साली जीजा का चोरी छिपे प्यार: देह की प्यास, रात का आँचल

गाँव की उमस भरी रात में, जब सारी दुनिया नींद की आगोश में थी, प्रिया का बदन राजेश की आँखों में आग लगा रहा था। उसकी बड़ी बहन, यानी राजेश की पत्नी, एक रिश्तेदारी में गई हुई थी, और यही मौका था जब उनके बीच का यह वर्जित आकर्षण अपनी सारी हदें तोड़ने पर आमादा था। प्रिया, अपनी जवानी की दहलीज पर खड़ी, अभी-अभी नहाकर निकली थी। गीले बाल उसके कंधों पर बिखरे थे और पतली सूती साड़ी में से उसके सुडौल वक्र साफ झलक रहे थे। राजेश अपने कमरे के दरवाजे पर खड़ा था, उसकी आँखें प्रिया के गीले बदन पर थमी थीं।

“जीजा जी, आप अभी तक जागे हैं?” प्रिया की आवाज़ में शरारत और हल्का डर दोनों घुले थे।

राजेश की आवाज़ भारी हो गई, “नींद कहाँ है प्रिया? इस गर्मी में तो रातें और लंबी लगती हैं।” उसकी नज़रें प्रिया के भीगे अधरों पर टिक गईं।

प्रिया ने अपनी पलकें झुका लीं, लेकिन उसके चेहरे पर एक मदहोश मुस्कान तैर गई। वह जानती थी कि उसके जीजा की आँखों में क्या प्यास थी, और उसके अपने भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी उठ रही थी। दोनों ही जानते थे कि उनके बीच यह साली जीजा का चोरी छिपे प्यार कब से पनप रहा था, बस आज उसे अंजाम तक पहुँचाने का वक्त आया था।

बिना कुछ कहे, राजेश ने धीरे से प्रिया का हाथ पकड़ा। उसकी उँगलियों का स्पर्श पाते ही प्रिया के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। वह धीरे-धीरे राजेश के कमरे में खींचती चली गई, जैसे कोई सम्मोहित हो। कमरा अँधेरे में डूबा था, बस खिड़की से आती चाँदनी की एक पतली सी किरण उनके शरीरों को धुंधला रोशन कर रही थी। राजेश ने दरवाज़ा बंद कर दिया और प्रिया को अपनी बाहों में भर लिया।

उनका पहला चुम्बन गहरा, भूखा और वर्जित था। प्रिया के कोमल होंठ राजेश के कठोर अधरों में ऐसे समा गए, जैसे वे सदियों से एक-दूसरे का इंतज़ार कर रहे हों। राजेश की ज़बान ने प्रिया के मुँह के हर कोने को टटोला, और प्रिया ने भी उतनी ही शिद्दत से जवाब दिया। उसकी साड़ी का पल्लू कब सरक कर ज़मीन पर गिरा, उन्हें पता ही नहीं चला। राजेश के हाथों ने प्रिया की कमर को जकड़ा और उसे और करीब खींच लिया, ताकि उनके बदन के हर मोड़ एक-दूसरे से चिपक जाएँ।

राजेश ने प्रिया को उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके हाथ प्रिया के बदन पर बेफिक्र घूमने लगे, उसकी पतली कमर, मुलायम पेट और फिर उसकी भरी हुई छातियों पर जा टिके। प्रिया ने एक आह भरी और अपने जीजा के माथे को सहलाने लगी। राजेश ने उसकी साड़ी पूरी तरह से उतार दी और फिर पेटीकोट और ब्लाउज भी। प्रिया का नग्न, दूधिया बदन चाँदनी में चमक रहा था, हर साँस के साथ उसकी छातियाँ ऊपर-नीचे हो रही थीं। राजेश का हाथ उसकी जांघों पर फिरा और फिर उसकी कामुकता के केंद्र तक पहुँच गया, जहाँ वह पहले से ही गीली और आतुर थी।

“अहहह… जीजा जी…” प्रिया के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थीं।

राजेश ने अपने कपड़े भी उतार फेंके। अब दोनों पूरी तरह से नग्न थे, एक-दूसरे की वासना की आग में जल रहे थे। राजेश ने प्रिया की जांघों को फैलाया और धीरे-धीरे उसके भीतर उतरने लगा। पहली बार का दर्द मीठी चीख में बदल गया, जैसे ही उसके बदन ने राजेश की मर्दानगी को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। उनके बीच यह साली जीजा का चोरी छिपे प्यार अब अपनी सबसे गहरी और नग्न अवस्था में था।

उनके जिस्म एक-दूसरे में खो गए। बिस्तर की चरमराहट, उनकी तीव्र साँसें और प्रिया की कामुक आहें अँधेरे कमरे में गूँज रही थीं। राजेश की हर धमक प्रिया को और गहरे सुख में डुबो रही थी, और वह भी अपनी कमर उठाकर राजेश का पूरा साथ दे रही थी। वह अपनी आँखों में नशे की चमक लिए, सिर्फ राजेश को देख रही थी। उनका मिलन तीव्र था, वासना से भरा, और एक ऐसी संतुष्टि से पूर्ण था जिसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी। जब उनका चरम सुख आया, तो दोनों के बदन एक साथ काँपे और उनकी आत्माएँ एक-दूसरे में विलीन हो गईं। वे एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनकी साँसें तेज़ थीं, और उनके बदन की गर्मी एक-दूसरे को महसूस हो रही थी। उस रात, चाँदनी की हल्की रोशनी में, साली और जीजा का यह चोरी छिपे प्यार देह की हर सीमा को तोड़ चुका था। उनके बदन शांत थे, लेकिन उनकी आत्माएँ एक गहरे, वर्जित सुख में लिप्त थीं।

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