सुनील की आँखों में एक अजीब सी आग थी, जब राधा रसोई से निकलकर उसके सामने आई। उसकी पतली साड़ी से झाँकता उसका कसदार पेट और भरी हुई छातियाँ सुनील के मन में हिलोरे पैदा कर रही थीं। आज उसकी पत्नी घर पर नहीं थी, और यह अकेलापन सुनील को बहुत सता रहा था। राधा की उम्र बमुश्किल बाईस साल थी, और उसकी जवानी पूरे शबाब पर थी।
“जीजा जी, क्या देख रहे हैं?” राधा ने शरमाते हुए पूछा, लेकिन उसकी आँखों में भी एक अलग चमक थी। उसे पता था कि सुनील उसे किस नजर से देखता है। उनके बीच यह **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** कब शुरू हुआ, सुनील को याद नहीं। शायद तब, जब राधा पहली बार अपनी बहन के घर रहने आई थी और सुनील ने उसकी भरी जवानी देखी थी।
सुनील ने गहरी साँस ली, “कुछ नहीं, बस यूँ ही।” वह उठा और राधा के पास आया। उसकी साँसों की गर्मी राधा के गालों पर महसूस होने लगी। राधा का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसे पता था कि आज कुछ होने वाला है, जिसे वे दोनों कई दिनों से दबाए बैठे थे। सुनील का हाथ धीरे से राधा की कमर पर सरका। राधा के जिस्म में बिजली सी दौड़ गई। वह काँप उठी, लेकिन हटी नहीं। उसकी आँखें सुनील की आँखों से मिलीं, और उन दोनों में एक अनकही सहमति थी।
“राधा,” सुनील की आवाज भारी हो गई। उसने राधा को अपनी ओर खींचा। राधा का नरम जिस्म सुनील के मजबूत जिस्म से टकराया। उसने अपने होंठ राधा के नरम, गुलाब जैसे होंठों पर रख दिए। राधा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और सुनील के होंठों को ऐसे चूसने लगी, जैसे बरसों से प्यासी हो। उनकी जीभें एक-दूसरे में उलझ गईं, और उनके मुँह से सिसकारियों की धीमी आवाजें निकलने लगीं।
सुनील के हाथ राधा की साड़ी के पल्लू को हटाते हुए, उसके गर्म, कोमल पेट पर घूमने लगे। राधा ने एक आह भरी और अपनी उंगलियों से सुनील के बालों को सहलाने लगी। सुनील ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़ा। राधा ने अपनी टाँगें सुनील की कमर में कस लीं, और उसके होंठों को और भी जोश से चूसने लगी।
बेडरूम में पहुँचकर, सुनील ने राधा को धीरे से बिस्तर पर लिटाया। उसके हाथ तेजी से राधा की साड़ी खोलने लगे। साड़ी का एक-एक तार उतरते ही राधा का बदन सुनील की आँखों के सामने उभर आया। उसकी गुलाबी ब्रा में कसे उसके सुडौल स्तन और काली पैंटी में छुपा उसका गुप्त अंग, सुनील को दीवाना बना रहे थे। राधा की आँखों में वासना की आग साफ दिख रही थी।
“सुनील,” राधा ने दबी हुई आवाज में कहा। सुनील ने उसके ब्रा के हुक खोले, और राधा के स्तन आजाद होकर हवा में लहराने लगे। सुनील ने झुककर उसके एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे जोर से चूसने लगा। राधा के मुँह से दर्द और आनंद की चीख निकली। उसकी उंगलियाँ सुनील के बालों को कसकर पकड़ने लगीं। सुनील ने उसके दूसरे स्तन को भी ऐसे ही चूसा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता हो।
फिर सुनील की नजर उसकी पैंटी पर गई, जो उसके उभार को छिपा रही थी। उसने तेजी से उसे भी उतार फेंका। राधा का कामुक अंग, गुलाबी और चिकना, सुनील के सामने खुल गया। सुनील ने एक पल भी इंतजार नहीं किया, और अपने कपड़ों से खुद को आजाद कर लिया। **यह साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** था, जो अब अपनी सारी मर्यादाएं तोड़ चुका था।
सुनील ने अपने गर्म, सख्त लिंग को राधा के गीले अंग पर रखा। राधा ने अपनी टाँगें चौड़ी कर लीं और सुनील को अंदर आने का इशारा किया। सुनील ने एक झटके में खुद को राधा के अंदर उतार दिया। राधा के मुँह से एक तीव्र चीख निकली, और उसके नाखून सुनील की पीठ पर गड़ गए। सुनील ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। उनकी साँसें तेज हो रही थीं, और उनके जिस्म पसीने से भीग रहे थे। बिस्तर की चरमराहट और उनके मिलन की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।
राधा हर धक्के के साथ “और तेज जीजा जी” कहती जा रही थी। सुनील ने उसकी कमर पकड़ी और अपनी गति बढ़ा दी। वे दोनों वासना के ज्वार में बह रहे थे। कुछ देर बाद, दोनों का जिस्म एक तीव्र आनंद के साथ थरथरा उठा, और वे एक-दूसरे में समा गए।
थके-हारे वे एक-दूसरे से लिपटे रहे। आज रात उनके **साली जीजा का चोरी छिपे प्यार** ने एक ऐसी गहराई छू ली थी, जिससे वापस लौटना मुश्किल था। सुनील ने राधा के माथे पर एक चूमा लिया। राधा ने सुनील के सीने पर अपना सिर रखा और एक गहरी साँस ली। “जीजा जी,” उसने फुसफुसाया, “यह सिर्फ एक रात नहीं है।” सुनील मुस्कुराया, जानता था कि अब उनकी यह चोरी छिपे मोहब्बत और भी गहरे रास्ते पर जा चुकी थी।
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