उसकी साड़ी का पल्लू जब भी कंधे से सरकता, मेरी साँसें अटक जाती थीं। प्रिया, मेरी नई पड़ोसन, जैसे साक्षात अप्सरा थी। हर सुबह जब वह अपने बालकनी में पौधे सींचती, उसकी गीली उंगलियाँ गुलाब की पत्तियों पर नहीं, मेरे जिस्म पर सरकती महसूस होती थीं। उसकी कमर की वो गहरी खाई, उसके भरे हुए कूल्हे, और दुपट्टे के नीचे उभरते स्तनों का उभार… सब कुछ मुझे मदहोश कर देता था। यह तो बस हमारी **पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी** की शुरुआत थी, जिसकी लपटें मेरे भीतर सुलग रही थीं।
एक रात, बिजली चली गई। पूरा अपार्टमेंट अंधेरे में डूब गया। मैंने मोमबत्ती जलाई और बालकनी में खड़ा हो गया। तभी देखा, प्रिया भी अपनी बालकनी में खड़ी थी, चाँदनी में नहायी हुई। उसने एक पतली सी कॉटन की नाइट ड्रेस पहनी हुई थी, जिसमें उसका सुडौल बदन साफ झलक रहा था। “राजेश जी, बहुत गर्मी है ना?” उसकी मीठी आवाज़ ने हवा में एक सिहरन पैदा कर दी। “हाँ, प्रिया जी,” मैंने जैसे-तैसे जवाब दिया। हमारी आँखें मिलीं, और उस एक पल में, मैंने उसकी आँखों में वही प्यास देखी जो मेरी आँखों में थी।
मैं हिम्मत करके उसके फ्लैट पर गया, यह बहाना करके कि मेरे यहाँ भी इन्वर्टर काम नहीं कर रहा। उसने दरवाज़ा खोला, और उसकी देह से आ रही मोगरे की ख़ुशबू ने मुझे पूरी तरह घेर लिया। “अंदर आ जाइए राजेश जी,” उसने शरमाते हुए कहा। हम दोनों चुपचाप बैठे थे, पर हवा में एक अजीब सा तनाव और उत्तेजना भरी हुई थी। मेरा हाथ अनजाने में उसके घुटने के पास जा पहुँचा। उसने अपना घुटना सहलाते हुए मेरे हाथ पर अपना नरम हाथ रख दिया। बिजली भले ही न थी, पर हमारे बीच अब एक प्रचंड बिजली दौड़ रही थी।
मैंने धीमे से उसका हाथ अपनी तरफ खींचा और अपनी उंगलियों से उसकी नरम हथेली सहलाने लगा। प्रिया की आँखें बंद हो गईं, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। मैंने उसके चेहरे की ओर देखा, उसकी गुलाबी होठों को देखा और खुद को रोक न सका। मैंने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए। पहले तो वह थोड़ी झिझकी, फिर उसने पूरी शिद्दत से मेरा साथ दिया। हमारी जीभें आपस में टकराईं, एक-दूसरे का स्वाद चखने लगीं। यह हमारा सच था, हमारी **पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी** का गहरा राज़।
उसकी नाइट ड्रेस इतनी पतली थी कि मेरे हाथों को उसके शरीर की हर गरमाहट महसूस हो रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और उसके बेडरूम की ओर चला। उसने अपनी टाँगे मेरी कमर में कस ली थीं। पलंग पर पहुँचते ही, मैंने उसे धीरे से लिटा दिया। मेरी उंगलियाँ उसकी नाइट ड्रेस के बटन खोलने लगीं। एक-एक करके बटन खुले, और फिर वो कपड़ा उसके जिस्म से अलग हो गया। चांदनी की रोशनी में उसका नग्न शरीर किसी देवी की तरह लग रहा था। उसके स्तन गोल और कड़े थे, निप्पल गुलाब की पंखुड़ियों जैसे। मैंने धीरे से उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। प्रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
मेरे होंठ उसके गले से नीचे सरकते हुए उसकी छाती तक पहुँचे, और फिर मैं उसके पेट पर, उसकी नाभि की गहराई में अपनी जीभ फिराने लगा। प्रिया पलंग पर तड़पने लगी, उसकी कमर ऊपर उठने लगी। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में उलझ गईं और वह फुसफुसाते हुए बोली, “राजेश… अब और नहीं… मैं मर जाऊँगी।” मैंने अपनी जीभ को और नीचे ले गया, उसकी जंघाओं के बीच, जहाँ उसकी योनि का गुलाबी द्वार मुझे अंदर आने का निमंत्रण दे रहा था। मैंने अपनी जीभ से उसकी कामेन्द्रिय को सहलाया। प्रिया की चीख निकल गई, और उसका शरीर काँप उठा।
मैंने अपनी पैंट उतारी, और मेरा उत्तेजित लिंग उसके सामने खड़ा था। उसने ललचाई नज़रों से उसे देखा और खुद ही अपने पैर खोल दिए। मैंने एक ही झटके में खुद को उसके भीतर उतार दिया। प्रिया की एक तीव्र आह निकली, और उसकी आँसुओं से भरी आँखें मेरी आँखों में देख रही थीं। “आह… राजेश… बहुत दर्द है… और बहुत मज़ा भी,” वह हाँफते हुए बोली। मैंने अपनी कमर की गति बढ़ाई, और हर धक्के के साथ प्रिया और गहरी होती जा रही थी। हमारे शरीर पसीने से भीग गए थे, और हमारा मिलन इस रात को और भी रहस्यमयी बना रहा था।
हम दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, वासना की इस अंधी गली में। प्रिया ने अपनी कमर उठाई और पूरी ताकत से मेरे धक्कों का जवाब देने लगी। उसकी मीठी आहें और मेरे गहरे धक्के, यह सब हमें एक अलग ही दुनिया में ले जा रहे थे। जब हमारी चरम सीमा आई, तो हम दोनों के शरीरों से एक तेज़ कंपकंपी गुज़री, और हम एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। मैं उसके ऊपर ही लेटा रहा, उसकी गरमाहट महसूस करता रहा। यह बस एक शुरुआत थी। हर अगली रात एक नई खोज थी, हमारी **पड़ोसन के साथ गुप्त प्रेम कहानी** में एक नया अध्याय। यह रात हमेशा के लिए हमारी स्मृति में अंकित हो गई थी, एक ऐसी रात जो हमें हमेशा एक-दूसरे की और करीब खींचती रहती।
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