रिया ने जब पहली बार अर्जुन को देखा, तो उसके दिल में एक अजीब सी हलचल हुई, जैसे किसी ने मीठा सा तार छेड़ दिया हो। अर्जुन, उनका सीनियर मैनेजर, अपनी गंभीर personalidad और तेज नजरों के लिए मशहूर था। लेकिन रिया को उसकी आँखों में एक ऐसी गहराई दिखी, जो उसे कहीं और नहीं मिली थी। यह बस एक आम नौकरी की शुरुआत नहीं थी; रिया को महसूस हुआ, यह किसी अनोखी कहानी का पहला पन्ना था।
उनके दिन ऑफिस के शोरगुल और मीटिंग्स की भाग-दौड़ में बीतते। रिया नई थी और उसे अक्सर अर्जुन के मार्गदर्शन की ज़रूरत पड़ती। हर बार जब वह अर्जुन के केबिन में जाती, तो एक अजीब सी बेचैनी उसे घेर लेती। अर्जुन जब उसे कोई प्रोजेक्ट समझाता, तो कभी-कभी उनका हाथ अनजाने में छू जाता। उस छोटी सी छुअन से रिया के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ जाती। अर्जुन भी महसूस करता था, रिया की साँसें तेज़ हो जातीं और उसकी पलकें थोड़ी कांपने लगतीं। उनकी आँखों में एक ऐसी “romantic love story in office” की शुरुआत हो चुकी थी, जिसकी गहराई सिर्फ वही जानते थे।
एक शाम, जब ऑफिस लगभग खाली हो चुका था, रिया एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट पर काम कर रही थी। बाहर बारिश तेज़ हो चुकी थी और ऑफिस की लाइट्स मंद पड़ चुकी थीं। अर्जुन, जो आमतौर पर देर तक काम करता था, अभी तक अपने केबिन में था। उसने रिया की डेस्क पर आकर पूछा, “सब ठीक है रिया? मुझे लगा तुम निकल चुकी होगी।”
रिया ने नज़रें उठाईं। उसकी बिखरी ज़ुल्फ़ें और हल्की सी मुस्कान अर्जुन को खींच रही थी। “बस, यह रिपोर्ट खत्म करनी है। थोड़ा और समय लगेगा।”
अर्जुन ने उसके मॉनिटर की तरफ देखा। “अच्छा, मैं तुम्हारी मदद करता हूँ। यह थोड़ा पेचीदा प्रोजेक्ट है।”
रिया का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। वे दोनों कुछ देर खामोशी से काम करते रहे। ऑफिस की खामोशी में सिर्फ कीबोर्ड की आवाज़ और कभी-कभी बारिश की बूंदों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
धीरे-धीरे, उनके बीच की प्रोफेशनल दूरी कम होती गई। अर्जुन का हाथ अनायास ही रिया के कंधे पर आ टिका, जब वह उसे कोई ग्राफ समझा रहा था। रिया को लगा, जैसे उसके रोम-रोम में गर्मी की एक लहर दौड़ गई हो। उसने नज़रें उठाईं और पाया कि अर्जुन उसे ही घूर रहा था। उसकी आँखों में एक अनकही चाहत थी, एक गहरा प्रेम, जो ऑफिस के नियमों और मर्यादाओं से परे था।
“अर्जुन…” रिया की आवाज़ मुश्किल से निकली।
अर्जुन ने अपना हाथ उसके कंधे से हटाकर धीरे से उसके गाल पर रखा। उसकी उंगलियों की हल्की सी छुअन रिया के दिल में एक तूफान ले आई। “रिया… मैं जानता हूँ, यह सब शायद गलत है। लेकिन…” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और चाहत थी।
रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। वह अर्जुन के इतने करीब थी कि उसकी साँसों की गर्माहट अपने चेहरे पर महसूस कर सकती थी। “गलत… या सही… मैं समझ नहीं पा रही हूँ।”
“मेरे लिए ये सही है, रिया। तुमसे मिलना, तुम्हारे साथ वक्त बिताना… ये सब मेरे दिल को सुकून देता है।” अर्जुन ने धीमे से कहा, उसका अंगूठा रिया के गाल पर फेर रहा था।
उनके अधरों के बीच की दूरी कम होती जा रही थी। अर्जुन झुका और रिया ने भी अपनी गर्दन उठाई। उनकी आँखें बंद थीं, दिल तेज़ी से धड़क रहे थे। यह एक ऐसी “romantic love story in office” का सबसे रोमांचक पल था, जहां लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं थी, सिर्फ अहसास थे। उनकी साँसें एक-दूसरे में घुल-मिल गईं, और हवा में एक मीठी, अनकही गर्माहट फैल गई। उस पल में, ऑफिस की दीवारें, फाइल्स और मीटिंग्स सब बेमानी हो गए थे। यह सिर्फ रिया और अर्जुन थे, जो एक-दूसरे में खोए हुए थे।
अगली सुबह, जब सूरज की किरणें खिड़की से अंदर आ रही थीं, वे दोनों एक दूसरे से कुछ पल दूर, लेकिन अंदर से जुड़े हुए महसूस कर रहे थे। उन्होंने एक दूसरे को देखा, आँखों में एक नया, गहरा वादा था। यह उनकी अपनी, एक अनूठी “romantic love story in office” थी, जो अब सिर्फ ऑफिस तक ही सीमित नहीं रहने वाली थी। दफ्तर के बाहर की दुनिया भी उनके प्रेम की गवाह बनने को तैयार थी।
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