आज फिर उसकी नज़रों ने मुझे अंदर तक भीगा दिया था, और मैं जानती थी कि अब और इंतज़ार करना मेरे लिए मुमकिन नहीं। रोहन, मेरा पड़ोसी, जब अपनी बालकनी में खड़ा होकर टी-शर्ट उतारता, तो मेरी धड़कनें मानो एक पागल घोड़े सी दौड़ पड़ती थीं। उसके कड़े, गठे हुए बदन को देखना मेरे लिए रोज़ का जुनून बन गया था। मेरे पति अक्सर देर रात तक ऑफिस में रहते थे, और इसी खालीपन में रोहन की मौजूदगी एक मीठी, ख़तरनाक चाहत बन चुकी थी। यह था हमारा पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी की शुरुआत।
पिछले हफ़्ते की बात है, मेरे नल से पानी टपक रहा था और मैंने हिम्मत कर के रोहन को मदद के लिए बुलाया। जैसे ही वो घर में आया, उसकी मर्दाना ख़ुशबू ने मेरे रोम-रोम को झंझोड़ दिया। उसने झुककर नल ठीक करना शुरू किया और उसकी टी-शर्ट ऊपर सरक गई, उसकी पैंट की कमर से ठीक ऊपर मुझे उसकी कमर का एक निशान दिखा। मेरा हाथ अनजाने में उसके बटों की तरफ़ बढ़ा, जिसे मैंने झट से रोक लिया। उसने मेरी तरफ़ मुड़कर देखा, उसकी आँखों में एक अनकही प्यास थी जो मेरी ही आँखों में झलक रही थी। “सब ठीक है, रीना?” उसने धीमी, गहरी आवाज़ में पूछा। “हाँ… हाँ, बिल्कुल ठीक,” मैंने हाँफ़ते हुए कहा। उस दिन तो वो चला गया, पर उस क्षण की आग मेरे भीतर सुलगती रही।
कल रात जब मैं बालकनी में कपड़े सुखा रही थी, उसने मुझे फिर से आवाज़ दी। “रीना जी, आज रात अकेले हैं क्या?” उसकी आवाज़ में शरारत और एक खुला निमंत्रण था। मेरी साँस अटक गई। मैंने नीचे देखते हुए कहा, “हाँ, मेरे पति आज नहीं आएंगे।” “तो, एक कप कॉफ़ी पीने आओगी क्या मेरे घर?” उसकी आवाज़ अब फुसफुसाहट में बदल गई थी। मैं काँप उठी। यही तो था वो क्षण जिसका मैं महीनों से इंतज़ार कर रही थी।
थोड़ी देर बाद, मैंने अपनी गुलाबी नाईटी पर हल्का सा बाथरोब डाला और दबे पाँव उसके दरवाज़े की तरफ़ बढ़ी। दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। मैंने दरवाज़े पर हल्की दस्तक दी। उसने दरवाज़ा खोला, और उसकी नज़रों ने मुझे सिर से पाँव तक स्कैन किया। “आ जाओ, रीना,” उसने अपनी मर्दाना आवाज़ में कहा। अंदर घुसते ही उसने दरवाज़ा बंद किया और बिना एक पल भी गँवाए, मुझे अपनी बाहों में भर लिया। उसका मज़बूत बदन मेरे मुलायम जिस्म से टकराया और मेरे मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
उसने अपनी उँगलियाँ मेरी कमर पर फ़िराईं, बाथरोब की डोरी को खोलते हुए। मेरी नाईटी का कपड़ा उसके स्पर्श से और भी मुलायम महसूस हो रहा था। उसने मुझे उठाया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। एक लम्बा, गहरा चुम्बन। मेरे होंठ उसके होंठों से ऐसे मिले जैसे बरसों से प्यासे हों। उसकी ज़बान मेरी ज़बान से मिली और हम एक-दूसरे को बेताबी से चूसने लगे। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, और मैं उसके बालों को कसकर पकड़े हुए थी।
उसने मुझे बेडरूम की ओर धकेला। कमरा अँधेरे में डूबा था, बस चाँद की हल्की रोशनी खिड़की से आ रही थी। उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर झुक गया। मेरी नाईटी अब मेरे कंधों से सरक कर नीचे गिर चुकी थी। उसकी गरम साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं। “तुम कितनी ख़ूबसूरत हो, रीना,” उसने फुसफुसाया। उसके हाथ मेरे स्तनों पर आ टिके। उसने मेरी निप्पल को अपने अंगूठे और उंगली के बीच में दबाया और फिर उसे चूसना शुरू कर दिया। मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं। मेरे शरीर में आग लगी हुई थी।
रोहन ने एक पल भी नहीं गँवाया। उसने अपनी पैंट उतारी और उसका कठोर औज़ार मेरे सामने था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, शरम और उत्तेजना से। उसने मेरे पैरों को फैलाया और धीरे से मेरे अंदर प्रवेश करना शुरू किया। एक तीखी, मीठी पीड़ा के साथ मेरा जिस्म उससे जुड़ा। “आहह्ह्ह्ह… रोहन…” मेरे मुँह से बेकाबू आवाज़ें निकल रही थीं। उसने धीमी गति से कमर हिलाना शुरू किया, और फिर धीरे-धीरे गति बढ़ती गई। हम दोनों एक साथ हिल्लोंरें ले रहे थे, पसीने से भीगे हुए। बिस्तर की आवाज़ें, हमारी साँसें और हमारी सिसकियाँ उस रात की गवाह बन रही थीं।
उसने मुझे ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचा, मेरे कूल्हे उसके हाथ में थे और वो मेरे अंदर और गहरा जा रहा था। मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। मैं अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। एक तेज़ झटका और मैं उस चरम सुख की गहराइयों में डूब गई। उसके कुछ ही पल बाद, उसने भी अपनी सारी शक्ति मेरे अंदर उड़ेल दी, और हम दोनों एक-दूसरे में लिपट कर काँप रहे थे।
पड़ोसी के साथ गुपचुप प्यार हिंदी में, यह हमारी पहली रात थी, लेकिन मुझे पता था कि यह आख़िरी नहीं होगी। जब उसने मेरे माथे पर चुम्बन किया और कहा, “मिलते रहेंगे,” तो मैंने महसूस किया कि मेरा जीवन अब एक नई, ख़तरनाक और बेहद सुखद दिशा में मुड़ चुका था। मेरे मन में एक मीठा एहसास था कि अब हर रात, जब मेरा पति घर पर नहीं होगा, मुझे पता था कि मेरा पड़ोसी मेरा इंतज़ार कर रहा होगा।
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