गैर पति के साथ… शादी के बाद भी जारी इश्क की अनबुझी लपटें

उसकी साड़ी का पल्लू सरका और मेरी नज़रों में सीधा वो अदम्य उभार आ गया जो मेरे पूरे वजूद को अपनी गिरफ्त में ले लेता था। सीमा, मेरे सामने खड़ी, उसके गालों पर गुलाबी रंग और आँखों में वही बेबाक आमंत्रण, जो उसके पति आलोक के घर की दीवारों के पीछे अक्सर दबा रहता था। हम रोहन के फ्लैट पर थे, जहाँ हमारे प्यार की गुप्त दुनिया थी। दोपहर की गहरी शांति में, बस हमारी साँसों की गरमाहट महसूस हो रही थी।

“आज तुम और भी हसीन लग रही हो, मेरी जान,” मैंने उसके कान के पास फुसफुसाया, मेरी उँगलियाँ उसकी कमर पर कस गईं। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से गिरा दिया। उसकी भूरी त्वचा पर हल्के पसीने की चमक, उसकी ब्लाउज के भीतर कसकर क़ैद उसके भरे हुए स्तन, सब कुछ मुझे अपनी ओर खींच रहा था। यह शादी के बाद भी जारी इश्क एक ऐसा नशा था जिससे हम दोनों निकलना ही नहीं चाहते थे।

मैंने धीरे से उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसे अपनी ओर खींचा। उसके अधरों पर मेरे अधर ऐसे झुके, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को बेताब हों। हमारी जीभ एक दूसरे से लिपट गईं, एक गहरी, कामुक चुंबन में खो गईं। उसके हाथ मेरी गर्दन के चारों ओर कस गए, और उसने पूरी ताकत से मुझे अपनी ओर खींचा। मेरे हाथों ने उसकी ब्लाउज के हुक खोले, और मैंने झटके से उसे उतार फेंका। उसके नग्न वक्ष मेरे सामने उभर आए, गुलाबी निप्पल मेरे स्पर्श के लिए आतुर।

मैंने उसे गोद में उठाया और सीधे बेडरूम की ओर बढ़ा, जहाँ हमारे जुनून का बिस्तर इंतज़ार कर रहा था। नर्म गद्दे पर गिरते ही, उसके होठों से एक हल्की सिसक निकल गई। मैंने उसके स्तनों को अपने मुँह में भरा, एक के बाद एक, और मेरी जीभ उसकी संवेदनशीलता को टटोलने लगी। उसकी आहें पूरे कमरे में गूँजने लगीं। उसने मेरी शर्ट उतार फेंकी, और मेरे सीने को अपने नाखूनों से खरोंचा, जिससे मेरी उत्तेजना और बढ़ गई।

धीरे-धीरे, हमने एक-दूसरे के कपड़ों को उतारा, जब तक कि हम पूरी तरह नग्न नहीं हो गए। उसकी देह का हर इंच, हर उभार, हर वक्र मुझे अपनी ओर खींच रहा था। मेरी उँगलियाँ उसकी जंघाओं के बीच जा पहुँचीं, जहाँ पहले से ही नमी महसूस हो रही थी। वह पूरी तरह तैयार थी। मैंने अपनी पैंट हटाई और उसे धीरे से बिस्तर पर लेटाया। उसने अपनी टांगें चौड़ी कीं, उसकी आँखें वासना से भरी हुई थीं।

“रोहन… अब और नहीं रुका जाता,” उसने बेताबी से कहा। मैंने धीरे-धीरे खुद को उसके भीतर उतारा। पहली धमक के साथ ही उसके मुँह से एक तीव्र चीख निकली। उसकी आँखों में खुशी और दर्द का अनोखा संगम था। मैंने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई, और हमारा शरीर एक लय में धड़कने लगा। हमारी साँसें एक-दूसरे में घुलमिल गईं, और बिस्तर की हर चरमराहट हमारे जुनून की गवाही दे रही थी। वह अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, हर धक्के के साथ गहराई में उतरना चाहती थी। हमारी हर हरकत, हर स्पर्श, हमारे इस शादी के बाद भी जारी इश्क को एक नई पहचान दे रहा था।

जब हम दोनों चरम पर पहुँचे, तो हमारी देहें एक-दूसरे में गड़ी हुई थीं, पसीने से तर। उसकी चीखें और मेरी गहरी आहें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। हमने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया, जैसे हमारा यह मिलन ही दुनिया की सबसे सच्ची चीज़ हो। थोड़ी देर बाद, जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो हम एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। सीमा ने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया। उसकी नम आँखें मेरे चेहरे पर थीं।

“हमें फिर मिलना होगा, रोहन,” उसने धीरे से कहा, “जल्द से जल्द।” मैंने उसकी लटों को सहलाया और उसके माथे पर चूमा। मुझे पता था कि आलोक उसका पति था, लेकिन सीमा का दिल और देह अब मेरे थे। हमारा यह शादी के बाद भी जारी इश्क एक गुप्त अग्नि था, जो हमें हमेशा जलाता रहेगा। और हम दोनों, इस आग में जलने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

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