आज प्रिया की निगाहें रह-रहकर रोहन पर जा टिक रही थीं, और यह सिर्फ़ किसी प्रोजेक्ट की डेडलाइन का तनाव नहीं था। आज कुछ और था, कुछ अनकहा, अनचाहा… फिर भी बेहद मोहक। रोहन की मस्कुलर काया, उसकी मंद मुस्कान और वो उसकी आंखों में गहरे बसे शरारती भाव, प्रिया को भीतर तक मथ रहे थे। शाम के सात बज चुके थे। ऑफिस धीरे-धीरे खाली हो रहा था, लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन के लिए रोहन और प्रिया को रुकना पड़ा था। बाहर मॉनसून की हल्की बूँदें खिड़की पर थिरक रही थीं, और अंदर उनके दिलों में तूफ़ान उठ रहा था।
“प्रिया, यह स्लाद थोड़ी गलत लग रही है,” रोहन ने अपनी कुर्सी उसके करीब खींचते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी गर्माहट थी। प्रिया का हाथ माउस पर था, लेकिन जैसे ही रोहन का हाथ उसके कंधे को छूता हुआ लैपटॉप तक गया, एक बिजली-सी दौड़ गई। प्रिया का बदन काँप उठा। उसने गहरी साँस ली, “हाँ, मैं… मैं अभी ठीक करती हूँ।” उसकी आवाज़ लड़खड़ा गई। रोहन की उँगलियाँ उसके खुले बाल के एक रेशे को छूती हुई आगे बढ़ीं, और उसने हल्की-सी सरसराहट महसूस की। यह सब उनके बीच पनप रहे **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** का ही नतीजा था।
“लगता है आज देर रात तक काम करना पड़ेगा,” रोहन ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी नज़रें प्रिया के होठों पर थीं। प्रिया ने पलटकर देखा। रोहन की आँखें नशा से भरी हुई थीं। एक पल को दुनिया ठहर गई। प्रिया का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसने अपनी डेस्क से पानी की बोतल उठाई, लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे। “रोहन, क्या… क्या तुम ठीक हो?” उसने पूछा। रोहन ने धीरे-से अपना हाथ बढ़ाया और प्रिया की उंगलियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसकी छुअन से प्रिया के पूरे शरीर में झुनझुनी दौड़ गई।
“मैं बिल्कुल ठीक हूँ, प्रिया। असल में, मैं कभी इतना ठीक महसूस नहीं किया,” रोहन ने उसकी उँगलियों पर अपना अंगूठा फेरते हुए कहा। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थीं। “चलो, यहाँ से चलते हैं,” रोहन ने फुसफुसाया। “काम…?” प्रिया ने बुदबुदाया। रोहन हँसा, उसकी हँसी में एक अजीब-सी मस्ती थी। “काम कल भी हो जाएगा। आज रात हमारी है।” उनके इस **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** को अब कोई सीमा रोक नहीं सकती थी।
वे ऑफिस से निकले और रोहन की गाड़ी में बैठकर सीधे उसके अपार्टमेंट पहुँचे। लिफ्ट में सन्नाटा था, लेकिन हवा में एक तनावपूर्ण उत्तेजना तैर रही थी। जैसे ही अपार्टमेंट का दरवाज़ा खुला, रोहन ने प्रिया को अंदर धकेलकर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर उसने बिना एक पल गंवाए प्रिया की कमर पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे से मिले, एक जंगली, प्यासी चूमने की शुरुआत हुई। प्रिया ने अपनी बाँहें रोहन की गर्दन में डाल दीं और अपने आप को पूरी तरह से उसके हवाले कर दिया। उनकी साँसें मिल गईं, धड़कनें एक हो गईं।
रोहन ने प्रिया को गोद में उठा लिया और उसे बेडरूम की ओर ले गया। प्रिया के पैर उसके शरीर के इर्द-गिर्द लिपट गए। जैसे ही वे बेड पर गिरे, उनके कपड़े एक-एक करके बदन से उतरने लगे, जल्दबाजी और वासना में। रोहन की उँगलियाँ प्रिया की ब्रा के हुक पर पहुँचीं और एक झटके में उसे खोल दिया। प्रिया की साँसें उखड़ गईं, उसकी आँखें नशा से भर गईं। रोहन ने प्रिया के नग्न शरीर को अपने बदन से सटा लिया, उसकी त्वचा की गर्माहट प्रिया को मदहोश कर रही थी। रोहन के होंठ प्रिया की गर्दन से होते हुए उसके स्तनों तक पहुँच गए, और उसने उन्हें अपने मुँह में भर लिया। प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं, वह दर्द और आनंद के बीच झूल रही थी।
“रोहन… आ…” प्रिया ने अपनी पीठ को मोड़ते हुए कहा। रोहन ने उसकी टाँगों के बीच जगह बनाई, और एक गहरा, धीमा धक्का दिया। प्रिया के मुँह से एक तीव्र चीख निकल गई, जो तुरंत एक आह में बदल गई। वे एक-दूसरे में समा गए, एक ही लय में नाचने लगे। रोहन की हर धड़कन, हर हरकत प्रिया को स्वर्ग के करीब ले जा रही थी। प्रिया ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं, उसके नाखून रोहन की पीठ पर निशान छोड़ रहे थे। वे एक-दूसरे की गर्माहट में पिघल रहे थे, उनकी वासना की अग्नि उन्हें भस्म कर रही थी।
कई बार वे एक-दूसरे में खोए, हर बार पहले से अधिक गहरा, अधिक तीव्र आनंद पाते हुए। अंत में, वे एक-दूसरे से लिपट कर हाँफते हुए पड़े रहे, उनकी त्वचा पसीने से भीगी हुई थी, लेकिन उनके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि की मुस्कान थी। यह तो बस शुरुआत थी उनके **ऑफिस कलीग के साथ बेकाबू प्यार** की, एक ऐसी दास्तान जो शब्दों से परे थी। वे जानते थे कि अब उनके बीच कुछ भी सामान्य नहीं रह पाएगा, और वे इसे बदलने की कोई इच्छा नहीं रखते थे। आज रात ने उनके जीवन की दिशा हमेशा के लिए बदल दी थी।
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