हवा में शादी की खुशबू थी, और उस खुशबू से भी कहीं ज़्यादा मदहोश करने वाली थी रश्मि की साँसों की गर्माहट, जो अमित की गर्दन पर पड़ रही थी। कल उनकी शादी थी, और आज रात वे अमित के पुश्तैनी घर के एक सुनसान कमरे में, एक-दूसरे की बाहों में बंधे थे। बाहर पूरा घर सो रहा था, लेकिन उनके भीतर एक ऐसा तूफान उमड़ रहा था जिसे रोकना नामुमकिन था। यह सब **शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस** ही तो था, जिसका इंतज़ार उन्होंने सालों से किया था।
अमित के हाथों ने रश्मि की कमर को कसकर पकड़ा और उसे अपने और करीब खींच लिया। रश्मि के अधखुले होंठों से एक हल्की सी सिसकी निकली, जब अमित के गरम होंठ उसके नर्म होंठों से टकराए। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, यह प्यास थी, बरसों की चाहत थी जो आज रात बेकाबू हो रही थी। अमित की जीभ ने रश्मि के मुँह के हर कोने को टटोला, और रश्मि ने भी उतनी ही शिद्दत से उसका साथ दिया। उनकी साँसें तेज़ होने लगीं, और उनके दिल एक-दूसरे की धड़कनों में खो गए।
“रश्मि…” अमित की आवाज़ भारी थी, उत्तेजना से काँपती हुई।
“अमित…” रश्मि ने सिर्फ़ इतना ही कहा और उसकी उँगलियाँ अमित के बाल सहलाने लगीं।
अमित के हाथों ने रश्मि की साड़ी को धीरे-धीरे सरकाया। रेशमी कपड़ा जब रश्मि के जिस्म से अलग हुआ, तो अमित की आँखें एक पल के लिए ठहर गईं। उसने रश्मि के उभरे वक्ष को देखा, जो उसकी ब्रा के भीतर से भी बेहद आकर्षक लग रहे थे। एक भी पल की देरी किए बिना, अमित ने ब्रा का हुक खोला और रश्मि के गोरे, भरे हुए वक्ष उसकी आँखों के सामने आ गए। रश्मि शरम से अपनी आँखें बंद कर ली, लेकिन उसके जिस्म की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। अमित ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। रश्मि के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली, और उसने अमित के सिर को अपने वक्षों पर कसकर दबा लिया।
अमित ने बारी-बारी से दोनों वक्षों को चूसा, सहलाया, और चाटा, जिससे रश्मि का पूरा शरीर झनझनाने लगा। उसके काँपते हाथों ने अमित की कमीज़ के बटन खोले और उसे उतार दिया। अमित के बलिष्ठ शरीर पर उसकी उँगलियाँ फिरने लगीं। वे दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से खो चुके थे। उनके जिस्म एक-दूसरे में ऐसे खो गए थे, जैसे यह **शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस** कोई सदियों पुराना वादा निभा रहा हो।
अमित ने रश्मि की पेटीकोट और पैंटी को भी उतार फेंका, और अब वे दोनों पूरी तरह से नग्न थे। उनके गर्म जिस्म एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे, और हर रगड़ में उनकी प्यास और बढ़ती जा रही थी। अमित धीरे से रश्मि के ऊपर आया, और उसके पैरों के बीच अपनी जगह बनाई। रश्मि ने अपनी टाँगें ऊपर उठाईं और अमित को अपने भीतर समाने का इशारा किया।
“मैं अब और इंतज़ार नहीं कर सकता, रश्मि,” अमित ने फुसफुसाया।
“तो मत करो, अमित,” रश्मि ने भीगी आवाज़ में कहा।
एक गहरी साँस के साथ, अमित ने धीरे-धीरे अपने पुरुषत्व को रश्मि की योनि में उतारा। पहली बार की हल्की सी टीस रश्मि की आँखों में आँसू ले आई, लेकिन यह खुशी के आँसू थे। जैसे ही अमित का पूरा अंग उसके भीतर समाया, रश्मि के मुँह से एक सुखद चीख निकल गई। अमित ने कुछ पल के लिए खुद को वहीं रोके रखा, ताकि रश्मि सहज हो जाए। फिर, उसने अपनी गति बढ़ाई। धीमे-धीमे, फिर तेज़, उनकी धुन एक संगीत बन गई थी। बिस्तर की आवाज़, उनके जिस्मों की रगड़, और उनकी मीठी चीखें उस कमरे में गूँज रही थीं।
रश्मि अपनी कमर उठाकर अमित का पूरा साथ दे रही थी। उसके हर धक्के के साथ वह एक नए संसार में खो जाती। पसीना उनके जिस्मों पर मोतियों सा चमक रहा था। “और तेज़, अमित!” रश्मि ने लगभग चीखते हुए कहा। अमित ने अपनी गति और बढ़ा दी, और कुछ ही पल में वे दोनों चरम सुख की गहराइयों में डूब गए। रश्मि का शरीर अकड़ गया और उसकी योनि ने अमित को कसकर जकड़ लिया। अमित भी एक गहरी आह के साथ रश्मि के भीतर ही ढीला पड़ गया।
वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में निढाल पड़े रहे, उनकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। यह सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं था, यह उनकी आत्माओं का मिलन था। उनके बीच का यह **शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस** एक ऐसा अटूट बंधन बन चुका था, जिसकी नींव वासना और सच्चे प्यार से सींची गई थी। कल वे पति-पत्नी बनेंगे, लेकिन आज रात उन्होंने अपने रिश्ते को एक नई गहराई दे दी थी। अमित ने रश्मि के माथे को चूमा और वे दोनों एक-दूसरे के आगोश में, आने वाले कल के हसीन सपने देखते हुए सो गए।
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