उसकी आँचल सरकती कमर पर मेरी नज़रें अक्सर ठहर जाया करती थीं। प्रिया, मेरी पड़ोसन, जो ठीक मेरे बगल वाले फ्लैट में रहती थी, एक ऐसी पहेली थी जिसे मैं हर रोज़ अपनी बालकनी से बैठकर सुलझाने की कोशिश करता था। वह अक्सर शाम को बालकनी में आती, पौधों को पानी देती और कभी-कभी गुमसुम सी बैठी रहती। उसकी आँखों में एक ऐसी गहरी प्यास थी जिसे मैंने महसूस कर लिया था। मेरा नाम रूहान था, और मैं भी अकेला था।
एक शाम, जब सूरज अपनी लाली बिखेर कर जा रहा था, प्रिया अपनी बालकनी में खड़ी थी, एक ढीली सी मैरून साड़ी में, जिसका पल्लू बार-बार उसके कंधे से सरक रहा था, जिससे उसके भरे-भरे वक्षों की हल्की सी झलक मिलती थी। मैंने उसे देखा, उसने मुझे देखा और एक पल के लिए हमारी नज़रें मिलीं। उस पल में, एक अजीब सी बिजली दौड़ी। उसने हल्की सी मुस्कान दी, जो सीधी मेरे दिल में उतर गई।
मैंने हिम्मत कर के पूछा, “प्रिया जी, आज उदास लग रही हैं?”
उसने आह भरी, “बस यूं ही… कभी-कभी ये अकेलापन बहुत खल जाता है, रूहान जी।”
उसकी आवाज़ में एक मीठी उदासी थी। मैंने कहा, “अकेले आप ही क्यों? हम सब हैं ना।”
वह मेरे जवाब पर मुस्कुराई, उसकी मुस्कान में एक अलग सी चमक थी। “क्या मैं आपके लिए चाय ला सकती हूँ, रूहान जी? आप भी तो अकेले ही हैं।”
यह एक न्योता था, एक मौन आमंत्रण जिसे मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। “ज़रूर, प्रिया जी। मुझे ख़ुशी होगी।”
जब मैं उसके फ्लैट में गया, तो हवा में एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हो रही थी। प्रिया ने एक हल्की परफ्यूम लगा रखी थी, जिसकी मादक ख़ुशबू मेरे नथुनों में भर गई। उसने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और खुद किचन में चली गई। उसकी चाल में एक अजीब सी लचक थी, जो मेरे मन में हज़ारों कल्पनाएं जगा रही थी। चाय पीते हुए हमारी बातचीत शुरू हुई, जो जल्दी ही गहरे, निजी मोड़ों पर आ गई। हम अपने अकेलेपन, अपनी इच्छाओं और अनकही वासनाओं पर बात कर रहे थे।
“कभी-कभी मन करता है कि कोई हो, जो बस गले लगा ले,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी नज़रें मेरे होठों पर थीं।
मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था। मैंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उसके नरम हाथों को अपनी मुट्ठी में भर लिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। “प्रिया…” मेरा स्वर काँप रहा था।
वह मेरे करीब सरकी, उसकी आँखों में एक अजीब सी आग थी। “रूहान…”
और फिर, मैंने खुद को रोक नहीं पाया। मेरे होंठ उसके होंठों पर टूट पड़े। यह एक भूख से भरी चुंबन थी, जो हमारे अंदर दबी सारी इच्छाओं को जगा रही थी। उसके होंठ नर्म और मीठे थे, जैसे पहली बारिश के बाद मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू। उसने भी मुझे उतनी ही शिद्दत से जवाब दिया, उसके हाथों ने मेरी गर्दन को कस कर पकड़ लिया।
चुंबन गहरी होती गई। मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी पीठ पर गए, और मैंने उसे अपनी ओर खींच लिया। उसका नर्म, गरम शरीर मेरे सीने से सट गया। मेरे हाथों ने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और उसके कमर पर मौजूद गांठे खोलने लगे। वह साँसों के बीच मेरे कानों में फुसफुसाई, “मुझे मत रोको, रूहान… आज मुझे आज़ाद कर दो।”
साड़ी फर्श पर गिरी और फिर ब्लाउज़ के बटन भी एक-एक करके खुलने लगे। उसके भरे हुए वक्ष, गोरे और सुडौल, मेरे सामने नग्न थे। मैंने उन्हें अपने हाथों में भरा और अपने होठों से उन्हें सहलाया। प्रिया की एक गहरी आह निकली। उसके नाखून मेरी पीठ पर गढ़ गए। यह तो बस शुरुआत थी मेरी और मेरी पड़ोसन प्रिया की गुप्त प्रेम कहानी की।
मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया। नरम बिस्तर पर उसे लिटाकर, मैंने उसके जिस्म के हर इंच को अपने होठों से टटोला। उसके पेट से नीचे उतरते हुए, मैंने उसके भीतरी अंगों को सहलाया, जिससे वह बेतहाशा मचल उठी। उसकी गरम और नम योनि मेरे स्पर्श से और भी अधिक उत्तेजित हो गई थी। वह अब पूरी तरह से आग थी, मेरे स्पर्श से और तेज़ होती हुई।
मैंने धीरे से अपने पैंट्स उतारे और अपने उत्तेजित लिंग को उसके पैरों के बीच रखा। उसने अपनी टाँगे उठाईं और मुझे अपनी ओर खींच लिया। पहला धक्का धीरे था, लेकिन गहरा। हम दोनों ने एक साथ साँस खींची। उसकी आँखें बंद थीं, उसके चेहरे पर दर्द और सुख का अजीब संगम था। दूसरा धक्का और गहरा, फिर तीसरा। अब हम पूरी तरह से एक हो चुके थे।
हमारे जिस्म एक दूसरे से टकरा रहे थे, पसीना बह रहा था और कमरे में सिर्फ हमारी साँसों की और जिस्मों के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी। मैंने अपनी गति तेज़ की, और प्रिया ने मुझे और कसकर अपनी ओर खींच लिया। उसकी मीठी-मीठी चीखें, उसकी आहें, मेरे कानों में संगीत की तरह बज रही थीं। कुछ ही देर में, हमारे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ी और हम दोनों एक साथ चरम सुख की गहराइयों में डूब गए। यह हमारी पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी का सबसे उत्तेजक अध्याय था।
हम देर तक एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे, हमारे जिस्मों की गर्मी एक-दूसरे को सुकून दे रही थी। हमने एक-दूसरे की आँखों में देखा, और उस पल में हम दोनों ने बिना कुछ कहे एक वादा किया – यह रात बस शुरुआत थी। यह अब सिर्फ पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी नहीं थी, यह हमारे दो अकेले दिलों का मिलन था, जो हर रात एक-दूसरे को पूरा करने वाले थे।
Leave a Reply