दरवाज़े की कुंडी खुलते ही, कविता की कामुक निगाहें राकेश पर ऐसे पड़ीं मानो वह सदियों की प्यास बुझाने को तैयार हो। रात गहरी थी और हवा में एक अजीब सी तपिश थी, जिसने उनके दिलों में पहले से जल रही आग को और भड़का दिया था। राकेश ने मुस्कुराकर दरवाजा बंद किया और सीधे कविता की ओर बढ़ा, जो अपने रेशमी नाइटगाउन में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। उसका चेहरा गुलाबी था और आँखें शरारत से भरी थीं।
“बहुत देर लगा दी आज, पिया!” कविता ने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खनक थी जो राकेश के रोम-रोम में सिहरन पैदा कर गई। राकेश ने बिना कुछ कहे, उसे अपनी बाहों में भर लिया। उनके जिस्मों के मिलते ही, एक बिजली सी दौड़ी। कविता ने अपनी उँगलियाँ राकेश की गर्दन में उलझाईं और उसे और करीब खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे पर ऐसे टूट पड़े मानो ये लम्हा बरसों से रुका हुआ था। गहरी, नशीली चुंबन की आग उनके पूरे अस्तित्व को घेरने लगी। राकेश के हाथों ने कविता की कमर को कसकर पकड़ा और उसे थोड़ा ऊपर उठाया, जिससे उसके पैर राकेश के धड़ से लिपट गए। कविता ने अपनी आहटें उसके कानों में भर दीं, “आज तो बस… रात भर की हॉट बातें हिंदी में होंगी, है ना?”
कमरे में मद्धम रौशनी थी, जो उनके मदहोश कर देने वाले खेल की गवाह बन रही थी। राकेश ने कविता को पलंग पर धीरे से उतारा, उनके होंठ एक पल के लिए भी अलग नहीं हुए थे। उसके हाथ कविता के नाइटगाउन की डोरी पर गए और एक झटके में वो ढीला होकर ज़मीन पर गिर गया। कविता का सुडौल शरीर राकेश के सामने था, चाँदनी की रोशनी में दमकता हुआ। राकेश की आँखें उसके हर उभार, हर ढलान को निहार रही थीं। कविता की साँसें तेज़ हो गईं और उसने राकेश की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। एक-एक करके कपड़े हटे और दोनों नग्न अवस्था में एक-दूसरे के सामने थे, उनकी त्वचा की गर्माहट एक-दूसरे को छू रही थी।
राकेश ने कविता के स्तनों को अपने हाथों में भर लिया, उनके निप्पलों को सहलाते हुए उसने उन्हें धीरे से चूसा। कविता के मुँह से दर्द और सुख से मिली-जुली एक सिसकारी निकली। उसकी उँगलियाँ राकेश के बालों में उलझ गईं और उसने राकेश के सिर को और नीचे दबाया। राकेश नीचे उतरता गया, उसके होंठ कविता के पेट से होते हुए उसकी जांघों तक पहुँचे। कविता का शरीर ऐंठने लगा। “आह… राकेश… और… और गहराई से…” वह फुसफुसाई, उसकी आवाज़ वासना से काँप रही थी। राकेश ने अपनी ज़बान से उसके अंतरंग अंगों को छेड़ा, कविता के जिस्म में एक तूफ़ान उठ खड़ा हुआ। उसकी हर आह, हर कराहट यही बता रही थी कि आज की रात सिर्फ जिस्मों का मिलन नहीं, बल्कि रूह का समर्पण था।
जब राकेश उसके ऊपर आया, तब तक कविता पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। उनकी आँखें मिलीं और उनमें एक गहरी समझ थी। राकेश ने धीरे-धीरे, लेकिन पूरे अधिकार से, कविता के भीतर प्रवेश किया। “आहह्ह्ह्ह्ह्ह!” कविता के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, जो पल भर में सुख की आह में बदल गई। राकेश ने तालबद्ध तरीके से गति बढ़ाई। हर धक्के के साथ, उनकी साँसें और तेज़ होती गईं, उनके जिस्म एक-दूसरे में पिघलते जा रहे थे। पलंग की चरमराहट, उनकी साँसों की गर्माहट और उनके होंठों से निकलती मदहोश करने वाली आवाज़ें… यही तो थी रात भर की हॉट बातें हिंदी में, जो बिना शब्दों के भी सब कुछ कह रही थीं।
वे एक-दूसरे में खो गए, वासना की उस गहराइयों में जहाँ सिर्फ सुख और संतोष था। उनके शरीर की हर नस, हर बूँद एक-दूसरे में समाने को बेताब थी। कुछ देर बाद, एक तीव्र सिहरन के साथ, कविता के शरीर में एक झटका लगा और वह राकेश को कसकर अपनी बाहों में जकड़कर सुख के चरम पर पहुँच गई। राकेश भी कुछ ही पलों में उसकी गहराइयों में ही खुद को पूरी तरह खाली कर चुका था, उनके जिस्म एक-दूसरे में ऐसे गुंथे थे जैसे कभी अलग थे ही नहीं। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपक कर लेटे रहे।
सुबह की पहली किरण फूटने तक, उनके जिस्म एक-दूसरे में ऐसे समा चुके थे मानो कभी अलग थे ही नहीं। हर स्पर्श, हर आह, हर गहराई… वो जान चुके थे कि रात भर की हॉट बातें हिंदी में सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि रूह में भी उतरती हैं और हमेशा के लिए एक अमर निशान छोड़ जाती हैं।
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