वासना की अग्नि: अधूरी प्रेम कहानी का दहकता अंत

दरवाज़ा बंद होते ही, उसके नैनों में वही आग दिखी जिसने बरसों पहले मुझे जलाया था। नयनतारा, मेरी नयनतारा, बरसों बाद आज मेरे सामने थी, उसी तीव्र चाहत के साथ जिसने कभी हमारे बीच एक **अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत** लिख ही नहीं पाया था। शहर में अचानक बिजली गुल हो गई थी और बाहर मूसलाधार बारिश ने माहौल को और भी सघन बना दिया था। मोमबत्ती की पीली लौ में उसके चेहरे की हर लकीर, हर उभार और भी मोहक लग रहा था।

“राजेश,” उसकी आवाज़ काँप रही थी, जैसे वर्षों से दबा कोई झरना अचानक फूटने को बेताब हो। मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ थामा। उसकी हथेली मेरी उंगलियों में सिमटते ही एक बिजली सी दौड़ गई मेरे तन-बदन में। “नयनतारा,” मैंने फुसफुसाया, और उसे अपनी ओर खींच लिया। वो एक पल भी न हिचकिचाई, बल्कि जैसे इसी स्पर्श का इंतज़ार कर रही हो, मेरी बाँहों में समा गई। उसके जिस्म की तपिश मेरे कुर्ते से भी आर-पार महसूस हो रही थी।

मेरे होंठ उसके होंठों पर ऐसे टूट पड़े, जैसे सदियों की प्यास बुझाने को आतुर हों। वो प्यास जो हमने सालों पहले अधूरी छोड़ दी थी, आज बेइंतहा ज़ोर से हमें अपनी ओर खींच रही थी। नयनतारा की सिसकियाँ मेरे मुँह में ही दब गईं जब मैंने उसकी निचली होंठ को अपने दाँतों में फँसाकर ज़ोर से चूसा। उसका कोमल बदन मेरे सीने से चिपका हुआ था, उसकी साँसें मेरी साँसों में घुल रही थीं। मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसे और कसकर अपनी ओर खींचा। उसके नरम वक्ष मेरे सीने से टकरा रहे थे, उनकी हर धड़कन मेरे दिल में उतर रही थी।

मेरे हाथों ने धीरे-धीरे उसके शरीर पर सफ़र करना शुरू किया। पहले उसकी पीठ, फिर कमर, और फिर धीरे से मैंने उसके आँचल को सरका दिया। साड़ी के नीचे छुपी उसकी नरम, गरम त्वचा को छूते ही वह सिहर उठी। उसकी गर्दन पर मैंने एक गहरी साँस भरी और अपनी ज़ुबान फिराई। “आह… राजेश…” उसकी हल्की चीख़ मेरे कानों में शहद घोल रही थी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और सर को पीछे की ओर लुढ़का दिया, जैसे पूरी तरह से मुझमें खो जाने को तैयार हो।

मैंने उसके पल्लू को ज़मीन पर गिरा दिया और फिर उसके ब्लाउज़ के हुक खोले। एक-एक करके खुलते हुक के साथ उसकी साँसें तेज़ होती गईं। ब्लाउज़ हटते ही, चाँदनी रात में मोमबत्ती की मंद रोशनी में उसके उभरे हुए वक्ष ऐसे दहक रहे थे, जैसे सदियों से कोई ज्वालामुखी शांत बैठा हो और अब फटने को तैयार हो। मैंने बिना देरी किए अपने होंठों को उन पर टिका दिया। नयनतारा की आहें कमरे में गूँजने लगीं। उसने मेरे बालों को कसकर पकड़ लिया और अपने कूल्हों को मेरी ओर और दबाया, जैसे मुझमें पूरी तरह विलीन हो जाना चाहती हो।

उसके शरीर की हर इंच पर मेरी उंगलियाँ और होंठ, एक नई कहानी लिख रहे थे। उसकी साड़ी भी धीरे-धीरे उसके बदन से अलग हो गई, और अब वो सिर्फ़ एक छोटी पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी। उसकी आँखें मदहोश थीं, शरीर थरथरा रहा था। “और नहीं… और इंतज़ार नहीं कर सकती,” उसने काँपते हुए कहा। मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया और उसके ऊपर झुक गया। उसकी पैंटी भी मैंने एक झटके में उतार दी।

हम दोनों के बदन अब नग्न थे, एक-दूसरे की तपिश से और धधकते हुए। मेरे लंड का सख्त उभार उसकी योनि के द्वार पर महसूस होते ही नयनतारा ने एक लंबी, गहरी साँस ली। “राजेश… आज… हमें अपनी **अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत** करना ही होगा,” उसने कहा, उसकी आवाज़ में एक अजीब सी ललक थी। मैंने उसकी बात सुनी और एक ही आवेग में उसके भीतर उतर गया। एक चीख़ उसके गले से निकली, जो दर्द और परम सुख का मिला-जुला संगम थी।

अब कमरे में सिर्फ़ हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ें थीं, हमारी गहरी साँसें थीं और नयनतारा की मदहोश कर देने वाली आहें थीं। मैं उसे हर उस पल का सुख दे रहा था, जो बरसों पहले छूट गया था। उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ को नाखूनों से खुरच रही थीं, उसकी टाँगें मेरी कमर पर कसकर लिपटी हुई थीं। एक तीव्र लहर उठी, और हम दोनों उस लहर के साथ बहते चले गए। नयनतारा के शरीर में एक अजीब सी ऐंठन आई और वो ज़ोर से चिल्लाई, “राजेश… हाँ… हाँ…!” मैं भी उसके साथ ही उस चरम सुख की गहराई में उतर गया, जहाँ सिर्फ़ हम दोनों थे, और हमारी वासना का **अधूरी प्रेम कहानी का रोमांचक अंत**।

हम दोनों निढाल एक-दूसरे की बाँहों में पड़े थे। बाहर बारिश थम चुकी थी, और बिजली भी आ गई थी। लेकिन हमारे भीतर जो तूफ़ान उठा था, उसने हमें हमेशा के लिए बदल दिया था। नयनतारा ने अपना सर मेरे सीने पर रखा और फुसफुसाया, “आज ये कहानी पूरी हो गई, राजेश।” उसकी आवाज़ में एक गहरा सुकून था, जो वर्षों के इंतज़ार और अधूरी चाहत के बाद मिला था।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *