जबसे प्रिया बगल वाले फ्लैट में रहने आई थी, रवि की रातें नींद की नहीं, बस ख़यालों की मोहताज हो गईं थीं। उसकी साड़ी से झाँकता बदन, कमर की पतली रेखा, और वो मदहोश कर देने वाली मुस्कान… रवि के मन में एक ही धुन बज रही थी: **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें**।
एक दिन, जब रवि अपनी बालकनी में खड़ा था, प्रिया ने आवाज़ दी, “रवि जी, क्या आप मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं? ऊपर से मेरी पानी की टंकी का ढक्कन उड़ गया है।” रवि का दिल धड़क उठा। यह तो भगवान का भेजा हुआ मौका था! वह तुरंत उसके फ्लैट में गया। प्रिया ने एक पतली, हल्की गुलाबी साड़ी पहनी थी, जिसमें से उसकी गुलाबी ब्रा की पट्टी साफ दिख रही थी। जब रवि छत पर चढ़ने लगा, प्रिया ने उसकी मदद करने के बहाने उसके कंधे पर हाथ रखा। उस स्पर्श से रवि के बदन में सिहरन दौड़ गई। काम खत्म होने के बाद, प्रिया ने चाय पर रुकने का आग्रह किया।
चाय पर बातें करते हुए, प्रिया ने अपनी अकेली जिंदगी और यहाँ अकेलेपन के बारे में बताया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उदासी और निमंत्रण दोनों थे। रवि ने देखा, उसकी आँखों में एक हवस की चमक थी, जो उसकी अपनी आँखों से मिल रही थी। “रवि जी, आप तो बिल्कुल मेरे सपनों के राजकुमार जैसे लगते हैं,” प्रिया ने अपनी आँखें झुकाते हुए कहा, लेकिन उसकी उंगलियाँ जानबूझकर रवि की उंगली को छू गईं। उस क्षण, रवि समझ गया कि **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** बस शुरू होने वाली थीं।
रवि ने धीरे से प्रिया का हाथ अपने हाथ में लिया और उसे अपनी ओर खींचा। प्रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी बाहों में ढल गई। रवि ने उसके रेशमी बालों में अपनी उंगलियाँ फेरीं और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक गहरा, प्यासा चुंबन। प्रिया ने अपनी जीभ से रवि की जीभ को छेड़ा, और रवि की उत्तेजना आसमान छूने लगी। उसके हाथों ने प्रिया की कमर को कसकर पकड़ लिया और उसे अपने और करीब खींच लिया, जब तक कि उनके जिस्म एक-दूसरे से चिपक नहीं गए।
प्रिया ने रवि को बेडरूम की ओर धकेला। कमरे में हल्की डिम लाइट थी, जो उनके कामुक मूड को और बढ़ा रही थी। रवि ने प्रिया की साड़ी खोलनी शुरू की। जैसे-जैसे साड़ी सरकती गई, प्रिया का कामुक बदन धीरे-धीरे सामने आता गया। गुलाबी ब्रा और पैंटी में उसका सुडौल जिस्म रवि की आँखों में आग लगा रहा था। उसने प्रिया को बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर झुक गया। उसके हाथों ने धीरे-धीरे उसकी ब्रा खोली, और प्रिया के भरे हुए स्तन रवि की आँखों के सामने आ गए। रवि ने उसके एक स्तन को अपने मुँह में लिया और जोर से चूसा, जैसे कोई प्यासा बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है। प्रिया के मुँह से दर्द और आनंद की मिली-जुली एक तीखी चीख निकली, “आह्ह्ह्ह रवि… और तेज़… और…!”
रवि ने उसके निप्पल्स को अपनी जीभ से छेड़ा, फिर अपने दाँतों से काटा। प्रिया के शरीर में एक अजीब सी हलचल पैदा हो रही थी। उसने अपनी पैंटी उतार दी, और उसकी योनि का वो खूबसूरत हिस्सा रवि की नज़रों के सामने आ गया। एक हल्की नमी पहले से ही वहाँ मौजूद थी। रवि ने अपनी उंगली से उसकी योनि की फांकों को सहलाया, और प्रिया बिस्तर पर बल खाने लगी। “प्लीज रवि… अब और इंतज़ार नहीं… मुझे अपनी उंगली से… मुझे अपनी उंगली से पागल कर दो,” प्रिया ने हाँफते हुए कहा। रवि ने अपनी एक उंगली उसकी योनि में डाली, और प्रिया ने अपनी टाँगें कसकर रवि के कमर पर लपेट लीं। उसने अपनी उंगलियों की गति तेज की, और प्रिया कुछ ही पलों में अपनी पहली चरम सुख पर पहुँच गई, उसके शरीर में एक थरथराहट दौड़ गई।
रवि ने अपने कपड़े उतारे, और उसका कठोर लिंग प्रिया की नज़रों के सामने आ गया। प्रिया ने उसे प्यार से सहलाया और उसे अपने मुँह में ले लिया। रवि ने अपनी आँखें बंद कर लीं और प्रिया के कला का आनंद लेने लगा। प्रिया ने बड़े सलीके से उसके लिंग को चूसा, उसे अपनी जीभ से छेड़ा, और रवि के शरीर में एक तेज़ गर्मी दौड़ गई।
“प्रिया… अब नहीं रहा जाता… मुझे पूरा करो,” रवि ने हाँफते हुए कहा। प्रिया ने रवि को अपने ऊपर खींच लिया, और रवि ने धीरे-धीरे अपने लिंग का सिरा प्रिया की गर्म, गीली योनि पर रखा। एक गहरी साँस ली और एक जोरदार धक्का मारा। “आह्ह्ह्ह…”, प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख निकली। रवि का पूरा लिंग प्रिया की योनि के भीतर समा चुका था। दोनों की साँसें तेज हो चुकी थीं। रवि ने लयबद्ध तरीके से धक्के लगाने शुरू किए। “और तेज़… और… हाँ… ओह्ह्ह्ह… रवि… फाड़ दो मुझे… आज रात मुझे अपना बना लो,” प्रिया ने चीखते हुए कहा।
उनके जिस्मों के मिलने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर चरमरा रहा था। रवि ने प्रिया के बालों को पकड़ा और उसे और करीब खींच लिया, उसके होंठों को चूसते हुए। हर धक्के के साथ, उनकी आत्माएँ एक-दूसरे में विलीन हो रही थीं। रवि की रफ्तार तेज होती गई, और प्रिया भी अपनी कमर उठा-उठा कर उसका साथ दे रही थी। दोनों की आँखें बंद थीं, सिर्फ आनंद और चरम सुख की दुनिया में खोए हुए।
कुछ ही पलों में, रवि ने अपने शरीर के सारे रस प्रिया के अंदर उड़ेल दिए, और प्रिया ने भी एक लंबी सिसकी के साथ अपने चरम सुख को प्राप्त किया। दोनों हाँफते हुए, पसीने से लथपथ एक-दूसरे पर गिर पड़े। प्रिया ने रवि को कसकर गले लगाया और उसके कान में फुसफुसाया, “यह तो बस शुरुआत है, मेरे रवि… हमारी **नई पड़ोसन के साथ इश्क की शरारतें** तो अभी शुरू हुई हैं।” रवि ने मुस्कुराते हुए उसे और कसकर अपनी बाहों में भर लिया, जानता था कि अब उनकी रातें कभी अकेली नहीं रहेंगी।
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