रात का स्याह अँधेरा और मूसलाधार बारिश ने दिल्ली की सड़कों को पानी से भर दिया था। मेरे अपार्टमेंट की बालकनी से मैं बस इस तूफानी मौसम का लुत्फ़ ले रही थी, तभी दरवाज़े पर एक धीमी सी दस्तक हुई। कौन हो सकता है इस वक़्त? मैंने संकोच करते हुए दरवाज़ा खोला और सामने खड़ी उस आकर्षक आकृति को देख मेरे जिस्म में जैसे बिजली दौड़ गई। उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी, जो पल भर में मेरे दिल को जला बैठी। यह पहली मुलाकात थी, पर मुझे लगा जैसे मैं उसे सदियों से जानती हूँ।
वह रोहन था, मेरे पड़ोस में नया आया था। बारिश से भीगा हुआ, उसके बाल माथे पर बिखरे थे और टी-शर्ट उसके सुडौल जिस्म से चिपक गई थी। ‘माफ़ करना, काव्या,’ उसने कहा, ‘मेरी बिल्डिंग में पावर कट है और मैं तुम्हारा वाई-फाई इस्तेमाल करने आया था, अगर तुम्हें कोई ऐतराज़ न हो।’ उसकी आवाज़ में एक मर्दानी खनक थी, जिसने मेरे अंदर कुछ गुदगुदा दिया। मैंने उसे अंदर आने को कहा। ‘आओ, अंदर आओ। मैं चाय बनाऊँ?’ चाय तो बस एक बहाना था, मैं उसे और क़रीब से महसूस करना चाहती थी।
ड्राइंग रूम की डिम लाइट में, हमारी आँखें बार-बार मिलतीं और हर बार एक गहरा अर्थ छोड़ जातीं। चाय के बहाने हमारे हाथ टकराए, और एक झनझनाहट मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। ‘तुम्हें यहाँ कैसा लग रहा है?’ उसने पूछा, उसकी निगाहें मेरी नम होंठों पर टिकी थीं। ‘अच्छा लग रहा है,’ मैंने कहा, ‘ख़ासकर आज रात।’ मेरी आवाज़ में एक अजीब सी ललक थी। उसने धीरे से मेरे हाथ को अपने हाथ में लिया और मेरे अंगूठे को सहलाने लगा। यह स्पर्श इतना मोहक था कि मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
हम एक-दूसरे की आँखों में डूब गए थे। बिना एक भी शब्द बोले, वह मेरे क़रीब आया, उसकी साँसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, दिल की धड़कनें बेकाबू हो चुकी थीं। उसके होंठ मेरे होंठों से मिले, पहले हल्के से, फिर एक गहरे, वासनात्मक चुंबन में बदल गए। यह कोई सामान्य चुंबन नहीं था, यह प्यासी आत्माओं का मिलन था। उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली, एक मीठी जंग शुरू हो गई। मेरा पूरा शरीर सिहर उठा। यह **पहली मुलाकात में गहरा इश्क हिंदी** की सबसे ख़ूबसूरत परिभाषा थी, जो शब्दों से परे थी।
मेरे हाथों ने उसके भीगे बालों को सहलाना शुरू कर दिया, और उसके हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरी पीठ पर चढ़ गए, मेरी कुर्ती को ऊपर धकेलते हुए। उसने मुझे अपनी बाहों में उठाया और मैं उसके कंधे पर अपना सिर टिकाकर, उसकी महक में खो गई। उसने मुझे बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर धीरे से लिटाया। हमारी आँखें एक-दूसरे से एक पल भी अलग नहीं हुईं। उसने मेरी कुर्ती के बटन खोले, उसकी उँगलियाँ मेरे गर्म जिस्म को छूती जा रही थीं, और हर स्पर्श एक आग लगा रहा था। मेरी ब्रा को हटाते ही, उसकी निगाहें मेरी उभरी हुई छातियों पर ठहर गईं। उसने झुककर मेरे निप्पल्स को अपने मुँह में भर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। मेरे मुँह से एक मदहोश कर देने वाली चीख निकली।
मैंने उसके टी-शर्ट को उतार फेंका और उसके मज़बूत, मांसल शरीर को सहलाने लगी। उसकी पेंट भी उतर चुकी थी, और मेरा हाथ उसके उभार पर पहुँच गया। वह पहले से ही तनाव में था, और मेरे स्पर्श से उसकी उत्तेजना बढ़ गई। उसने मेरे सलवार और पैंटी को एक ही झटके में उतार दिया, मेरी टांगों को फैलाया और अपनी जगह पर आ गया। मैंने अपनी टाँगों से उसे जकड़ लिया। उसकी आँखें मेरी आँखों में थीं, एक मौन सहमति। उसने धीरे-धीरे प्रवेश किया, और एक गहरा सुख मेरे रोम-रोम में समा गया। हमारी आहें और सिसकियाँ कमरे में गूँज उठीं। हर धक्के के साथ, हम और गहरे डूबते जा रहे थे, एक-दूसरे में समाते हुए। ‘रोहन!’ मैंने पुकारा, जब मेरा शरीर एक तीव्र उत्तेजना से काँपने लगा। वह भी मेरे साथ ही उस चरम सुख की गहराई में उतर गया।
हम थककर एक-दूसरे की बाहों में पड़े थे, साँसें अभी भी तेज़ थीं। उसकी छाती पर लेटे हुए, मैंने महसूस किया कि यह सिर्फ़ जिस्मानी मिलन नहीं था, यह आत्माओं का भी मिलन था। ‘काव्या,’ उसने मेरे बालों को सहलाते हुए कहा, ‘यह तो हमारी **पहली मुलाकात में गहरा इश्क हिंदी** है, जो शायद सदियों तक याद रखा जाएगा।’ मैंने उसकी बात पर मुस्कुराते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। बाहर बारिश थम चुकी थी, पर हमारे अंदर एक नया तूफ़ान शुरू हो चुका था – प्यार, वासना और एक बेजोड़ जुड़ाव का तूफ़ान। यह सिर्फ़ एक रात की बात नहीं थी, यह एक नई शुरुआत थी, जो जीवन भर चलने वाली थी और हमेशा **पहली मुलाकात में गहरा इश्क हिंदी** की निशानी बनी रहेगी।
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