रिया की खुली जुल्फों से आती चमेली की मदहोश कर देने वाली खुशबू ने अमन को बेकाबू कर दिया था, जैसे शादी की तारीख नजदीक आती, उनकी चाहत और गहरी होती जा रही थी। आज रिया अकेली घर पर थी, और अमन, शादी की तैयारियों का बहाना बनाकर, उसके कमरे में दाखिल हुआ था। दोपहर की शांत, उमस भरी गर्मी में उनके दिलों की धड़कनें तेज़ होती जा रही थीं। रिया अपने बिस्तर पर बैठी एक पत्रिका पलट रही थी, अमन को देखते ही उसकी आँखों में शरारत भरी चमक आ गई।
“अमन! तुम इतने चुपचाप क्यों हो?” रिया ने मुस्कुराते हुए पूछा, लेकिन उसकी आवाज़ में एक अजीब सी खामोशी थी। अमन ने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और रिया के पास आकर बैठ गया। उसके हाथ में पत्रिका थी, लेकिन उसका ध्यान रिया के गुलाबी होंठों और उसकी नीली साड़ी में छिपी curvas पर था। “कुछ नहीं, बस सोच रहा हूँ… कि हमारी शादी के बाद का हर दिन ऐसा ही मदहोश करने वाला होगा।” अमन ने फुसफुसाते हुए कहा, और रिया के गालों पर एक हल्की सी लाली दौड़ गई। उसकी साँसें तेज़ होने लगीं।
उनके होंठ एक-दूसरे की ओर खिंचते चले गए, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उन्हें करीब ला रही हो। पहला चुंबन मीठा था, फिर गहरा होता गया, वासना की एक ऐसी आग भड़की जिसने कमरे की सारी हवा को गरमा दिया। अमन के हाथ रिया की कमर पर कस गए, उसे अपनी ओर खींचते हुए। रिया की उँगलियाँ अमन के बालों में उलझ गईं, और वह पूरी तरह से खुद को उस पल के हवाले कर चुकी थी। उनकी आँखों में एक ही बात तैर रही थी – शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस, जिसे रोक पाना अब असंभव था।
अमन ने रिया को धीरे से बिस्तर पर धकेला, और उसके ऊपर झुक गया। उसके होंठ रिया की गर्दन पर उतर आए, हर स्पर्श में एक करंट सा दौड़ रहा था। रिया की आँखें बंद थीं, उसके जिस्म में एक अनोखी सिहरन दौड़ रही थी। उसने अपनी साड़ी का पल्लू खुद ही सरका दिया, और अमन की नज़रें उसकी नाभि पर टिक गईं, जो हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी। अमन के हाथों ने धीरे-धीरे रिया की साड़ी को उसके जिस्म से अलग करना शुरू किया, और हर एक परत हटने के साथ उनके बीच की दूरी कम होती जा रही थी। रिया ने अमन की शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, उसकी गर्म त्वचा पर हाथ फेरते हुए।
जब वे दोनों नग्न होकर एक-दूसरे के सामने थे, तो कमरे की हवा और भी घनी हो गई। रिया के भरे हुए स्तन अमन की आँखों के सामने थे, जिनके कड़े निप्पल उसे बुला रहे थे। अमन ने उन्हें अपने मुँह में भर लिया, और रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उसके हाथ अमन के मजबूत कंधों पर कस गए। अमन के होंठ उसके पेट से होते हुए उसकी जाँघों तक पहुँच गए, और रिया को लगा कि वह इस पल की गहराई में डूबती जा रही है। अमन का मर्दाना अंग अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था, और रिया को अपनी योनि पर उसका स्पर्श महसूस हुआ।
रिया ने अमन को अपनी ओर खींचा, “अब और इंतज़ार नहीं कर सकती अमन,” उसने काँपती हुई आवाज़ में फुसफुसाया। अमन ने उसकी बात सुनी और धीरे-धीरे अपने आप को उसमें समाहित करना शुरू किया। उनके जिस्मों का मिलन इतना गहरा और संतोषजनक था कि दोनों की आँखें बंद हो गईं। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के मिलने की आवाज़ और उनकी साँसों का शोर था। अमन की हर धकेल के साथ रिया एक नई दुनिया में पहुँच रही थी, जहाँ सिर्फ सुख और वासना थी। यह पल, यह शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस, उनकी ज़िंदगी का सबसे बेकाबू और यादगार पल बन रहा था।
जब अमन ने अपनी गति तेज़ की, रिया का जिस्म मचलने लगा। वह चीखी, “हाँ… हाँ अमन, और तेज़!” उसकी आवाज़ में दर्द और परम सुख का मिश्रण था। कुछ ही पल में, रिया के जिस्म में एक तीव्र लहर दौड़ी, और वह चरम-सुख तक पहुँच गई। अमन भी उसके साथ ही अपनी सारी उत्तेजना उसके भीतर खाली कर चुका था। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे के ऊपर निढाल पड़े थे, उनके जिस्म पसीने से भीगे हुए थे। आज उन्होंने शादी से पहले का गरमा गरम रोमांस पूरी शिद्दत से जी लिया था।
वे काफी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, खामोश, लेकिन उनके दिलों में एक-दूसरे के लिए प्रेम और वासना की गहराई पहले से कहीं ज़्यादा थी। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में देखा, और उन आँखों में भविष्य के कई ऐसे ही अनगिनत, गरमा गरम पलों की झलक थी। एक अनकही प्रतिज्ञा के साथ, उनके जिस्म और रूह एक-दूसरे में सिमट गए, अगले मिलन की मीठी तड़प लिए।
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