उसकी साड़ी का पल्लू सरकते ही, राहुल की आँखों में बरसों पुरानी आग धधक उठी।
शहर में बारिश की बूँदें तेज़ हो चुकी थीं, और मेरे एकांत फ्लैट में प्रिया का आगमन किसी तूफ़ान से कम नहीं था। हम बरसों बाद मिल रहे थे, और उस तूफ़ान की गड़गड़ाहट मेरे दिल में साफ़ सुनाई दे रही थी। मैंने उसे अंदर बुलाया, और जैसे ही वह चौखट लाँघकर मेरे सामने खड़ी हुई, उसकी नम साड़ी से आती हल्की खुशबू ने मुझे पूरी तरह घेर लिया। उसकी आँखों में वही शरारत और वही गहरा प्यार था जो मैंने कभी खो दिया था।
“राहुल… तुम बदले नहीं,” वह मुस्कुराई, और उसकी आवाज़ में एक अजीब-सी कशिश थी।
“तुम भी नहीं, प्रिया। शायद और ज़्यादा हसीन हो गई हो,” मैंने सच कहा।
एक अजीब-सी चुप्पी छा गई, जो हज़ारों अनकही बातों और अनछुए एहसासों से भरी थी। मैंने उसे बैठने को कहा, लेकिन वह दरवाज़े के पास ही खड़ी रही, उसकी निगाहें मेरे चेहरे पर टिकी थीं। बिजली चमकी और कमरे में हल्का अंधेरा छा गया। उस अंधेरे में उसकी आँखें और भी चमक उठीं। मैंने महसूस किया कि उसके होंठों पर वही हल्की मुस्कान है, जो मुझे कभी मदहोश कर देती थी।
“अकेले क्यों हो राहुल?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ अब और गहरी थी।
“तुम्हारे इंतज़ार में,” मैंने धीरे से कहा, और उस पल हमारी पुरानी केमिस्ट्री हवा में तैरने लगी।
बिना किसी और शब्द के, मैं उसके करीब गया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और मेरी नज़र उसके भीगे होंठों पर ठहर गई। ये *पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी* का पहला चरण था, और इसका हर पल मेरे जिस्म को झुलसा रहा था। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके गाल पर रखा। उसकी त्वचा गर्म थी, और जैसे ही मेरा अंगूठा उसके निचले होंठ से टकराया, उसकी आँखें धीरे से बंद हो गईं।
हमारा पहला चुंबन वर्षों के इंतज़ार और दबी हुई चाहत का विस्फोट था। उसके होंठ नर्म और मादक थे, और मैंने जैसे ही उन्हें अपनी गिरफ्त में लिया, एक बिजली-सी मेरे पूरे बदन में दौड़ गई। उसकी साड़ी का पल्लू अब पूरी तरह उसके कंधे से खिसक चुका था, और उसके भीगे ब्लाउज में से उसके उभारों की हल्की झलक मुझे और बेताब कर रही थी। मैंने उसे और करीब खींचा, उसके जिस्म की गर्मी मेरे जिस्म में समाने लगी।
मेरे हाथ उसकी कमर पर फिसल गए, और मैंने उसे अपनी तरफ़ इस कदर खींचा कि हमारे बीच कोई दूरी न बची। उसके होंठों का स्वाद, उसकी साँसों की तेज़ी, और उसके जिस्म की मदहोशी, सब कुछ मेरे दिमाग़ पर छा गया था। मैंने उसे अपने बाहों में उठा लिया और बेडरूम की तरफ़ बढ़ गया। कमरे में पहुँचते ही, मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लिटाया।
उसकी आँखें खुलीं और उसने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। उसकी उँगलियाँ मेरे बालों में उलझ गईं और उसने मुझे फिर से एक गहरे चुंबन में खींच लिया। मेरे हाथों ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए। एक-एक बटन खुलते ही उसके जिस्म का वो हिस्सा मेरे सामने आ रहा था, जिसके सपने मैंने वर्षों से देखे थे। उसका ब्लाउज हटते ही, उसके सुडौल, कसे हुए स्तन मेरे सामने थे, और मैं खुद को रोक नहीं पाया।
मैंने अपने होंठों से उसके गुलाबी निपल्स को छुआ, और उसके मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उसके हाथ मेरी शर्ट उतारने में मदद करने लगे। जल्द ही, हम दोनों के कपड़े अलग हो चुके थे, और हम एक-दूसरे के जिस्मों की गर्मी में झुलस रहे थे। मैंने उसके ऊपर झुककर उसके हर अंग को चूमना शुरू किया, उसकी गर्दन से लेकर उसकी जाँघों तक, उसकी हर आह और हर कराह मेरे जुनून को और बढ़ा रही थी।
यह *पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी* का वो लम्हा था, जहाँ यादें और वर्तमान एक साथ पिघल रहे थे। जैसे ही मैं उसके भीतर समाया, एक तीव्र सुख की लहर हम दोनों के जिस्मों में दौड़ गई। उसकी पकड़ मुझ पर कस गई, और उसकी आँखों में आँसू छलक आए – खुशी के, प्यार के, और इस दोबारा मिले अनमोल लम्हे के। हमारी साँसें एक हो गईं, और हम दोनों ने खुद को उस पल की चरम सीमा पर पहुँचा दिया।
जब हमारी साँसें थोड़ी सामान्य हुईं, तब भी हम एक-दूसरे की बाहों में लिपटे थे। बारिश अब धीमी हो चुकी थी, लेकिन हमारे भीतर एक नया तूफ़ान उठ चुका था – प्यार का, चाहत का, और कभी न खत्म होने वाले जुनून का। यह सिर्फ़ एक रात नहीं थी, यह *पुरानी गर्लफ्रेंड से दोबारा इश्क हिंदी* की शुरुआत थी, एक ऐसी शुरुआत जिसकी आग कभी बुझने वाली नहीं थी।
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