प्रिया कैफे के अंदर दाखिल हुई तो रोहन की साँसें वहीं थम गईं, मानो वक़्त भी एक पल के लिए रुक गया हो। उसकी साड़ी का पल्लू सरक कर कंधे पर टिक गया था, और गहरे गले से झाँकता उसका उभार एक अप्रत्यक्ष निमंत्रण था। आँखें मिलीं और उस पहली ही नज़र में, एक अनकही जुबान ने दोनों के बीच एक पुल बना दिया।
“आप प्रिया हैं?” रोहन ने अपनी आवाज़ को स्थिर रखने की कोशिश करते हुए पूछा।
“और आप रोहन?” प्रिया ने मुस्कराते हुए कहा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो रोहन को सीधे दिल तक महसूस हुई।
कॉफी टेबल पर रखी थी, मगर उनकी बातें उस पर नहीं, बल्कि एक दूसरे की आँखों में तैर रही थीं। हर शब्द, हर वाक्य एक दूसरे के जिस्मों में सुलगती आग को हवा दे रहा था। माहौल में एक ऐसी उत्तेजना थी जिसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल था। रोहन ने धीमे से प्रिया का हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसकी उँगलियों का स्पर्श बिजली की तरह प्रिया के जिस्म में दौड़ गया। उसने अपनी उँगलियों से रोहन की हथेली सहलाई, जैसे कोई अनकही कहानी कह रही हो।
“क्या हम यहाँ से कहीं और चलें?” रोहन ने फुसफुसाते हुए पूछा, उसकी आवाज़ में एक गहरा आग्रह था। प्रिया ने आँखें झुकाईं और फिर सहमति में सिर हिलाया। वह जानती थी, रोहन क्या कहना चाहता है और उसका दिल भी उस अनकही मंजिल की ओर खिंचा चला जा रहा था।
चंद मिनटों में वे रोहन के अपार्टमेंट में थे। दरवाज़ा बंद होते ही, जैसे कोई अदृश्य बंधन टूट गया। रोहन ने प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया, उसकी गर्म साँसें प्रिया की गर्दन पर महसूस होते ही प्रिया ने अपनी आँखें मूँद लीं। एक जंगली भूख, एक बेकाबू प्यास दोनों के जिस्मों में दौड़ने लगी थी। उनके होंठ मिले, एक दूसरे का स्वाद चखते हुए, एक दूसरे की साँसों में घुलते हुए। प्रिया की साड़ी का पल्लू ज़मीन पर गिरा और फिर उसके ब्लाउज़ के हुक खुले। रोहन ने अपनी जीन्स और शर्ट उतार फेंकी, उनकी आँखों में सिर्फ़ वासना की नहीं, बल्कि एक गहरी चाहत की लपटें थीं।
बिस्तर पर पहुँचते-पहुँचते उनके जिस्म पूरी तरह नग्न हो चुके थे। रोहन ने प्रिया के सुडौल जिस्म को अपनी हथेलियों में समेट लिया, उसके वक्ष स्थल को सहलाते हुए उसने प्रिया की कमर पर अपनी पकड़ कस ली। प्रिया ने एक आह भरते हुए अपने नाखूनों से रोहन की पीठ खुजलाई, उसके मुँह से निकलती कामुक सिसकियाँ कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं। रोहन ने उसके पैरों को फैलाया और उनके जिस्मों का मिलन हुआ। एक गहरी, तृप्त कर देने वाली अनुभूति दोनों के अंदर समा गई। प्रिया ने रोहन को अपनी कमर से कसकर जकड़ लिया, और रोहन ने अपनी कमर को एक लय में हिलाना शुरू कर दिया।
हर धक्के के साथ, उनकी आत्माएँ एक-दूसरे में पिघल रही थीं। यह सिर्फ़ जिस्मों का खेल नहीं था, यह दो प्यासी रूहों का मिलन था। प्रिया ने अपनी सारी उत्तेजना एक जंगली चीख में बदल दी जब रोहन ने उसे अपनी चरम सीमा पर पहुँचा दिया। रोहन ने भी उसकी गहराई में खुद को ढीला छोड़ दिया, और उनकी पहली मुलाकात का यह पल हमेशा के लिए यादगार बन गया।
रोहन ने प्रिया के माथे पर एक नमकीन चुंबन दिया। “प्रिया,” उसने फुसफुसाया, “यह सिर्फ़ एक रात की कहानी नहीं है। मुझे लगता है, यह तो **पहली मुलाकात में गहरा इश्क हिंदी** की शुरुआत है।” प्रिया ने उसकी बात पर हल्के से मुस्कराते हुए अपने शरीर को रोहन से और कसकर चिपका लिया। “मुझे भी यही लगता है, रोहन,” उसने जवाब दिया। “यह तो सिर्फ़ एक शुरुआत है, हमारे बेकाबू प्यार की, हमारे जिस्मानी लपटों में जलते हुए **पहली मुलाकात में गहरा इश्क हिंदी** की।” उन्होंने उस रात कई बार एक-दूसरे को छुआ, खोजा, और पाया कि उनकी आत्माएँ एक-दूसरे के लिए ही बनी थीं। सुबह की पहली किरण उनके नग्न जिस्मों पर पड़ी, और उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में एक भविष्य की कहानी पढ़ी। यह सिर्फ़ एक रात नहीं थी, यह उनके जीवन का सबसे खूबसूरत और गहरा मोड़ था।
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