कमरे में फैली मोगरे की मदहोश कर देने वाली खुशबू, प्रिया के दिल की धड़कनों को और तेज़ कर रही थी। शादी के भारी जोड़े में लिपटी, वह पलंग के एक कोने में बैठी थी, आँखों में लज्जा और दिल में एक अजीब सी उत्तेजना का तूफान। यह उसकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात थी, वो रात जिसका हर लड़की को बेसब्री से इंतज़ार होता है, जब दो अजनबी शरीर एक-दूसरे में खोकर एक हो जाते हैं।
दरवाजा खुलने की हल्की सी आहट हुई और रोहन कमरे में दाखिल हुआ। उसका दिल भी उतनी ही तेज़ी से धड़क रहा था। उसने दरवाज़ा बंद किया और धीमी चाल से प्रिया की ओर बढ़ा। कमरे की मद्धम रोशनी में प्रिया का चेहरा घूँघट की ओट में भी दमक रहा था। रोहन ने धीरे से घूँघट उठाया। प्रिया ने पलकें झुका लीं, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। रोहन ने अपने हाथ से प्रिया की ठोड़ी उठाई और उसकी आँखों में झाँका। उन आँखों में शर्म थी, इंतज़ार था और एक गहरी प्यास भी थी।
“मेरी प्रिया…” रोहन की आवाज़ ने एक अजीब सी सिहरन पैदा कर दी। उसने झुककर प्रिया के होंठों को हल्के से छुआ, फिर धीरे-धीरे गहराई में उतरता चला गया। प्रिया ने शुरुआत में प्रतिरोध किया, पर जल्द ही उसके होंठ भी रोहन के होंठों का जवाब देने लगे। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुलमिल गईं। रोहन के हाथ धीरे-धीरे प्रिया की कमर पर सरके, और उसने उसे अपनी ओर खींच लिया। प्रिया ने एक आह के साथ अपनी आँखें बंद कर लीं।
रोहन ने एक-एक करके प्रिया के बालों में लगे गजरे और गहने उतारे, जैसे हर बाधा को प्यार से हटा रहा हो। फिर उसने प्रिया की भारी लहँगे की चोली का नाड़ा खोला। रेशम और ज़री के कपड़े, जो अभी तक उसके बदन को ढँके हुए थे, अब एक-एक करके अपनी जगह छोड़ रहे थे। प्रिया का गोरा, सुडौल बदन पहली बार रोहन की नज़रों के सामने आया। उसके उभार, उसकी चिकनी त्वचा, सब कुछ इतना मोहक था कि रोहन खुद पर काबू न रख पाया। उसने प्रिया को गोद में उठा लिया और उसे बिस्तर पर धीरे से लिटा दिया।
“तुम कितनी सुंदर हो, मेरी जान,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। प्रिया अब तक पूरी तरह से शर्म की चादर उतार चुकी थी। उसका जिस्म वासना की आग से दहक रहा था। रोहन ने अपनी उँगलियाँ प्रिया के नितम्बों पर फिराईं, उसे सहलाया। प्रिया के मुँह से दबी हुई आहें निकल रही थीं। रोहन ने अपनी उत्तेजित पौरुष को प्रिया की गीली फांक के मुहाने पर रखा। प्रिया ने अपनी टाँगें फैलाईं, जैसे उसे आमंत्रित कर रही हो। एक गहरी साँस के साथ, रोहन ने धीमे से धक्का दिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश सिसकी निकली, जब रोहन का पूरा अंग उसके अंदर समा गया। पहली बार का दर्द मीठी अनुभूति में बदल गया।
दोनों की धड़कनें एक हो गईं, साँसें एक लय में चलने लगीं। रोहन ने धीमे-धीमे अपनी गति बढ़ाई। प्रिया की कामुक आहें, रोहन के होठों पर बिखरी हुईं, कमरे के हर कोने में गूँज रही थीं। वह अपनी कमर उठाकर रोहन के हर वार का जवाब दे रही थी। उसके नाखून रोहन की पीठ पर निशान छोड़ रहे थे। वे एक-दूसरे में इस कदर खो गए थे कि दुनिया-जहान की सुध-बुध भूल चुके थे। उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात, उम्मीद से कहीं ज़्यादा मादक और संतुष्ट करने वाली थी।
कई बार जिस्मों का यह मिलन हुआ, हर बार पहले से ज़्यादा गहरा, ज़्यादा उत्तेजित करने वाला। जब वे थक कर चूर हुए, तो प्रिया रोहन की बाहों में सिमटकर लेट गई। उसके होंठों पर एक मीठी मुस्कान थी, और आँखों में गहरी संतुष्टि। उनकी नई नवेली दुल्हन की सुहागरात ने उन्हें हमेशा के लिए एक कर दिया था, एक ऐसे बंधन में जहाँ जिस्म और रूह, दोनों को पूर्णता मिली थी। बाहर रात अभी भी जवान थी, पर अंदर प्रिया और रोहन एक नई सुबह की ओर बढ़ चले थे, जिस्मों और रूहों के अटूट मिलन के साथ।
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