आधी रात के सन्नाटे में, हवेली के पिछले गलियारे से आती माधवी की पायल की खनक रोहन के दिल में आग लगा देती थी। वह जानता था कि ये आहट सिर्फ़ उसके लिए थी, उस पल के लिए जब सारी दुनिया सो जाती और केवल उनकी वासना जाग उठती। माधवी, अपने नाम के अनुरूप, रात की रानी की तरह खिलती थी – उसकी मोहक सुंदरता और उससे आती मादक सुगंध रोहन को हर बार मदहोश कर देती थी। पिछले कुछ महीनों से, यह उनकी रात की रानी का गुप्त प्रेम प्रसंग था, एक ऐसा राज़ जो हवा में घुलती रात की रानी के फूलों की खुशबू जितना ही गहरा और नशीला था।
हवेली की सबसे ऊपर की छत पर बने छोटे से गुम्बदनुमा कमरे में रोहन उसका इंतज़ार कर रहा था। दरवाज़ा धीरे से खुला और कमरे में फैली हल्की चाँदनी में माधवी का साया उभरा। उसने एक पतली, पारदर्शी नीली साड़ी पहन रखी थी, जो उसके सुडौल शरीर से लिपटकर उसकी हर उभार को उभार रही थी। उसकी आँखें चमक रही थीं, लालिमा लिए हुए होंठ प्यास से भीगे हुए थे। बिना एक शब्द कहे, उसने दरवाज़ा बंद किया और रोहन की बाँहों में समा गई।
रोहन ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया, उसकी कमर पर हाथ रखते ही माधवी की साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी हथेलियों से उसकी कमर का वक्र सहलाया, साड़ी को थोड़ा ऊपर खिसकाते हुए उसकी नंगी त्वचा को महसूस किया। माधवी ने अपनी गर्दन पीछे की और उसके होठों पर अपने नरम, रसदार होंठों को रख दिया। वह एक उन्मादी चुंबन था – गहरा, गीला, और प्यास बुझाने वाला। उनकी जीभें एक-दूसरे से लड़ने लगीं, हर स्पर्श, हर स्वाद एक नई उत्तेजना पैदा कर रहा था।
“आज बहुत इंतज़ार करवाया, मेरी रात की रानी,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, उसके कानों के पीछे एक चुंबन देते हुए।
“आज रात तुम्हारा इंतज़ार मीठा फल देगा,” माधवी ने गहरी साँस लेते हुए जवाब दिया।
रोहन के हाथ अब उसकी साड़ी के आँचल में थे। उसने धीरे-धीरे उसे सरकाया, माधवी की गोल और भरी हुई छातियों को नंगा करते हुए। गुलाबी निप्पल चांदनी में और भी आकर्षक लग रहे थे। रोहन ने झुकाकर उन्हें अपने मुँह में ले लिया, एक को चूसा तो दूसरे को सहलाया। माधवी की देह एक सिहरन से काँप उठी, उसकी आहें कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं। वह अपनी उँगलियों से रोहन के बालों को नोच रही थी, अपने शरीर में उठते तूफ़ान को महसूस कर रही थी।
साड़ी और पेटीकोट उतरकर फर्श पर ढेर हो गए, माधवी अब केवल एक छोटी सी चोली और अंतर्वस्त्र में थी। रोहन ने उसे अपनी बाहों में उठा लिया और नरम बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी मदहोशी भरी आँखें रोहन को निमंत्रण दे रही थीं। उसने उसके अंतर्वस्त्र भी उतार दिए, अब माधवी पूरी तरह नग्न थी – उसकी सुंदर देह, गोरी त्वचा, और नीचे की ओर घना, काला झाड़। रोहन का लिंग माधवी की देह को देखते ही कठोर हो उठा था, उसका खून उसकी रगों में आग बनकर दौड़ रहा था।
माधवी ने रोहन को अपनी ओर खींचा। उसके हाथ उसके सख्त लिंग को छूते ही एक सिसकी उसके होठों से निकली। “बहुत इंतज़ार था तुम्हें,” उसने शरारती अंदाज़ में कहा। रोहन ने उसे अपनी टाँगों के बीच में ले लिया, उसकी जाँघें माधवी की कोमल जाँघों को छू रही थीं। माधवी ने अपनी टाँगों को उठाया और रोहन की कमर पर कस लिया, उसे अपने भीतर गहरे आने का निमंत्रण दे रही थी।
धीरे-धीरे, रोहन ने अपने लिंग को माधवी की गर्म, गीली फाँक के मुहाने पर रखा। एक पल के लिए दोनों की आँखें मिलीं, उनमें एक गहरी प्यास और अटूट प्रेम था। फिर, उसने एक गहरा धक्का दिया। माधवी की एक तीखी आह निकली, उसका शरीर ऊपर की ओर उछला। रोहन का लिंग पूरी तरह से उसके अंदर समा चुका था, उसकी योनि उसे कसकर जकड़े हुए थी।
उन्होंने धीमी गति से शुरुआत की, हर धक्का एक दूसरे में घुल जाने की चाहत से भरा था। बिस्तर चरमरा रहा था, उनके शरीर पसीने से भीग रहे थे, और उनकी आहों और सिसकियों से कमरा गूँज रहा था। रोहन की हर थ्रस्ट माधवी को चरम सुख की ओर धकेल रही थी। वह अपनी कमर उठाकर रोहन का साथ दे रही थी, उसकी आँखे बंद थीं और उसके होंठों से निकलती आवाज़ें बता रही थीं कि वह किस आनंद में डूबी हुई थी।
तेज, और तेज… उनकी गति बढ़ी, उनके शरीर एक लय में नाच रहे थे। माधवी ने रोहन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए, उसकी पीठ पर पसीने की धारें बह रही थीं। एक साथ, वे उस चरम सीमा पर पहुँचे जहाँ दुनिया के सारे सुख एक बिंदु पर सिमट जाते हैं। माधवी की देह एक बार फिर काँपी, उसका सारा शरीर ढीला पड़ गया, और एक लंबी, संतोष भरी आह के साथ वह रोहन पर ढेर हो गई। रोहन ने भी अपनी सारी ऊर्जा उसके भीतर उड़ेल दी, उसकी धड़कनें माधवी की धड़कनों से मिल गईं।
कुछ देर वे ऐसे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनकी साँसें तेज़ थीं और शरीर अभी भी कंपन कर रहे थे। चाँदनी कमरे में फैली हुई थी, और रात की रानी के फूलों की भीनी खुशबू हवा में घुल रही थी, उनके इस पवित्र, गुप्त प्रेम प्रसंग की गवाह बन रही थी। यह उनकी रात की रानी का गुप्त प्रेम प्रसंग था, जो हर रात उन्हें एक-दूसरे में पिघल जाने का मौका देता था, एक ऐसा नशा जो उन्हें जीवन भर के लिए बाँध चुका था। रोहन ने माधवी के माथे पर चुंबन किया। उसे पता था, यह रात भले ही ख़त्म हो जाए, लेकिन उनका यह प्रेम, यह वासना कभी ख़त्म नहीं होगी। अगली रात का इंतज़ार उन्हें फिर से इसी नशीले मिलन की ओर खींचेगा।
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