उसकी आँखें उस रात बस उसी एक लम्हे का इंतज़ार कर रही थीं, जब विक्रम दरवाज़े से भीतर आएगा और कमरे की हवा में एक अनकही बेचैनी घुल जाएगी। रिया ने अपनी पतली सी साड़ी हटाकर रेशमी नाइटगाउन पहना था, जो उसके जिस्म के हर उभार को ललचाता हुआ दर्शा रहा था। रात के गहरे सन्नाटे में, सिर्फ पंखे की धीमी आवाज़ और उसकी धड़कनों की तेज़ रफ़्तार ही सुनाई दे रही थी। घड़ी ने जैसे ही ग्यारह बजाए, दरवाज़ा खुलने की हल्की सी आवाज़ हुई। विक्रम थका हुआ सा भीतर आया, पर जैसे ही उसकी नज़र रिया पर पड़ी, उसकी आँखों की थकान पल भर में गायब हो गई। उसकी आँखों में वही पुरानी, चिर-परिचित चमक थी, जो शादी से पहले उसे दीवाना बना देती थी।
“इंतज़ार कर रही थी?” विक्रम ने धीमी, भरी हुई आवाज़ में पूछा।
रिया ने सिर्फ मुस्कुरा कर पलकें झुकाईं। विक्रम ने दरवाज़ा बंद कर दिया और बिना कुछ कहे उसकी ओर बढ़ा। उसके हर कदम में एक भूखापन था, एक ऐसी प्यास जो सालों से बुझी नहीं थी, बल्कि हर रात और प्रबल हो उठती थी। जैसे ही वह करीब आया, रिया ने अपनी बाहें उसकी गर्दन में डाल दीं और विक्रम ने उसे अपनी मज़बूत बाहों में कस लिया। उनके होंठ मिले, और उस पल कमरे में जैसे सदियों पुराना जुनून उमड़ पड़ा। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, यह दो प्यासी रूहों का मिलन था, जो एक-दूसरे में खो जाने को बेताब थीं। उनकी जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं, हर साँस में एक मीठी तड़प थी।
विक्रम के हाथ उसके नाइटगाउन पर सरकने लगे, धीरे-धीरे उसकी कमर से होते हुए उसकी खुली पीठ पर पहुँचे। उसकी उंगलियों का स्पर्श रिया के जिस्म में एक सिहरन पैदा कर रहा था। नाइटगाउन कब ज़मीन पर गिरा, उन्हें पता ही नहीं चला। रिया का नरम, गर्माहट भरा जिस्म अब उसके सामने था, सिर्फ चाँदनी की हल्की रौशनी में चमकता हुआ। विक्रम ने अपने होंठ उसकी गर्दन पर उतारे, और रिया की साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे-धीरे उसे बिस्तर पर धकेला, और उसके ऊपर झुक गया। उसके भारी जिस्म का वज़न रिया को एक अजीब सा सुख दे रहा था। उसके होंठ अब रिया के स्तनों पर थे, उन्हें चूसते हुए, नोंचते हुए। रिया के मुँह से दर्द भरी सिसकियाँ निकल रही थीं, पर यह दर्द उसे और गहरे सुख की ओर खींच रहा था।
लोग कहते थे शादी के बाद सब कुछ बदल जाता है, पर रिया और विक्रम के लिए उनका **शादी के बाद भी जारी इश्क** हर दिन और गहरा होता जा रहा था। उनका प्रेम सिर्फ भावनाओं का नहीं, बल्कि जिस्मों की बेकाबू भूख का भी था। विक्रम नीचे सरका, उसके पेट पर, उसकी जाँघों के भीतर, हर स्पर्श रिया को उन्माद की नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा था। रिया ने अपनी जाँघें फैला दीं, उसे अपने भीतर समाने को बेताब। उसकी उंगलियाँ विक्रम के बालों में उलझ गईं। “और… और तेज़…” उसने हाँफते हुए कहा।
विक्रम ने एक गहरी साँस ली और रिया के भीतर उतर गया। एक चीत्कार रिया के मुँह से निकली, पर वह तुरंत ही एक सुखद आह में बदल गई। दोनों के जिस्म एक-दूसरे में पिरोए गए थे, जैसे दो आत्माएँ एक हो रही हों। विक्रम ने अपनी कमर हिलाई, और हर धक्के के साथ रिया हवा में ऊपर उठ रही थी, फिर नीचे आ गिरती। दोनों के माथों पर पसीना चमक रहा था, उनके शरीर की गंध कमरे में फैल चुकी थी। रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उसके जिस्म की हर कोशिका सिर्फ विक्रम को महसूस करना चाहती थी। “आह… विक्रम… हाँ…” उसकी सिसकियाँ, विक्रम के ज़ोरदार धक्के, और बिस्तर की चरमराती आवाज़… सब मिलकर एक कामुक धुन बना रहे थे। हर आह, हर सिसकी में उन्हें महसूस होता था कि उनका यह **शादी के बाद भी जारी इश्क** कितनी पवित्र और बेकाबू आग थी।
कुछ ही देर में, रिया के जिस्म में एक तेज़ कँपकँपी उठी। वह काँपने लगी, उसकी रीढ़ की हड्डी में एक तीव्र सुखद लहर दौड़ गई। “मैं… आ…” उसके मुँह से बस इतना ही निकल पाया, और वह चरम सुख के अथाह सागर में डूब गई। विक्रम ने भी कुछ ही पलों में उसके भीतर अपना सारा प्रेम उड़ेल दिया, उसके ऊपर निढाल होकर गिर गया।
दोनों पसीने में लथपथ, एक-दूसरे से चिपके हुए लेटे थे। रिया ने विक्रम के बालों में अपनी उंगलियाँ फेरी। उनकी साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं, पर अब उनमें एक शांति थी, एक संतुष्टि थी। उनका प्रेम सिर्फ बिस्तर तक सीमित नहीं था, यह उनके हर पल में था, उनकी हर बात में था, उनकी हर मुस्कुराहट में था। दोनों जानते थे कि उनका यह गहरा, बेबाक इश्क़, उनका यह **शादी के बाद भी जारी इश्क**, जीवन भर ऐसे ही धधकता रहेगा, हर रात उन्हें एक-दूसरे में खो जाने का मौका देता रहेगा। और इसी सोच के साथ, रिया ने विक्रम को और कस कर अपनी बाहों में भर लिया, अगली रात के इंतज़ार में।
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