उसकी नज़रों की तपिश ने आज भी मेरे तन-बदन में आग लगा दी थी, ठीक वैसे ही जैसे सालों पहले लगाया करती थी। प्रिया मेरे सामने बैठी थी, उसकी रेशमी साड़ी उसके हर उभार को बड़ी नजाकत से छू रही थी, और मेरी आँखें बिना इजाजत उसके गहरे गले वाले ब्लाउज में झाँकने लगी थीं। सालों की दूरी के बावजूद, हमारी केमिस्ट्री आज भी उतनी ही ज्वलंत थी। एक हल्की मुस्कान उसके होंठों पर उभरी, “रोहन, तुम बदल गए हो… या शायद नहीं।” उसकी आवाज़ में एक मादक खनक थी जो मेरे भीतर कहीं गहरा उतर गई।
मैंने बस सिर हिलाया, मेरे शब्द गले में ही अटक गए थे। आज पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी करने का यह अवसर था, और मेरा दिल खुशी और बेचैनी से पागल हो रहा था। उसने अपने फ्लैट पर बुलाया था, “सिर्फ कॉफी के लिए,” उसने कहा था, लेकिन हम दोनों जानते थे कि यह सिर्फ एक बहाना था। उसके हाथों ने जब कॉफी का कप मेरी ओर बढ़ाया, तो उसकी उँगलियों का स्पर्श मेरे हाथों से हुआ। एक बिजली सी कौंध गई, जो हमारे शांत वार्तालाप को पल भर में भस्म कर गई।
कॉफी का कप मेज पर रखते ही, प्रिया मेरे करीब आई। उसकी साँसों की गर्माहट मेरे चेहरे पर पड़ने लगी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक निमंत्रण, एक चुनौती। “याद है रोहन?” उसने फुसफुसाते हुए पूछा, उसके होंठ मेरे कानों के इतने करीब थे कि उसकी साँसों की हरारत मुझे साफ महसूस हो रही थी। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया, और हमारे होंठ पल भर में एक-दूसरे पर टूट पड़े। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह प्यासे रेगिस्तान की बारिश थी, बरसों की तड़प का इजहार था। हमारे होंठ, जीभ, दाँत एक-दूसरे को चूमते, चाटते, काटते हुए बेकाबू हो रहे थे।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और बेडरूम की ओर ले चला। कमरा पहले से ही मंद रोशनी से भरा था, एक धीमी धुन बज रही थी जो माहौल को और भी रूमानी बना रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर धीरे से लिटाया, उसकी साड़ी का पल्लू पहले ही मेरे हाथों में आ चुका था। एक-एक करके उसके कपड़े उतरने लगे, उसकी गोरी त्वचा चाँदनी में दमक रही थी। उसके स्तन, वर्षों बाद भी उतने ही भरे हुए और कसैले थे, उनकी नोंकें मेरी हर छूअन से और अधिक अकड़ जाती थीं। मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके, और अब हम दोनों नग्न, बेकाबू जिस्मों में एक-दूसरे के सामने थे।
प्रिया ने मेरी छाती पर अपना सिर रखा, उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू किया, उसकी कमर, उसकी जाँघें, और फिर उसकी गीली, उत्तेजित योनि पर मेरी उँगलियाँ थिरकने लगीं। वह आहें भरती हुई मेरी बाँहों में और सिमट गई। उसकी हर आह, हर कराहट मुझे और अधिक उकसा रही थी। मुझे यह पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी का चरम एहसास मिल रहा था, जो बरसों से मेरे दिल में दबा हुआ था। उसने मेरा लिंग अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी, उसकी हर छूअन से मेरे जिस्म में एक आग सी लग गई।
मैंने उसे पलटाया और उसके नितंबों पर अपने होंठ रख दिए, उन्हें चूमता, चाटता हुआ मैं उसकी पीठ से होता हुआ नीचे सरक गया। उसकी योनि से निकलती कामुक गंध ने मुझे दीवाना बना दिया था। मैं अपनी जीभ से उसके अमृत को चाटने लगा, उसकी सिसकियाँ तेज हो गईं, उसके शरीर में एक कंपन सा उठ गया। “रोहन… आह… और…” वह बेकाबू हो उठी। मैंने अपनी गति तेज कर दी, और कुछ ही पलों में वह मेरे मुँह पर ही चरमोत्कर्ष तक पहुँच गई।
वह हाँफती हुई मेरे ऊपर गिरी, उसकी आँखें शराब जैसी लाल हो चुकी थीं। “अब तुम्हारी बारी,” उसने कहा और मुझे बिस्तर पर धकेल दिया। वह मेरे ऊपर आ गई, उसकी योनि मेरे लिंग के ठीक ऊपर थी। मैंने एक गहरा साँस लिया और उसे अपनी ओर खींचा। उसके गर्म, रसीले द्वार में मेरा लिंग धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा। “आह!” उसकी एक तीखी चीख निकली, और फिर उसने खुद को पूरा मेरे ऊपर छोड़ दिया। हम दोनों एक साथ थिरकने लगे, हमारी देह एक रिदम में मिल चुकी थी। मैं उसे कसकर पकड़े हुए था, उसकी हर धड़कन मेरी धड़कन में घुल चुकी थी। हमारी पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी का यह एहसास, हमारे जिस्मों के मिलन से कहीं गहरा था। हर धक्के के साथ, हम अतीत की हर याद को, हर शिकायत को भूल रहे थे, और सिर्फ वर्तमान के इस कामुक सुख में डूब रहे थे।
हमारी साँसें एक हो गईं, हमारे जिस्मों से पसीने की बूंदें टपकने लगीं। कुछ ही देर में, हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। मेरे शरीर से निकली गर्म धारा उसके भीतर समा गई, और हम दोनों एक-दूसरे की बाँहों में निढाल हो गए। उस रात, हम दोनों ने सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि अपनी आत्माओं को भी एक-दूसरे में पिरो दिया था। यह अंत नहीं, बल्कि एक नए, बेकाबू जुनून और पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी की एक नई, रोमांचक शुरुआत थी।
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