उस दिन प्रिया भाभी के जाने के बाद, रिया की नज़रें कुछ ज़्यादा ही बेताबी से दरवाज़े पर टिकी थीं, विकास जीजू के इंतज़ार में। गर्मी का मौसम था और रिया ने अपनी पतली गुलाबी कॉटन की साड़ी को यूँ ही ढीला छोड़ रखा था, जिसके अंदर से उसका गोरा बदन झाँक रहा था। जैसे ही विकास जीजू ने दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा, उनकी नज़रें सीधी रिया पर पड़ीं, जो सोफ़े पर अर्द्ध-नग्न अवस्था में लेटी थी। एक पल के लिए दोनों की साँसें थम सी गईं। ये जानते हुए भी कि ये गलत था, उनके बीच पनप रहा **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** एक अदृश्य डोर की तरह उन्हें खींच रहा था।
विकास जीजू ने अपने गले को साफ़ किया, “अकेली हो क्या रिया?”
रिया की आवाज़ जैसे गले में ही अटक गई थी, उसने बस एक सिर हिलाया। विकास जीजू ने पानी का ग्लास उठाया और किचन की तरफ बढ़ गए। रिया उठकर उनके पीछे चली गई। किचन में विकास जीजू ने पानी पीया और ग्लास रखने के लिए झुके, तभी रिया उनके ठीक पीछे खड़ी हो गई थी। उनकी पीठ रिया के नर्म स्तनों से छू गई। विकास जीजू का शरीर सिहर उठा। उन्होंने सीधा होने की कोशिश की, पर रिया ने अपनी बाहें उनकी कमर में डाल दीं।
“क्या कर रही हो रिया?” विकास जीजू की आवाज़ में हल्की घबराहट थी, पर आँखों में साफ़-साफ़ वासना दिख रही थी।
“वही जो आप चाहते हैं जीजू…” रिया की फुसफुसाहट ने विकास जीजू के कानों में आग भर दी।
उन्होंने पलटकर रिया को अपनी बाहों में भर लिया। रिया का गुलाबी आँचल ज़मीन पर गिर चुका था। विकास जीजू ने रिया के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। ये कोई साधारण चुम्बन नहीं था, ये बरसों की दबी हुई हसरतों का सैलाब था। रिया ने भी पूरी शिद्दत से उनका साथ दिया, उसकी जीभ विकास जीजू की जीभ से उलझ गई, दोनों एक दूसरे के रस को चूसते रहे, जब तक कि उनकी साँसें फूलने नहीं लगीं।
विकास जीजू ने रिया को गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ बढ़ गए। दरवाज़ा बंद होते ही अंधेरा और गहरा हो गया, सिर्फ खिड़की से आती चाँदनी की हल्की रौशनी थी। उन्होंने रिया को बिस्तर पर लिटाया और खुद भी उसके ऊपर आ गए। विकास जीजू के हाथों ने रिया की साड़ी को कब उसके जिस्म से अलग कर दिया, पता ही नहीं चला। अब रिया सिर्फ एक पतली सी ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी, जो भी पल भर में उतार दिया गया। रिया ने भी विकास जीजू की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। जल्द ही दोनों पूरी तरह नग्न अवस्था में एक दूसरे के सामने थे।
रिया का गोरा, सुडौल बदन विकास जीजू की आँखों में चमक पैदा कर रहा था। उन्होंने रिया के स्तनों को अपने मुँह में भर लिया, उन्हें चूसा और काटा। रिया की आहें पूरे कमरे में गूँजने लगीं। “आ…ह… जीजू… और तेज़… मुझे और चाहिए…” रिया की बेताबी बढ़ती जा रही थी। विकास जीजू नीचे उतरते गए, उसके पेट, उसकी नाभि, और फिर उसकी जांघों के बीच। रिया की योनि पहले से ही गीली और गरम थी, अपनी जीभ से छूते ही रिया के शरीर में एक तेज़ बिजली दौड़ गई।
इस पल में, हर शर्म, हर झिझक मिट चुकी थी। ये सिर्फ उनके बीच का **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** था, जो अब वासना की अग्नि में धधक रहा था। विकास जीजू ने अपनी कमर उचकाई और अपने लंड को रिया की रसभरी योनि के द्वार पर रख दिया। एक गहरी साँस लेकर, उन्होंने एक झटके में पूरा लंड रिया के अंदर उतार दिया। रिया की चीख निकल गई, पर वो चीख दर्द की कम और चरम सुख की ज़्यादा थी। विकास जीजू ने अपनी गति बढ़ाई, हर धक्का गहरा और तेज़ होता जा रहा था। बिस्तर की चरमराहट, दोनों के जिस्मों की थपथपाहट और रिया की मदहोश कर देने वाली आहें, सब कुछ कमरे में एक अजीब सी उत्तेजना भर रहा था।
“जीजू… मैं… आ… रही हूँ…” रिया ने अपनी पीठ उठाई और विकास जीजू को कसकर अपनी बाहों में भर लिया।
विकास जीजू ने भी अपनी सारी ताक़त लगाकर अंतिम धक्के दिए। दोनों एक साथ चरम सुख की गहराइयों में समा गए। उनके जिस्म पसीने से भीग चुके थे, उनकी साँसें तेज़ थीं, और उनके दिल एक साथ धड़क रहे थे।
कुछ देर बाद, जब उनकी साँसें सामान्य हुईं, तो विकास जीजू ने रिया को अपनी बाहों में कस लिया। रिया ने अपना सिर उनके सीने पर रख दिया। बाहर चाँदनी अभी भी खिड़की से झाँक रही थी। दोनों जानते थे कि ये उनकी एक रात की कहानी नहीं थी, ये उनकी दबी हुई हसरतों की शुरुआत थी। ये **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** अब उनकी नसों में खून की तरह दौड़ रहा था, और उन्हें पता था कि वे बार-बार इस आग में जलने के लिए तैयार थे, चुपके से, दुनिया की नज़रों से दूर। उनके बीच की ये मीठी, हसीन चोरी अब उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ और सबसे बड़ा सुख बनने वाली थी।
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