“रोहन, आज तो मुझे तुम्हारी हर एक साँस महसूस करनी है,” प्रिया ने फुसफुसाते हुए कहा, जब वह उसके करीब आई और अपनी रेशमी साड़ी का आँचल धीरे से उसके कंधे से गिरा दिया। कमरा केवल मंद दीपक की रोशनी से जगमगा रहा था, जिसने उनके मिलन की कामुकता को और गहरा कर दिया। रोहन ने उसकी कमर पर हाथ रखा, उसे अपनी ओर खींचा। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं जब उसने उसकी गरदन पर अपनी नरम उँगलियाँ फिराईं। “पूरी रात मेरी हो तुम,” रोहन की आवाज़ में एक गहरी गर्माहट थी, जो प्रिया के भीतर आग लगा गई।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। एक धीमी, गहरी चुंबन जो धीरे-धीरे उग्र होती गई। उनकी ज़ुबानें एक-दूसरे में उलझ गईं, एक मदहोश कर देने वाला नृत्य। रोहन के हाथों ने प्रिया की कमर से नीचे सरक कर उसके नितंबों को थाम लिया, उसे अपनी देह से और भी कसकर सटा लिया। उसे महसूस हुआ कि रोहन का बदन भी उत्तेजना से काँप रहा है। प्रिया ने अपने नाखूनों से रोहन की पीठ पर हल्का-सा खरोंचा, उसकी आह उसके कानों में शहद घोल गई।
एक-एक कर उनके वस्त्र उतरने लगे, जल्दबाजी नहीं, बल्कि एक कामुक अनुष्ठान की तरह। प्रिया ने रोहन की शर्ट के बटन खोले और उसकी गठीली छाती पर अपनी हथेली फिराई। रोहन ने उसकी साड़ी खोली, एक-एक परत हटती गई और प्रिया का सुडौल शरीर मंद रोशनी में और भी मोहक लग रहा था। जब प्रिया अपने ब्लाउज के हुक खोल रही थी, रोहन ने उसे रोक लिया। “नहीं, मैं खोलूँगा,” उसने फुसफुसाया और धीरे से उसके ब्लाउज को हटा दिया। उसके स्तन तुरंत ऊपर उठ आए, रोहन की नज़रें उन पर ठहर गईं। उसने झुककर उसके एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया, उसे चूसने और सहलाने लगा। प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल गईं। उसकी पैंटी भी हटते ही, उनका बदन अब पूरी तरह नग्न था, एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहा था।
बिस्तर पर, उनके शरीर एक-दूसरे पर फिसलते रहे। रोहन ने प्रिया के पूरे बदन को चूमा, उसके पेट से नीचे उतरते हुए, उसकी जाँघों को सहलाते हुए। प्रिया की उत्तेजना चरम पर थी, उसकी आँखें मदहोश थीं, उसका शरीर हर स्पर्श के लिए तड़प रहा था। उसने रोहन के बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया और उसे अपने करीब खींच लिया। “अब और इंतज़ार नहीं,” उसने हाँफते हुए कहा।
रोहन ने अपनी स्थिति ली, धीरे-धीरे प्रिया की योनि पर अपने लिंग को रखा। प्रिया ने अपनी साँस रोक ली। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, यह दो आत्माओं का गहन संगम था जो रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला था। एक झटके में, वह उसके भीतर समा गया। प्रिया के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो तुरंत रोहन के होंठों में दब गई। वे एक-दूसरे को चूमते रहे, उनकी साँसें एक हो गईं, उनके शरीर एक लय में चलने लगे। रोहन की हर धक्के के साथ, प्रिया अपने आप को उसके भीतर और गहरा महसूस करती। बिस्तर चरमराती आवाज़ कर रहा था, और कमरे में उनकी आहें और वासना की गंध भर गई थी।
उनकी गति तेज होती गई, पसीना उनके बदन से झर रहा था, पर उन्हें कोई होश नहीं था। वे एक-दूसरे में पूरी तरह खोए हुए थे। “और तेज, रोहन!” प्रिया ने अपनी कमर उठाते हुए चीखा। वह उसकी हर इच्छा पूरी कर रहा था, अपनी सारी शक्ति और वासना के साथ उसे भर रहा था। उनका यह रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला कई बार रुका और फिर से शुरू हुआ, हर बार पहले से ज़्यादा गहरा, ज़्यादा तीव्र।
जब उनकी उत्तेजना अपने चरम पर पहुँची, और वे दोनों एक ही साथ एक मीठे विस्फोट में समा गए। प्रिया ने अपनी सारी शक्ति खो दी और रोहन की बाँहों में ढीली पड़ गई। उनका बदन पसीने से तर था, उनकी साँसें उखड़ रही थीं, लेकिन उनके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। रोहन ने उसे कसकर गले लगाया और उसके माथे को चूमा। “आज की रात सिर्फ हमारी थी, हमेशा की तरह, रात भर चलने वाला प्यार का सिलसिला, जो कभी खत्म नहीं होगा।” प्रिया ने उसकी छाती पर अपना सिर रख दिया और उसकी धड़कनें महसूस करती हुई सो गई। उनके बदन शांत थे, पर आत्माएँ अब भी वासना की अग्नि में लिप्त थीं, एक-दूसरे में खोई हुई। यह सिर्फ एक रात नहीं थी, यह उनके प्रेम और वासना का एक अनवरत महोत्सव था।
Leave a Reply