रीना का अकेलापन आज रात उसके बदन में आग बनकर सुलग रहा था, एक ऐसी आग जिसे सिर्फ़ एक मर्द का स्पर्श ही बुझा सकता था। गर्मी की उमस भरी रात थी और बिजली जाने से पंखा बंद पड़ गया था, जिससे हवा में एक अजीब सी उत्तेजना और बेचैनी घुल गई थी। साड़ी का पल्लू बार-बार सरक कर उसके भीगे कंधों से नीचे खिसक रहा था, और ब्लाउज के भीतर उसके स्तन पसीने से चिपचिपा रहे थे। सालों से अनछुई देह में एक अजीब सी कसक उठ रही थी, एक ऐसी प्यास जो भीतर से सब कुछ जलाए जा रही थी।
तभी दरवाज़े पर हल्की सी दस्तक हुई। रीना चौंकी। इस वक़्त कौन हो सकता है? उसने हिचकिचाते हुए दरवाज़ा खोला तो सामने नया पड़ोसी, रोहित खड़ा था। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो रीना के भीगे बदन पर टिक गई थी। रोहित ने बड़े शालीन ढंग से पूछा, “माफ़ करना रीना जी, क्या आपके पास मोमबत्ती या तेल का दिया मिल सकता है? मेरे यहाँ भी बिजली नहीं है और मैं अभी नया आया हूँ, कुछ भी नहीं है।”
रीना के होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई। उसने कहा, “हाँ, आइए अंदर। मैं अभी देखती हूँ।” रोहित अंदर आया, उसकी मर्दाना खुशबू रीना की साँसों में घुलने लगी। रीना जब दिया ढूंढ रही थी, तो उसे महसूस हुआ कि रोहित की निगाहें उसके हर उतार-चढ़ाव पर टिकी हैं। उसका दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। जैसे ही वो पलटी, रोहित ठीक उसके पीछे खड़ा था। उनके बदन लगभग छू रहे थे। रोहित ने धीमे से कहा, “आप बहुत खूबसूरत हैं, रीना जी।”
रीना की आँखों में एक अजीब सी चमक आई। उसकी बरसों की प्यास, जैसे किसी झरने को देख कर और बढ़ गई थी। उसने खुद को संयत करने की कोशिश की, पर रोहित का हाथ उसकी कमर पर चला गया, जो पसीने से भीगी थी। एक सिहरन रीना के पूरे बदन में दौड़ गई। रोहित ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर झुक गया। रीना ने पहले तो थोड़ा विरोध किया, पर फिर उसकी अपनी इच्छा ने उसे पूरी तरह से रोहित के हवाले कर दिया। उनके होंठ एक-दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे दो प्यासे सदियों बाद पानी को पाए हों। यह एक **तनहा औरत की प्यास बुझाने वाली कहानी** की शुरुआत थी।
रोहित के हाथों ने रीना की साड़ी खोली, जो ज़मीन पर गिर गई। फिर ब्लाउज के बटन खुलने लगे और रीना के सुडौल स्तन आज़ाद हो गए। रोहित ने उन्हें मुँह में भर लिया और चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पीता है। रीना की आँखों से मदहोशी के आँसू बह निकले, उसके होंठों से आहें निकल रही थीं। रोहित ने उसे धीरे से बिस्तर पर धकेला और उसके पेटिकोट की डोरी खोल दी। रीना पूरी तरह से नग्न थी, उसका बदन कामुकता से थरथरा रहा था।
रोहित का मर्दाना बदन रीना के ऊपर आ गया। उसके होंठ रीना की गर्दन से होते हुए उसके स्तनों तक पहुंचे, फिर उसके पेट और नीचे, उसकी जांघों के बीच। रीना की योनि आज बरसों बाद इतनी बेताब थी। रोहित ने अपनी उँगलियों से उसे सहलाना शुरू किया, रीना दर्द और सुख के बीच झूल रही थी। उसकी सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। “आह… रोहित… बस… अब और नहीं रुका जाता,” रीना ने फुसफुसाया।
रोहित ने अपनी पैंट हटाई, उसका कठोर, उत्तेजित लिंग रीना की आँखों के सामने था। रीना की आँखें बंद हो गईं, और उसने खुद को पूरी तरह से सौंप दिया। रोहित ने धीरे से अपने लिंग का सिरा रीना की योनि पर रखा और एक गहरा धक्का दिया। एक हल्की सी चीख रीना के गले से निकली, जो तुरंत एक मदहोश कराह में बदल गई। रोहित अंदर था।
उनकी देह एक-दूसरे से जुड़ गईं, तालमेल बिठाने लगीं। रोहित के धक्के तेज़ होते गए, और रीना उसके साथ झूलने लगी। उनके पसीने से लथपथ बदन, एक-दूसरे की गर्मी में ऐसे घुल गए थे, जैसे दो आत्माएं सदियों से एक-दूसरे की तलाश में हों। रीना ने अपनी बाहों से रोहित को कस कर जकड़ लिया और अपने होंठों से उसके कंधे को चूमने लगी। “और तेज़, रोहित… और तेज़!” उसने हाँफते हुए कहा। रोहित ने उसकी इच्छा पूरी की, और हर धक्के के साथ, रीना को लगा कि उसकी सालों पुरानी प्यास, बूँद-बूँद करके बुझ रही है। यह सचमुच एक **तनहा औरत की प्यास बुझाने वाली कहानी** थी।
कुछ ही पलों में, दोनों एक साथ चरम पर पहुंच गए। रीना की योनि में रोहित का सारा वीर्य समा गया, और एक गहरी संतुष्टि ने उसे पूरी तरह से भर दिया। वे ऐसे ही एक-दूसरे की बाहों में पड़े रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। रीना ने रोहित को कसकर गले लगाया और उसके माथे पर एक प्यार भरी चूम दी। उसकी आँखों में अब कोई उदासी नहीं थी, केवल एक गहरी शांति और तृप्ति थी। रीना ने महसूस किया, उसकी सालों की प्यास बुझ गई थी, और यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उसकी हकीकत बन चुकी थी, एक ऐसी हकीकत जो शायद अब हर रात उसके दरवाज़े पर दस्तक देगी।
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