देवर-भाभी का गुप्त मिलन: शादी के बाद भी जारी इश्क

उसकी साड़ी का पल्लू सरकते ही, राहुल की साँसें तेज़ हो गईं, और निगाहें सीधी प्रिया की उभारों पर जा टिकीं। संगीत की रात थी, घर रिश्तेदारों से खचाखच भरा था, और ढोलक की थाप पर औरतें नाच रही थीं। प्रिया, उसकी भाभी, लाल बनारसी साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी, हर चाल में एक मादक नज़ाकत थी। राहुल की छाती में एक अजीब सी तड़प उठ रही थी। वह जानता था कि यह गलत है, पर प्रिया की हर अदा उसे बरसों पुरानी यादों और एक अनबुझी चाहत की ओर खींच रही थी। सुरेश, राहुल का बड़ा भाई और प्रिया का पति, मेहमानों से बातचीत में व्यस्त था, पूरी तरह बेखबर कि उसकी ही आँखों के सामने क्या खेल चल रहा है।

प्रिया ने पल भर के लिए राहुल की ओर देखा, उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जिसे प्रिया बखूबी पहचानती थी। उसकी भी धड़कनें तेज़ हो गईं। प्रिया जानती थी, सुरेश से शादी के बाद भी, राहुल के लिए उसके दिल में एक खास जगह थी, एक ऐसा **शादी के बाद भी जारी इश्क** जिसे वो चाहकर भी नहीं मिटा पाई थी। उनकी आँखें मिलीं और उस पल में सारी दुनिया मानो थम सी गई। राहुल ने सिर से इशारा किया, उस पुराने स्टोररूम की तरफ, जो घर के कोने में अंधेरा और धूल-भरा पड़ा था। प्रिया समझ गई। एक बहाना बनाकर, कि उसे अपने झुमके वहीं कहीं याद आ रहे हैं, वह धीरे से भीड़ से अलग हो गई। राहुल कुछ देर बाद, किसी और चीज़ को ढूंढने का नाटक करते हुए, उसके पीछे चल पड़ा।

स्टोररूम का दरवाज़ा अंदर से बंद होते ही, बाहर का शोर एकदम से मद्धम पड़ गया, और अंदर की हवा में एक अजीब सी बेचैनी घुल गई। अँधेरा इतना घना था कि बस एक-दूसरे की साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। राहुल ने पल भर भी इंतज़ार नहीं किया। उसने तेज़ी से प्रिया को अपनी बाहों में खींच लिया। प्रिया ने भी बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को उसके हवाले कर दिया। उनके होंठ एक-दूसरे पर टूट पड़े, एक गहरी, उन्माद भरी चुंबन में। बरसों की प्यास, बरसों का इंतज़ार, उस एक पल में टूट रहा था। राहुल के हाथ उसकी कमर पर कस गए, और प्रिया की उंगलियाँ उसके घने बालों में उलझ गईं।

राहुल ने झटके से उसकी साड़ी का पल्लू खींचा और फिर ब्लाउज के हुक खोलने लगा। रेशम सरका और प्रिया के भरे हुए स्तन आज़ाद हो गए, गहरे साँवले निप्पल राहुल के स्पर्श का इंतज़ार कर रहे थे। राहुल ने एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया, उसे चूसते हुए, जबकि उसका दूसरा हाथ दूसरे स्तन को सहला रहा था। प्रिया के मुँह से सिसकारियाँ निकल गईं, उसकी पीठ पर राहुल के नाखूनों के निशान गहरे हो गए। उसकी उंगलियाँ तुरंत उसकी कमर से होती हुई पेटीकोट के अंदर सरक गईं, और फिर उसकी गरम, भीगी पैंटी के ऊपर से उसकी योनि को सहलाने लगी। प्रिया की देह थरथरा उठी।

राहुल ने उसे उठाकर स्टोररूम के एक पुराने बॉक्स पर बिठा दिया, और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। पैंटी को नीचे खिसकाते ही, प्रिया की गुलाबी पंखुड़ियाँ राहुल के सामने थीं, जो वासना से फूलकर नम हो चुकी थीं। राहुल ने एक गहरी साँस ली और अपनी ज़बान से उसे सहलाने लगा। प्रिया की देह में एक ज़ोरदार झटका लगा, उसकी साँसें तेज़ हो गईं, और उसने राहुल का सिर अपनी ओर और कस लिया। “आहह्ह… राहुल… बस… अब और नहीं रुका जाता…”

राहुल ने अपनी पैंट खोली और प्रिया को फिर से खड़ा किया। प्रिया ने उसकी कमर पर अपनी टाँगें लपेट लीं, और राहुल ने उसे अपनी बाहों में कसकर उठाया। एक ही झटके में उसने प्रिया को खुद से जोड़ लिया। प्रिया के मुँह से एक मदहोश चीख निकल गई, और उसने राहुल के कंधों पर अपने नाखून गड़ा दिए। “धीरे… राहुल… आआहह्ह…!”

अँधेरे और चोरी के इस पल में, राहुल ने प्रिया को पूरी तरह अपनी बाहों में भर लिया, हर चुंबन, हर स्पर्श चीख रहा था कि **शादी के बाद भी जारी इश्क** कितना नशीला हो सकता है। दोनों के शरीर एक-दूसरे में पिरोए हुए थे, पसीना, साँसें और वासना एक होकर गूँज रही थी। राहुल की हर धक्के के साथ, प्रिया अंदर तक हिल रही थी, उसकी आँखे बंद थीं और उसके होंठों से सिर्फ़ राहुल का नाम निकल रहा था। वह उसे खुद में पूरी तरह समा लेना चाहती थी, इस चोरी के सुख को अपनी आत्मा में उतार लेना चाहती थी। कुछ पल बाद, एक तीव्र, मीठी लहर के साथ, दोनों एक साथ चरम सुख में डूब गए। प्रिया ने अपनी टाँगें उसकी कमर पर कस लीं, उसे और गहरा भीतर खींचती हुई। हर धक्के के साथ एक मीठी पीड़ा और आनंद की लहरें उसके पूरे शरीर में दौड़ रही थी।

दोनों एक-दूसरे में खोए, हाँफते हुए पड़े रहे, उनके शरीर अभी भी एक-दूसरे की गर्मी से लिपटे थे। बाहर संगीत का शोर और रिश्तेदारों की आवाज़ें फिर से सुनाई देने लगी थीं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। उन्होंने धीरे से कपड़े ठीक किए, होठों पर एक आख़िरी, चोरी की चुंबन दी। राहुल ने दरवाज़ा खोला और प्रिया भीड़ में वापिस शामिल हो गई, उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और एक गुप्त मुस्कान थी। यह सिर्फ एक चोरी का पल नहीं था, यह उनकी सच्चाई थी, एक ऐसा सच जो **शादी के बाद भी जारी इश्क** को हर जोखिम के बावजूद जिंदा रखेगा।

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