कॉलेज की किताबों से ज़्यादा, रिया की निगाहें आज प्रोफेसर आलोक शर्मा के होंठों पर टिकी थीं। शाम गहरा चुकी थी और आलोक के घर के स्टडी रूम में सिर्फ़ मेज़ लैंप की रोशनी थी, जो उनके चेहरे पर एक रहस्यमयी चमक बिखेर रही थी। उनके गणित के सूत्र अब रिया के मन में कोई जगह नहीं बना पा रहे थे; उसकी धड़कनें प्रोफेसर की आवाज़ के साथ तालमेल बिठा रही थीं। आज वह अतिरिक्त क्लास के बहाने से यहाँ आई थी, लेकिन दोनों ही जानते थे कि सिर्फ़ पढ़ाई ही उद्देश्य नहीं था। हवा में एक अजीब सी गर्मी और खिंचाव था, जो उनके शरीर को धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में ले रहा था।
“रिया, समझ में आया?” आलोक ने पास आकर झुका, उसकी साँसों की गरमाहट रिया के गालों पर महसूस हुई। रिया ने सिर्फ़ अपनी आँखें उठाईं और सीधे उनकी आँखों में देखा, एक लंबी, गहरी साँस ली। उसकी पलकें धीरे से झपकीं, जैसे वह कोई गुप्त संदेश दे रही हो। आलोक ने उसके खुले हुए बालों की एक लट को धीरे से पीछे किया, उसकी उंगलियों का हल्का स्पर्श रिया की गर्दन पर बिजली की तरह दौड़ गया। एक सिहरन उसके पूरे बदन में फैल गई।
“प्रोफेसर…” रिया की आवाज़ मुश्किल से निकली, जैसे गले में कुछ अटक गया हो। उसकी आँखें अब आलोक के होठों पर थीं, फिर से। आलोक ने उसकी बेताबी को भाँप लिया। उनके बीच के इस कॉलेज टीचर और स्टूडेंट का गुप्त संबंध अब सिर्फ़ किताबों तक सीमित नहीं था, यह एक ज्वार की तरह उनके भीतर उठ रहा था। उन्होंने अपना हाथ रिया के गाल पर रखा, उसकी त्वचा की गर्माहट महसूस करते हुए। रिया ने धीरे से आँखें बंद कर लीं, अपने माथे को उनके हाथ से छूने दिया।
अब कोई शब्द ज़रूरी नहीं थे। आलोक ने धीरे से अपना सिर झुकाया और रिया के नम होंठों पर अपने होंठ रख दिए। यह कोई हल्का चुम्बन नहीं था; यह भूख, प्यास और कई दिनों की दबी हुई इच्छा का इज़हार था। रिया ने तुरंत जवाब दिया, उसके होंठ भी उतनी ही शिद्दत से प्रोफेसर के होंठों को चूम रहे थे। उसकी उंगलियाँ अनायास ही आलोक की कमीज़ में घुस गईं और उसकी पीठ को सहलाने लगीं। आलोक ने उसे अपनी ओर खींचा, उसके स्तन उसकी छाती से दब गए।
उनके होंठ एक दूसरे से अलग हुए तो रिया की साँसें तेज़ हो चुकी थीं। आलोक ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके माथे, आँखों, गालों और फिर गर्दन पर चुम्बन करने लगे। उसकी उंगलियाँ रिया की पतली कमर पर फिसलती हुई उसकी साड़ी के पल्लू को हटा रही थीं। रिया ने आह भरी, उसकी आँखें बंद थीं, उसका शरीर आलोक के हर स्पर्श पर प्रतिक्रिया दे रहा था। साड़ी नीचे सरकी, फिर ब्लाउज़, और जल्द ही रिया का सुडौल बदन आलोक के सामने था, सिर्फ़ अंतर्वस्त्रों में। आलोक की आँखें उसकी सुंदरता पर ठहर गईं, उसकी हर वक्रता, हर उभार को निहारते हुए। यह कॉलेज टीचर और स्टूडेंट का गुप्त संबंध अब पूर्ण रूप से उजागर हो रहा था।
आलोक ने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम की ओर बढ़े, जहाँ सिर्फ़ अँधेरा और उनकी साँसों की आवाज़ें थीं। रिया ने अपनी टाँगें उनकी कमर के इर्द-गिर्द कस लीं, अपने होंठों से उनके गले को चूमती रही। बिस्तर पर पहुँचते ही, आलोक ने उसे धीरे से लिटाया और उसके ऊपर झुक गए। उनके कपड़े एक-एक करके हटते गए, हर अवरोध मिट गया। आलोक के मर्दाना शरीर की गर्मी रिया की कोमल त्वचा से टकराई।
आलोक की उंगलियाँ रिया की जाँघों के बीच से होती हुई, उसकी कामुकता के केंद्र तक पहुँचीं, उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। रिया की आहें और तेज़ हो गईं, उसका शरीर हिलने लगा। “प्रोफेसर…” उसने फुसफुसाया, उसके हाथों ने आलोक के बाल अपनी मुट्ठी में कस लिए। आलोक ने उसे पूरी तरह से महसूस किया, उसकी गरमाहट, उसकी नमी। और फिर, बिना किसी और देरी के, उन्होंने खुद को उसमें समाहित कर दिया।
एक गहरी, तृप्त कर देने वाली चीख़ रिया के होंठों से निकली। उनकी गति तेज़ होती गई, उनके शरीर एक-दूसरे से टकराते हुए एक लय में ढल गए। पसीना उनके बदन से बह रहा था, और कमरे में सिर्फ़ उनके अंगों के मिलने की आवाज़ें और उनकी बेकाबू साँसों का शोर था। रिया ने अपनी टाँगें आलोक की कमर पर कस ली थीं, और अपनी गर्दन को उनके कंधे पर टिका दिया था, हर धक्के के साथ एक नई गहराई तक डूब रही थी।
कई पल ऐसे ही गुज़रे, जब तक कि दोनों का शरीर चरम पर नहीं पहुँच गया। एक शक्तिशाली ऊर्जा ने उन्हें जकड़ लिया, और वे एक साथ मुक्त हुए, एक गहरी संतुष्टि के साथ। वे एक-दूसरे पर निढाल पड़े रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। रिया ने आलोक की पीठ पर अपने नाखून चलाए, एक मंद मुस्कान उसके होंठों पर थी। यह उनके बीच का कॉलेज टीचर और स्टूडेंट का गुप्त संबंध था, एक ऐसा रहस्य जो सिर्फ़ उन्हीं दोनों का था, और जिसका स्वाद आज रात बेहद मीठा था। अगली सुबह, कॉलेज की दीवारों के पीछे, वे फिर से प्रोफेसर और छात्रा होंगे, लेकिन उनकी आत्माएँ अब हमेशा के लिए एक-दूसरे से जुड़ चुकी थीं।
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