दोपहर की ढलती धूप, और मीरा का अकेला मन आज किसी तूफ़ान की आहट महसूस कर रहा था। पति दफ्तर गए थे, और घर की खामोशी में उसकी धड़कनें बेतहाशा दौड़ रही थीं। उसने अपनी हलकी नीली साड़ी के पल्लू को थोड़ा और सरकाया, आइने में अपनी आँखों में सुलगती ज्वाला को देखा। आज रोहन…