तेज थीं जितनी रूहान की। यह उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात थी, वह रात जिसका इंतज़ार हर प्रेमी जोड़ा करता है।
रूहान धीरे से उसके पास आया, उसका दिल सीने में धड़कता हुआ महसूस हो रहा था। उसने धीरे से प्रिया के घूंघट को ऊपर उठाया। उनकी आँखें मिलीं। प्रिया की काजल भरी आँखें थोड़ी झुकी हुई थीं, उनमें शरम थी, लेकिन एक गहरा, अनकहा निमंत्रण भी। रूहान ने अपना हाथ उसके गाल पर रखा। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी साँसें तेज हो गईं। यह पहला स्पर्श था, जो उनके वैवाहिक जीवन का आगाज़ कर रहा था।
रूहान ने झुकाकर प्रिया के अधरों को चूम लिया। यह एक नरम शुरुआत थी जो जल्द ही एक गहरी, भावुक चुम्बन में बदल गई। प्रिया ने पहले संकोच किया, फिर उसने भी पूरे दिल से जवाब दिया, उसके हाथों ने रूहान के कुर्ते को कसकर पकड़ लिया। उनकी जीभें एक-दूसरे से गुंथीं, स्वाद और वासना का एक नया संसार खोलती हुई। रूहान ने उसे धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गया, उसके भारी-भरकम लहंगे और गहनों की परवाह किए बिना।
एक-एक करके रूहान ने प्रिया के गहने उतारने शुरू किए – माथे की बिंदी, कान के झुमके, गले का हार। हर गहने के उतरने के साथ, प्रिया की देह की एक नई परत खुलती जा रही थी, और उसके दिल की धड़कनें तेज होती जा रही थीं। उसने रेशमी चोली की डोरी खोली, और प्रिया के सुडौल, भरे हुए स्तन हवा में आज़ाद हो गए। रूहान की आँखें उन पर टिक गईं, और उसने धीरे से अपने होंठ उनमें से एक पर टिका दिए। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कराह निकली। रूहान ने उसके स्तन को चूसा, मसला, जिससे प्रिया का पूरा शरीर झुनझुनी से भर गया।
प्रिया ने अपने हाथों से रूहान के बालों को पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ उसके सिर की चमड़ी पर कस गईं। रूहान धीरे-धीरे नीचे उतरता गया, उसके पेट पर, नाभि के पास चुम्बन करता हुआ। प्रिया का शरीर अब आग की तरह जल रहा था। उसने रूहान को अपनी ओर खींच लिया, उसकी हर छुअन उसे और अधिक मदहोश कर रही थी। जब रूहान ने उसके लहंगे को ऊपर उठाया और उसकी कमरबंद खोली, तो प्रिया ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। उसके भीतर एक अजीब सी बेचैनी और इंतज़ार था।
रूहान ने धीरे से उसकी जांघों को फैलाया। प्रिया अब पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में थी, उसकी कामुकता चरम पर थी। रूहान ने अपने अंग को प्रिया के योनि द्वार पर टिकाया। प्रिया ने एक गहरी साँस ली, दर्द और सुख की एक अजीब जुगलबंदी। रूहान ने धीरे-धीरे धकेलना शुरू किया, और प्रिया के भीतर एक कसक के साथ, उनके शरीर एक हो गए। “आह!” प्रिया के मुँह से निकली, उसकी आँखें खुशी और दर्द से डबडबा गईं।
रूहान ने धीरे-धीरे लय पकड़ी, उनके शरीर पसीने से लथपथ हो गए। हर धक्के के साथ, उनके भीतर की वासना और प्रेम की अग्नि और तीव्र होती जा रही थी। प्रिया अपनी कमर उठा-उठा कर रूहान का साथ दे रही थी, उसकी सिसकियाँ और आहें कमरे में गूंज रही थीं। यह उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात थी, एक ऐसी रात जिसमें दो आत्माएँ एक देह बन चुकी थीं।
कुछ पल बाद, एक तीव्र झटके के साथ, दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँच गए। रूहान प्रिया के भीतर ही ढीला पड़ गया, और प्रिया भी उसके आगोश में सिमट गई, उसके शरीर में एक मीठी-सी थकान थी। वे काफी देर तक एक-दूसरे से चिपके रहे, उनकी साँसें तेज थीं और दिल की धड़कनें एक-दूसरे में समाई हुई थीं। यह सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं था, यह दो आत्माओं का संगम था, एक ऐसा पल जो उनके जीवन भर के प्यार की नींव रख गया था। बाहर चाँद की रोशनी खिड़की से झाँक रही थी, मानो उनकी इस पवित्र और कामुक रात का गवाह बन रही हो।
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