उसकी आँखों में आज कुछ ऐसा था, जो मेरे हर वर्जित विचार को हवा दे रहा था। प्रिया, मेरे जिगरी दोस्त समीर की पत्नी, हमेशा से मेरे लिए एक पहेली रही थी। उसकी पतली कमर पर लिपटी साड़ी, उसकी गहरी गर्दन की रेखा, और उसकी मुस्कान, सब कुछ एक मीठे ज़हर जैसा था जो धीरे-धीरे मुझे अपनी गिरफ़्त में ले रहा था। आज समीर शहर से बाहर गया था, और प्रिया ने मुझे रात के खाने पर बुलाया था, “सिर्फ दोस्तों की तरह,” उसने कहा था, पर उसकी आवाज़ में एक अनकही पुकार थी।
मैं जब उसके अपार्टमेंट में पहुँचा, तो हवा में ही एक अजीब सी गर्माहट महसूस हुई। प्रिया ने हल्के हरे रंग की साड़ी पहनी थी, जिसमें से उसकी साफ़, गोरी त्वचा चमक रही थी। बाल खुले हुए थे, और माथे पर पसीने की हल्की बूंदें, जैसे किसी तपती दोपहर की रानी। “आओ रमन, इतनी देर कहाँ लगा दी?” उसने कहा, उसकी आवाज़ शहद-सी मीठी थी। हम डिनर पर बैठे, पर मेरी आँखें खाने की बजाय उसके होंठों, उसकी गर्दन, उसके उठे हुए सीने पर अटक रही थीं।
बातचीत सामान्य थी, पर उसके स्पर्श अनजाने में ही मेरे हाथ से टकरा रहे थे, जैसे जानबूझकर। एक बार उसने झुककर मुझे पानी दिया, और उसकी साड़ी का पल्लू सरका, मेरी आँखों के सामने उसके गहरे उभार आ गए। मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। मन ही मन मैं जानता था कि यह सब ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ की ओर बढ़ रहा है, पर अब मुझे इसकी परवाह नहीं थी।
खाना खत्म हुआ, और हम लिविंग रूम में सोफे पर बैठ गए। कमरे में हल्की रोशनी थी, और धीमी आवाज़ में एक रोमांटिक गाना चल रहा था। प्रिया मेरे पास और खिसक आई। “रमन, तुम आज कुछ परेशान लग रहे हो,” उसने अपनी गर्म उंगलियों से मेरा हाथ छुआ। उस स्पर्श में एक आग थी। मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया, और धीरे से सहलाने लगा। उसकी साँसें तेज़ हो गईं। उसने अपनी आँखें ऊपर उठाईं, और हमारी नज़रें मिलीं। उन आँखों में अब कोई हिचक नहीं थी, सिर्फ एक नशीली चाहत थी।
मैं उसके और करीब आया, और मेरा हाथ धीरे-धीरे उसकी कमर पर सरका। उसकी साँसें अब लगभग रुक-सी गई थीं। मैंने उसे अपनी ओर खींचा, और उसने कोई विरोध नहीं किया। हमारे होंठ एक दूसरे से मिल गए। यह एक वर्जित, मीठा चुम्बन था, जो मेरी आत्मा तक को झकझोर रहा था। उसके होंठ नर्म और रसीले थे, जैसे किसी अधखिले फूल की पंखुड़ियाँ। चुम्बन गहरा होता गया, और मेरा हाथ उसकी कमर से होते हुए उसकी साड़ी के भीतर घुस गया, उसकी नग्न त्वचा को महसूस करते हुए। वह मेरे दोस्त की बीवी थी, पर उस पल वह सिर्फ मेरी प्रेमिका थी, एक वर्जित आनंद का प्रतीक। ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ का मीठा ज़हर अब मेरे रग-रग में था।
उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उसके होंठों से एक हल्की-सी आह निकली। मैंने उसे गोद में उठाया, और वह मेरी बाहों में सिमट गई, उसके पैर मेरी कमर को कस रहे थे। मैं उसे बेडरूम की ओर ले गया। बिस्तर पर पहुंचते ही, हमने एक दूसरे के कपड़ों को उतारना शुरू कर दिया, जैसे हम सदियों से इस पल का इंतज़ार कर रहे थे। उसकी साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट, सब एक-एक करके ज़मीन पर गिरे, और अंत में वह मेरे सामने एक देवी की तरह नग्न खड़ी थी, उसके उभार, उसकी पतली कमर, और उसके नितंब… सब कुछ इतना मोहक था।
मैंने उसे बिस्तर पर धकेला और उसके ऊपर झुक गया। उसकी गर्म देह मेरी देह से टकराई, और हमारे शरीर पसीने से भीगने लगे। मैंने उसके गर्दन पर, उसके स्तनों के बीच, उसके पेट पर, हर जगह अपने होंठ चलाए। वह बेकाबू हो चुकी थी, उसकी आहें, उसकी सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “रमन… और… और तेज़,” वह फुसफुसाई, उसकी आवाज़ कामुकता से भरी थी। मैंने उसकी योनि पर अपने होंठ रखे और उसे चूमना शुरू किया, उसकी गर्माहट और नमी मेरे मुँह में भर गई। वह छटपटा उठी, जैसे एक मछली पानी से बाहर।
जब मैंने उसके भीतर प्रवेश किया, तो एक गहरी, संतुष्टि भरी आह मेरे होंठों से निकली। वह कसकर मुझसे चिपक गई, उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ को खरोंच रही थीं। हर धक्के के साथ, हम दोनों एक गहरी खाई में उतरते जा रहे थे, जहाँ सिर्फ वासना और आनंद था। यह पापी सुख था, यह वर्जित संबंध था, पर इस पल से बढ़कर कुछ भी नहीं था। हाँ, यह ‘दोस्त की बीवी से अनैतिक संबंध’ ही था, और यह मेरे जीवन का सबसे जोशीला अनुभव था। हमारे शरीर एक दूसरे में ऐसे समा चुके थे, जैसे वे कभी अलग थे ही नहीं। अंत में, हम दोनों एक साथ चरम सुख की ऊँचाइयों पर पहुँचे, हमारे शरीर ढीले पड़ गए, पसीने से लथपथ। हम एक दूसरे से चिपके रहे, हमारी साँसें तेज़ थीं, और हमारे दिल ज़ोर से धड़क रहे थे। आज रात हमने सिर्फ शारीरिक सीमाओं को नहीं तोड़ा था, बल्कि एक ऐसी अग्नि जलाई थी, जो शायद कभी नहीं बुझेगी।
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