उसकी हर छुअन में पिघलती रातें: शादी के बाद भी जारी इश्क

आधी रात की खामोशी में, प्रिया की साँसें तेज़ हो रही थीं, जैसे कोई अनकहा तूफ़ान भीतर ही भीतर उमड़ रहा हो। उसकी आँखें खिड़की पर टिकी थीं, जहाँ से चाँदनी का एक पतला धागा कमरे में झाँक रहा था, ठीक उसी तरह जैसे उसकी आत्मा में आर्यन की यादें। आज फिर राजेश शहर से बाहर था, और यही वह पल था जिसका इंतजार प्रिया दिन-रात करती थी।

तभी बालकनी की जाली पर एक हल्की-सी खटखटाहट हुई। प्रिया के होठों पर एक शरारती मुस्कान फैल गई। यह आर्यन था। उसने दबे पाँव दरवाज़ा खोला और आर्यन अंदर सरक आया, उसकी बाहों में प्रिया तुरंत समा गई। उनकी साँसें एक-दूसरे से टकराईं, एक मीठी, मदहोश कर देने वाली खुशबू उनके चारों ओर फैल गई। आर्यन ने प्रिया के चेहरे को अपने हाथों में लिया, उसकी आँखों में वह पुरानी, जानी-पहचानी प्यास साफ झलक रही थी – वह प्यास जो शादी के बाद भी जारी इश्क की गवाही दे रही थी।

“इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा था,” आर्यन ने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ में एक अजीब-सा कम्पन था। प्रिया ने उसके कंधे पर अपना सिर रख दिया, उसकी उँगलियाँ आर्यन की टी-शर्ट के रेशों में उलझ गईं। “तुम्हारे बिना एक पल भी नहीं कटता,” प्रिया ने जवाब दिया, उसकी आवाज़ में भीगापन था। आर्यन ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसे अपनी तरफ खींचा। प्रिया की साड़ी का पल्लू सरक गया, और आर्यन की उंगलियाँ उसकी नग्न पीठ पर धीरे से फिरने लगीं। प्रिया सिहर उठी, उसका शरीर एक अनजानी आग में जलने लगा।

आर्यन ने उसे धीरे से बेड की तरफ धकेला, उनके होंठ आपस में मिल गए। यह कोई सामान्य चुम्बन नहीं था; यह भूख, प्यास, और उस हर वर्जित इच्छा का संगम था जो उनके अंदर धधक रही थी। प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके मन में बस आर्यन की छुअन, उसका स्वाद समा गया। आर्यन के हाथ उसके शरीर पर तेज़ी से चलने लगे, पहले साड़ी की परतें हटाईं, फिर ब्लाउज़ के हुक खोले। प्रिया ने भी बिना देर किए आर्यन की टी-शर्ट उतार फेंकी। उनके शरीर एक-दूसरे के सामने आ गए, चाँदनी की हल्की रोशनी में उनकी त्वचा चमक रही थी।

आर्यन की उँगलियाँ प्रिया की ब्रा-स्ट्रैप पर टिकीं, और उसने एक झटके में उसे उतार फेंका। प्रिया के सुडौल वक्ष आर्यन के सामने थे, जो अब उसकी उँगलियों और होठों के शिकार बनने को बेताब थे। आर्यन ने झुककर उन्हें अपने मुँह में भर लिया, और प्रिया की जुबान से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। वह उसके बालों को कसकर पकड़ रही थी, हर चुम्बन, हर दंश उसे नई गहराइयों में ले जा रहा था। उसे लगा जैसे उसका शरीर आग का एक दरिया बन गया हो, जिसमें आर्यन की हर छुअन चिंगारी का काम कर रही थी।

“आर्यन…” प्रिया ने हाँफते हुए कहा, उसका शरीर अब पूरी तरह से उसकी गिरफ्त में था। आर्यन ने धीरे से प्रिया की पैंटी हटाई, उसकी आँखें प्रिया की मदहोश आँखों से मिलीं। वह जानता था कि इस क्षण में, कोई और सच नहीं था। सिर्फ वे दोनों, और यह शादी के बाद भी जारी इश्क, जो उनके बीच एक अटूट बंधन बन चुका था। आर्यन ने अपने शरीर को प्रिया के ऊपर झुकाया, और एक गहरे चुम्बन के साथ, वे दोनों एक हो गए।

कमरे में सिर्फ उनकी साँसों और देह के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं। प्रिया अपनी कमर उठा-उठाकर आर्यन का साथ दे रही थी, उसकी आँखें बंद थीं, होंठों पर एक दर्द भरी मुस्कान। हर धक्के के साथ एक नई लहर उठती थी, जो उन्हें चरम आनंद की ओर ले जा रही थी। प्रिया को लगा जैसे उसकी आत्मा शरीर से निकलकर आर्यन में समा गई हो। उसकी हर नस में बिजली दौड़ रही थी, और वह बस इस सुखद पीड़ा में खो जाना चाहती थी।

जब उनकी साँसें थमीं और शरीर शांत हुए, वे एक-दूसरे से लिपटे रहे। प्रिया ने आर्यन के सीने पर अपना सिर रख दिया, उसकी धड़कनें अब भी तेज़ थीं। यह सिर्फ एक रात नहीं थी; यह उनके अनकहे वादों, उनकी छिपी हुई चाहतों और उस आग की एक और पुष्टि थी, जो उन दोनों के बीच शादी के बाद भी जारी इश्क को हमेशा ज़िंदा रखती थी। प्रिया ने एक गहरी साँस ली, उसके होठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। अगली मुलाकात तक यह यादें ही उसका सहारा थीं, एक ऐसा मीठा अपराध जिसका अंत वे कभी नहीं चाहते थे।

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