कमरे की मंद रोशनी में, प्रिया का बदन आज कुछ ज़्यादा ही बेचैन था। उसकी रेशमी साड़ी ढीली थी, और हवा की हर सरसराहट उसके सीने में एक अजीब सी कसक पैदा कर रही थी। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ के साथ ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं। रोहन भीतर आया, उसकी आँखों में वही पुरानी, जानी-पहचानी ललक थी, जो प्रिया की नसों में आग लगा देती थी। “इंतज़ार करवा दिया, जान?” रोहन की आवाज़ में एक गहरी गर्माहट थी, जो सीधे प्रिया की आत्मा को छू गई।
बिना एक पल भी गंवाए, रोहन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया का शरीर तुरंत उसके सांचे में ढल गया, जैसे वह सदियों से इसी पल का इंतज़ार कर रही हो। उनके होंठ मिले, और यह सिर्फ़ एक चुम्बन नहीं था, यह प्यास थी, इंतज़ार था, और एक-दूसरे में खो जाने की बेताबी थी। रोहन के हाथ प्रिया की कमर पर सरकते हुए धीरे-धीरे साड़ी की गांठ तक पहुँचे। साड़ी ज़मीन पर गिरी और प्रिया का नग्न, सुडौल शरीर सिर्फ़ एक पतले ब्लाउज़ और पेटीकोट में रोहन के सामने था, जो उसकी आँखों में साफ़ दिख रही कामुकता को और बढ़ा रहा था। रोहन ने धीरे-धीरे उसके ब्लाउज़ के हुक खोले, और जब उसके उन्नत वक्ष उनके सामने खुले तो रोहन की साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से प्रिया के निप्पलों को अपने मुँह में लिया, और प्रिया की जुबान से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
रोहन ने प्रिया को बिस्तर पर लिटा दिया, और खुद भी उसके ऊपर आ गया। अब उनके बीच कोई कपड़ा नहीं था। देह से देह का मिलन इतना तीव्र था कि दोनों के रोम-रोम में एक झंकार सी दौड़ गई। रोहन के स्पर्श से प्रिया का बदन कॉप रहा था। उसने अपने पैरों से रोहन को कसकर जकड़ लिया, जैसे वह कभी उसे खुद से दूर जाने ही न दे। रोहन की उँगलियाँ प्रिया की योनि में उतर गईं, जहाँ पहले से ही प्यार का अमृत छलछला रहा था। प्रिया ने अपनी आँखें मूँद लीं, उसके होंठो से सिर्फ़ रोहन का नाम निकल रहा था। यह वो पल था जब उन्हें एहसास हुआ कि यह सिर्फ़ एक रात नहीं होगी, बल्कि **रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला** होगा। रोहन का मजबूत अंग जब प्रिया की देह में समाया, तो दोनों ने एक साथ गहरी साँस ली। यह केवल शारीरिक मिलन नहीं था, यह दो आत्माओं का एक हो जाना था, जहाँ कोई झिझक नहीं, कोई सीमा नहीं।
उनकी आहें और फुसफुसाहट कमरे की दीवारों से टकराकर लौट रही थीं। बिस्तर की चादरें सिकुड़ चुकी थीं, और हवा में पसीना और प्रेम की खुशबू घुल गई थी। हर धक्के के साथ, हर आह के साथ, वे एक-दूसरे में और गहराई से उतरते जा रहे थे। प्रिया का बदन बार-बार ऐंठा, चरम सुख की लहरों में बहता गया, और रोहन ने हर बार उसे अपनी बाहों में कस लिया, उसकी हर आह को अपने होंठों से पी लिया। एक बार नहीं, कई बार उन्होंने एक-दूसरे में अपना सब कुछ लुटाया। उनकी वासना कभी शांत नहीं हुई, बस एक नए सिरे से धधकती रही। यह सचमुच **रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला** था, जो सुबह के उजाले तक चलता रहा।
जब सुबह की पहली किरणें खिड़की से छनकर उनके नग्न शरीरों पर पड़ीं, तब भी वे एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। प्रिया ने रोहन के सीने पर सिर रखा हुआ था, और उसके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। रोहन ने धीरे से उसके बालों को सहलाया। कल रात की थकान के बावजूद, उनके चेहरे पर एक अद्भुत शांति और तृप्ति थी। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा और बिना कुछ कहे ही एक-दूसरे की रूह को पढ़ लिया। उनका प्यार, उनका साथ, सचमुच **रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला** था, और ये सिलसिला हमेशा यूँ ही चलता रहेगा, हर रात को और ख़ास बनाता रहेगा।
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