उसकी सूनी आँखें सालों से एक ऐसी आग की तलाश में थीं, जिसे उसके पति ने कभी बुझाना तो दूर, जलाना तक जरूरी न समझा। रीना, तीस की दहलीज पर खड़ी एक आकर्षक महिला, जिसका जिस्म आज भी सोलह साल की कुंवारी जैसी कसक रखता था। उसका पति, रमेश, शहर के बाहर अक्सर काम से रहता, और जब घर आता तो उसका ध्यान बस अपनी थकान और टीवी में होता। रीना का मन हर रात एक अनदेखे तूफान से जूझता रहता था, एक ऐसी प्यास जो भीतर ही भीतर उसे जलाए जा रही थी।
तभी उसकी जिंदगी में अजय आया, पड़ोस का नया लड़का, उसकी उम्र से कुछ साल छोटा, पर उसकी आँखों में एक ऐसी ललक थी, जो रीना को अपनी ओर खींचती थी। अजय की भरी-पूरी काया, उसकी मजबूत भुजाएँ, और उसकी बेपरवाह हँसी रीना के भीतर कुछ अनछुआ सा जगाती थी। एक दिन शाम को जब रीना छत पर कपड़े सुखा रही थी, अजय अपनी बालकनी में खड़ा उसे देख रहा था। उनकी नजरें मिलीं, और एक हल्की मुस्कान के साथ अजय ने अपनी चाय का कप रीना की ओर बढ़ाया। “चाय लेंगी रीना जी?”
रीना शरमा गई, पर मना न कर पाई। जब अजय चाय लेकर आया, तो बातों का सिलसिला शुरू हुआ। बातों-बातों में अजय ने रीना के सूनेपन को भांप लिया, और उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ गई। अगले कुछ दिनों में उनकी मुलाकातें बढ़ गईं – कभी बाजार में, कभी सुबह की सैर पर। हर बार अजय की आँखें रीना के जिस्म पर ठहर जातीं, और रीना भी उस नज़रों के तीर का आनंद लेती थी। उसे पता था कि वो एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है, और यह **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** उसे एक ऐसे भंवर में खींच रहा था, जिससे निकलना मुश्किल था।
एक दिन, रमेश के शहर से बाहर जाने पर, रीना अकेली थी। उसने अजय को मैसेज किया, “कॉफी पीने आओगे?” अजय फौरन आ गया। घर में दोनों अकेले थे, और हवा में एक अजीब सी बिजली दौड़ रही थी। अजय ने रीना के हाथों को थाम लिया, और रीना के जिस्म में सिहरन दौड़ गई। “रीना जी, आप कितनी खूबसूरत हैं,” अजय की आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी।
रीना ने धीरे से अपना सिर उठाया, और अजय की आँखों में देखा। उसकी आँखों में वो आग थी, जिसकी रीना को बरसों से तलाश थी। अजय ने धीरे से रीना के गालों को सहलाया, और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। रीना ने शुरुआत में खुद को रोका, पर फिर उसके जिस्म ने जवाब दे दिया। उसके होंठ खुल गए, और अजय की जीभ उसके मुँह के हर कोने को तलाशने लगी। रीना के हाथ अजय की कमर को कसकर जकड़ चुके थे।
चुंबन गहरा होता गया, और अजय के हाथ रीना की साड़ी के पल्लू में घुस गए। उसने धीरे से रीना की पीठ पर हाथ फेरा, और फिर उसके ब्लाउज के भीतर घुस गया, उसके नरम, भरे-भरे स्तनों को अपनी हथेली में भर लिया। रीना की साँसें तेज हो गईं, और उसके मुँह से धीमी आह निकली। अजय ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ गया। बेड पर लेटाते ही अजय ने रीना की साड़ी उतार दी, और फिर उसका ब्लाउज भी। रीना का भरा-पूरा जिस्म अजय के सामने नग्न था। अजय की आँखें लाल हो गईं। उसने रीना के पेट पर, उसकी कमर पर, और फिर उसकी जाँघों पर हाथ फेरा। रीना की योनि से रस टपकने लगा था।
“अजय… अब और इंतजार नहीं होता,” रीना ने सिसकते हुए कहा। अजय ने अपने कपड़े उतारे, और उसका कड़ा, उत्तेजित लिंग रीना के सामने लहरा रहा था। रीना ने उसे अपनी मुट्ठी में भर लिया, उसकी गर्म लसदार त्वचा को महसूस किया। अजय ने रीना की टांगों को फैलाया और उसके गुलाबी होंठों को चूमते हुए अपने लिंग को उसकी योनि के द्वार पर टिकाया। एक ही झटके में, वह पूरा का पूरा रीना के भीतर समा गया। रीना के मुँह से चीख निकल गई, जो तुरंत एक दर्दभरी आह में बदल गई।
अजय ने रीना को कसकर पकड़ लिया और धीरे-धीरे गति बढ़ाने लगा। रीना की हिप्स ऊपर उठने लगीं, और वो भी अजय की ताल से ताल मिलाने लगी। दोनों के जिस्म एक-दूसरे में धंसते जा रहे थे, और हर धक्के के साथ एक नई दुनिया खुल रही थी। रीना की आँखों में खुशी के आँसू थे, और उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति। यह **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर** अब उसकी आत्मा की प्यास बुझा रहा था। उनके होंठ फिर से मिल गए, और उन्होंने एक-दूसरे को चूमते हुए अपनी हर इच्छा को पूरा किया, जब तक कि दोनों के जिस्म थरथराते हुए चरम पर न पहुँच गए।
अजय रीना के ऊपर ही लेटा रहा, दोनों की साँसें तेज थीं। रीना ने अजय के बालों में हाथ फेरा। उसकी आँखों में अब सूनापन नहीं था, बल्कि एक नई चमक थी, एक नई संतुष्टि थी। उसे पता था कि उसने एक ऐसी सीमा पार कर दी है, जहाँ से वापस लौटना शायद मुमकिन न हो, पर उसे कोई अफसोस नहीं था। आज उसकी आत्मा तृप्त हुई थी, और उसका जिस्म भी। यह नया रिश्ता, यह **शादीशुदा औरत का पराये मर्द से अफेयर**, उसकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन चुका था, एक ऐसा राज़ जो उसे हर पल जिंदा महसूस कराता था।
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