सावन की उमस भरी रात थी, और प्रिया के बदन में अजीब सी बेचैनी थी। कमरे में पंखा पूरी गति से चल रहा था, फिर भी उसकी त्वचा पर पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थीं। शादी के बाद अपनी बड़ी बहन के घर आई प्रिया, आज रात अकेली थी। जीजाजी राजेश कहीं बाहर गए थे और दीदी अपनी सहेली के घर। प्रिया की नज़र बार-बार खिड़की से झांकती बिजली की चमक पर जा टिकती, और हर चमक के साथ उसके भीतर कुछ और गहरा होता जाता। उसने अपनी पारदर्शी नाइटी को और ढीला किया, पर मन की आग बुझी नहीं।
तभी दरवाज़ा खुला और राजेश भीतर आए। उनके कपड़े बारिश में थोड़े भीग गए थे, और उनकी मर्दाना खुशबू पूरे कमरे में फैल गई। प्रिया का दिल धक-धक करने लगा। “अरे प्रिया, तुम अभी तक सोई नहीं? और इतनी गर्मी लग रही है क्या?” राजेश ने पूछा, उनकी नज़र प्रिया के सुडौल जिस्म पर अटक गई, जो नाइटी के भीतर साफ झलक रहा था। “जी जीजाजी, नींद नहीं आ रही थी,” प्रिया की आवाज़ हल्की कांप गई। राजेश ने मुस्कुराते हुए अपना तौलिया उतारा और पास पड़ी कुर्सी पर रखा। उनकी गीली टी-शर्ट उनके सीने से चिपकी थी, और प्रिया की निगाहें उनके मज़बूत बाज़ुओं और उभरते डोले पर जा टिकीं।
एक अजीब सी खामोशी कमरे में छा गई, जिसमें अनकहे अहसासों की आहटें साफ सुनाई दे रही थीं। राजेश ने प्रिया के पास आकर पूछा, “कोई दिक्कत है क्या प्रिया? तुम कुछ परेशान लग रही हो।” उनके हाथ ने अनजाने में प्रिया के हाथ को छू लिया। एक बिजली सी दौड़ी दोनों के जिस्म में। प्रिया की साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से सिर उठाया और राजेश की आँखों में देखा। उन आँखों में वही प्यास थी जो उसके अपने भीतर सुलग रही थी। यह था जीजा साली का बेडरूम रोमांस का पहला स्पर्श।
राजेश का हाथ प्रिया की कमर पर सरक गया। प्रिया ने अपनी आँखें मूंद लीं और एक गहरी साँस ली। राजेश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया, और प्रिया का नरम बदन उनके मजबूत जिस्म से टकराते ही एक सिहरन से भर गया। राजेश के होंठ प्रिया की गर्दन पर उतर आए, फिर धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए उसके रसभरे होंठों को चूम लिया। यह चुंबन गहरा था, प्यास भरा, और हर सीमा को तोड़ देने वाला। प्रिया ने भी अपना पूरा शरीर राजेश को सौंप दिया, उसके हाथों ने राजेश के बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया।
राजेश ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। नाइटी कब उसके जिस्म से अलग हो गई, उन्हें पता ही नहीं चला। प्रिया का गोरा और कोमल शरीर चांदनी रात में और भी कामुक लग रहा था। राजेश ने उसके वक्ष पर अपने होंठों से निशान बनाने शुरू किए, और प्रिया के मुंह से मदहोश कर देने वाली आहें निकल पड़ीं। “जीजाजी… और… और तेज़,” वह फुसफुसाई। राजेश ने प्रिया की टांगों को फैलाया और उसके भीतर उतर गए। एक गर्मजोशी, एक कसाव, एक ऐसी तृप्ति जो प्रिया ने पहले कभी महसूस नहीं की थी। उनकी हर हरकत के साथ प्रिया की आहें और चीखें कमरे में गूँजने लगीं। यह रात सिर्फ़ शरीर का मिलन नहीं, बल्कि आत्माओं का, वर्जित इच्छाओं का मिलन था, जीजा साली का बेडरूम रोमांस अपनी चरम सीमा पर था।
उनकी साँसें एक-दूसरे में गुम हो गईं। पसीने से भीगे जिस्म एक-दूसरे से कसकर चिपके थे। जब उनकी प्यास बुझी, तो दोनों एक-दूसरे की बाहों में निढाल पड़े थे। प्रिया ने राजेश के सीने पर सिर रखकर एक सुकून भरी आह भरी। राजेश ने उसके बालों को सहलाया। दोनों की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक ऐसा राज़ जो सिर्फ़ उन्हीं दोनों का था। उस रात, सावन की बारिश ने बाहर ही नहीं, उनके भीतर भी कई बरसों की सूखी ज़मीन को भिगो दिया था। यह एक ऐसी शुरुआत थी जिसका अंत शायद कहीं नहीं था, बस यही तो है जीजा साली का बेडरूम रोमांस हिंदी कहानियों का सार।
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