उसकी आँखों में जो चिंगारी थी, वो मेरे बुझे हुए दिल को आग लगाने के लिए काफी थी। जब प्रिया ने मेरे पड़ोस में कदम रखा, तो जैसे मेरे सूनेपन में एक हलचल सी मच गई। पहली नज़र में ही मैं उसके मोहपाश में बंध चुका था। उसकी रेशमी साड़ी उसके सुडौल बदन पर ऐसे लिपटी थी कि उसकी कमर का लचीलापन और उठे हुए वक्ष मेरी नज़रों में कैद हो गए।
शुरूआत छोटी-छोटी मुलाकातों से हुई। कभी लिफ्ट में साथ, कभी बालकनी में अचानक दिख जाना। उसकी मधुर आवाज़ और खिलखिलाती हँसी मेरे दिल के तारों को छेड़ जाती थी। एक शाम, वह अपने घर का एक भारी बक्सा उठाकर थक चुकी थी और मैंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। जब हमारे हाथ एक-दूसरे को छू गए, तो एक बिजली सी दौड़ गई। उसकी साँसों की गरमाहट मेरे गालों पर महसूस हुई और मुझे एहसास हुआ कि मेरी ज़िंदगी में अब **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** शुरू होने वाली हैं।
अगले कुछ दिन हमारे बीच की दूरियों को कम करते गए। चाय की प्याली पर बातों का सिलसिला, कभी छोटी-मोटी चीज़ों के बहाने उसके घर आना-जाना। एक दोपहर मैं अपनी बालकनी में पानी दे रहा था, जब प्रिया अपनी बालकनी में एक ढीले से बाथरोब में नज़र आई। उसके बाल गीले थे और सूरज की किरणें उसके भीगे बदन पर ऐसे पड़ रही थीं कि उसके उभार साफ दिख रहे थे। हमारी नज़रें मिलीं और उसके होंठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। “राहुल, क्या तुम आज शाम मेरे साथ एक कप कॉफ़ी पीना चाहोगे?” उसकी आवाज़ में वो न्योता था जिसे मैं कभी ठुकरा नहीं सकता था।
शाम को मैं उसके फ्लैट में दाखिल हुआ। हल्की रोशनी और मोगरे की धीमी खुशबू ने माहौल को और भी रूमानी बना दिया था। हम सोफे पर बैठे, बातें करते-करते हमारी आँखें एक-दूसरे में उलझ गईं। “तुम्हारी आँखों में जो शरारत है, राहुल… क्या तुम्हारी **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** यहीं तक सीमित रहेंगी?” उसने फुसफुसाते हुए कहा और मेरी ओर झुक गई। उसका हाथ मेरे हाथ पर रखा और उसकी उंगलियां मेरी त्वचा पर धीरे से रेंगने लगीं। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
मैं और इंतज़ार नहीं कर पाया। मैंने अपना हाथ उसकी कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींच लिया। हमारे होंठ एक-दूसरे से टकराए और एक गहरी, प्यासी चुंबन में बदल गए। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और वह मेरे होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे वर्षों की प्यास बुझा रही हो। मेरे हाथ उसके बाथरोब के नीचे फिसल गए और उसके मुलायम बदन को छूते हुए उसके वक्ष तक पहुंच गए। उसने एक गहरी आह भरी जब मेरी उंगलियों ने उसके उभरे हुए निप्पल्स को छुआ और सहलाया।
हमने बिना कुछ कहे एक-दूसरे को बेडरूम की ओर धकेला। कपड़े तेज़ी से एक-एक करके ज़मीन पर गिरने लगे। जब हम पूरी तरह नग्न हुए, तो एक-दूसरे के शरीर की सुंदरता को निहारा। मैंने उसे बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर झुक गया। मेरे होंठ उसके गले, फिर कंधों, और फिर उसके स्तनों पर उतर गए। मैंने उसके एक स्तन को अपने मुँह में भरा और उसे ऐसे चूसा जैसे कोई भूखा बच्चा। वह अपने मुँह से उत्तेजना भरी आवाज़ें निकाल रही थी, उसके हाथ मेरे बालों को खींच रहे थे।
मेरा हाथ उसकी जाँघों के बीच चला गया, जहाँ की नमी मेरे स्पर्श का इंतज़ार कर रही थी। मैंने उसकी योनि पर अपनी उंगलियों से प्यार किया और वह कसक उठी। उसकी कामुकता चरम पर थी। मैंने अपने लिंग को उसके प्रवेश द्वार पर रखा और एक ही झटके में अंदर धँस गया। उसने एक लंबी, दर्द भरी आह भरी जो तुरंत खुशी की सिसकियों में बदल गई।
हमारा संभोग जंगली और तीव्र था। बिस्तर की हर कराहट, हर आह, हमारी वासना की कहानी बयां कर रही थी। मैं उसे अपनी बाहों में जकड़कर अपनी गति बढ़ाता गया, और वह भी हर धक्के का जवाब अपनी कमर हिलाकर दे रही थी। उसके होंठों से निकलती गर्म साँसें मेरे कान में पड़ रही थीं। “तेज़… और तेज़, राहुल!” वह चीख उठी। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे, एक लहर की तरह हमारे शरीर से आनंद की सिहरन गुज़र गई। उनकी **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** अब सिर्फ उनकी कल्पना में नहीं, बल्कि हकीकत में बदल चुकी थीं। हम पसीने से लथपथ, एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, हमारे दिल तेज़ी से धड़क रहे थे। यह तो बस शुरुआत थी।
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