कमरे की मंद रोशनी में, करण की धड़कनें रिया के करीब आते ही तेज़ हो गईं, मानो हर सांस में सिर्फ़ उसी का नाम हो। रात अपनी परवान पर थी, और हवा में चमेली की खुशबू घुल-मिल रही थी, जिसने उनके पहले मिलन को और भी मादक बना दिया था। भारी लहंगे और गहनों में सजी रिया, पलंग के बीचों-बीच बैठी थी, उसकी पलकें शर्म से झुकी हुई थीं, लेकिन भीतर ही भीतर एक अनकही प्यास जाग रही थी।
करण ने धीरे से दरवाज़ा बंद किया, उसकी आँखों में केवल रिया थी। वह जानते थे कि यह उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात थी, और आज रात के बाद वे कभी पहले जैसे नहीं रहेंगे। वे धीरे-धीरे उसके पास गए और उसके माथे से घुंघट हटाया। रिया की आँखें मिलीं, जिनमें डर और उम्मीद दोनों एक साथ झलक रहे थे। करण ने प्यार से उसके गाल को सहलाया। “रिया,” उसने फुसफुसाया, “घबराओ मत।”
उनके स्पर्श में जादू था। रिया के पूरे बदन में एक मीठी-सी सिहरन दौड़ गई। करण ने धीरे-धीरे उसके कानों से भारी झुमके उतारे, फिर गले से हार। हर गहना जो उतरता, रिया के जिस्म पर एक नई गरमाहट छोड़ जाता। करण की उंगलियाँ उसकी गर्दन पर थिरकीं और फिर धीरे-धीरे उसके ब्लाउज की डोरी खोलने लगीं। रिया की सांसें तेज़ हो गईं, उसकी छाती ऊपर-नीचे होने लगी। ब्लाउज सरकते ही, उसकी भरी हुई छाती, जिसमें से आधी चुनरी के नीचे से झांक रही थी, करण के सामने आ गई। उसकी गुलाबी निप्पलें थोड़ी उभरी हुई थीं, मानो करण के स्पर्श का इंतज़ार कर रही हों।
करण ने बिना देर किए अपने होंठ उसके गर्दन पर टिका दिए। एक भीगी-सी गर्माहट रिया के पूरे शरीर में फैल गई। उसने आह भरी और अपनी आंखें बंद कर लीं, अपने आप को पूरी तरह करण को सौंप दिया। करण की उंगलियाँ उसके लहंगे के नाड़े पर थीं। जैसे ही उसने नाड़ा खोला, लहंगे का भारी कपड़ा नीचे सरका और रिया के रेशमी पेट और सुडौल जांघें करण की नज़रों के सामने आ गईं। सिर्फ़ एक छोटी-सी पेटीकोट और ब्लाउज में, रिया अब और भी लुभावनी लग रही थी।
करण ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया, और उनके होंठ एक-दूसरे से मिल गए। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था; यह सदियों का इंतज़ार था, एक वादा था। उनके होंठ एक-दूसरे को चूसने लगे, उनकी ज़बानें आपस में गुत्थमगुत्था हो गईं। रिया ने अपनी बाँहें करण की गर्दन में डाल लीं, और उसकी उंगलियाँ उसके घने बालों में घूमने लगीं। उनके जिस्म एक-दूसरे से चिपक गए, उनकी रगों में आग सी दौड़ने लगी।
करण ने उसे धीरे से पलंग पर लिटाया। रिया की आँखें अब शर्म से नहीं, बल्कि प्यास से चमक रही थीं। करण ने उसका पेटीकोट भी उतार दिया, और अब रिया पूरी तरह नग्न थी, उसकी हर वक्र, हर उभार करण के सामने था। करण ने अपनी कमीज़ उतार फेंकी, और उसके मज़बूत, मांसल सीने को देखकर रिया ने पहली बार इतनी खुली वासना महसूस की। करण ने रिया के पैरों को फैलाया और उनके बीच आ गया।
उसका स्पर्श रिया की कोख पर पड़ा और रिया ने एक मीठी-सी आह भरी। करण के होंठ उसके पेट पर, फिर उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर घूमते रहे, जहाँ रिया की योनि उत्तेजना से गीली हो चुकी थी। करण ने उसे धीमे-धीमे सहलाया, रिया की पिंडलियाँ तन गईं और उसके हाथ पलंग की चादर को कस कर पकड़ लिया। वह जानती थी कि अब इंतज़ार खत्म होने वाला था।
करण ने धीरे-धीरे अपनी मर्दानगी रिया के द्वार पर टिकाई। रिया ने एक गहरी साँस ली, और जैसे ही करण ने हल्का दबाव डाला, एक हल्की सी चीख उसके मुँह से निकली। लेकिन यह दर्द पल भर का था, और जल्द ही करण उसके अंदर पूरी तरह समा चुका था। उनकी आँखें मिलीं, और उस पल उन्हें महसूस हुआ, कि नई नवेली दुल्हन की सुहागरात सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि दो आत्माओं का परम मिलन है।
करण ने धीमे-धीमे गति पकड़ी, और रिया उसके साथ तालमेल बिठाने लगी। उनके जिस्मों से पसीना बह रहा था, उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं, और उनके मुंह से सिर्फ़ प्यार भरी आहें निकल रही थीं। पलंग की चरमराहट और उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़, उस पवित्र मिलन की गवाह थी। रिया अपनी कमर उठा रही थी, करण को और गहराई से अंदर लेने के लिए। उनकी गति तेज़ होती गई, उनकी आँखें बंद हो चुकी थीं, और दोनों ही परम सुख की गहराइयों में डूब चुके थे।
एक तीव्र गर्माहट के साथ, दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे। रिया ने करण को कसकर जकड़ लिया, और उसकी चीख एक मधुर विलाप में बदल गई। करण ने उसके सीने पर अपना सिर रखा, उसकी साँसें तेज़ थीं, और उसका जिस्म पसीने से भीगा हुआ था। वे देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनकी आत्माएं शांत और संतुष्ट थीं। बाहर चांदनी छिटकी हुई थी, और अंदर दो जिस्म एक होकर एक नई दुनिया में खो चुके थे। रिया ने धीरे से करण के बालों को सहलाया, और एक गहरी, संतोष भरी मुस्कान उसके होठों पर आ गई। आज रात, उनकी प्रेम कहानी की सच्ची शुरुआत थी।
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